उगते सूर्य को अर्घ्य देकर हुआ छठ पूजा का समापन, छग के घाटों पर उमड़े श्रद्धालु,गरियाबंद में जलाराम बापा की 225वीं जयंती

Chhath Puja concluded by offering prayers to the rising sun devotees gathered at the ghats of Chhattisgarh 225th birth anniversary of Jalaram Bapa in Gariaband

उगते सूर्य को अर्घ्य देकर हुआ छठ पूजा का समापन, छग के घाटों पर उमड़े श्रद्धालु,गरियाबंद में जलाराम बापा की 225वीं जयंती

रायपुर : लोक आस्था के महापर्व छठ के चौथे और अंतिम दिन आज छठव्रतियों ने उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर इस महापर्व का समापन किया. बड़ी संख्या में छठव्रती उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए छठ घाटों पर पहुंचे और तालाबों और पोखरों के पानी में डुबकी लगाने के बाद भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया. सभी ने अपने और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की.
छठ घाटों पर अर्घ्य देने के लिए छठव्रतियों के लिए छठ पूजा समिति की ओर से दूध का वितरण किया गया. साथ ही भगवान भास्कर को दूसरा अर्घ्य देकर घर लौट रहे छठव्रतियों के लिए शर्बत और पानी की व्यवस्था की गई.आपको बता दें कि बिहार-झारखंड में छठ पर्व का विशेष महत्व है. बिहार-झारखंड के लगभग हर घर में छठ पर्व पूरी आस्था और भक्ति के साथ मनाया जाता है. साथ ही छठ में शुद्धता का भी पूरा ख्याल रखा जाता है. चार दिवसीय छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है.
नहाय-खाय के दूसरे दिन चावल और गुड़ से बने प्रसाद को भगवान को अर्पित करने के बाद छठ व्रती उस प्रसाद को ग्रहण करती हैं. जिसके बाद छठ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है. पर्व के तीसरे दिन तालाबों, पोखरों और नदियों में खड़े होकर छठ व्रती अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के बाद अपने घर लौटती हैं. पर्व के अंतिम दिन छठव्रती सुबह-सुबह छठ घाट पर पहुंचती हैं और उगते हुए भगवान भास्कर को दूसरा अर्घ्य देने के बाद अपना 36 घंटे का निर्जला व्रत समाप्त करती हैं.
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गरियाबंद : 225वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ रविवार 08 नवंबर को मनाई गई। इस अवसर पर गुजराती समाज का उत्साह देखते ही बना।गांधी मैदान स्थित हरीश भाई ठक्कर के निज निवास पर जलाराम बापा के तैल चित्र में मंगलाचरण से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। गुजराती समाज के साथ अन्य समाज के लोगों ने पूजा की। वहीं,अभिषेक, पूजन, दीप दान,महाभोग का अनुष्ठान किए गए। महाआरती के बाद महिलाओं ने भजन कीर्तन कर जलाराम बापा का गुणगान किया। जयंती पर पूजन के बाद लोगोंं के बीच प्रसाद बांटा गया, खिचड़ी, कढ़ी, नुक्ती और गठिया का प्रसाद वितरित किया गया।भजन और गरबा में समाज की महिलाओं और पुरुष बच्चों बुजुर्गों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।
उल्लेखनीय है कि गुजराती समाज द्वारा ठक्कर परिवार के निज निवास में जो परम्परा आरंभ हुआ है आज वृहद स्वरुप ग्रहण कर चुकीं है। और प्रति वर्ष सैकड़ों लोग श्री जलाराम बापा की जयंती में शामिल होकर पुण्य के भागी बन रहे हैं इस वर्ष जलाराम बापा की जयंती धूमधाम से मनाया जा रहा है,सामाजिक जनों ने कहा कि संत शिरोमणी जलाराम बापा ने सदैव मानवता की सेवा की है, जिससे हमें प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। जयंती के अवसर पर समाज जनों ने पीड़ित मानवता की सेवा करने का संकल्प लिया है। इसके अलावा समाज में रचनात्मक और सृजनात्मक कार्यों को गति प्रदान किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि गुजराती समाज द्वारा ठक्कर परिवार के निज निवास में जो परम्परा आरंभ हुआ है आज वृहद स्वरुप ग्रहण कर चुकीं है। और प्रति वर्ष सैकड़ों लोग श्री जलाराम बापा की जयंती में शामिल होकर पुण्य के भागी बन रहे हैं इस वर्ष जलाराम बापा की जयंती धूमधाम से मनाया जा रहा है,सामाजिक जनों ने कहा कि संत शिरोमणी जलाराम बापा ने सदैव मानवता की सेवा की है, जिससे हमें प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। जयंती के अवसर पर समाज जनों ने पीड़ित मानवता की सेवा करने का संकल्प लिया है। इसके अलावा समाज में रचनात्मक और सृजनात्मक कार्यों को गति प्रदान किया जाएगा.
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सीपत : सूर्योपासना का महापर्व छठ सीपत के पनभरिया तालाब में भक्तिभाव से मनाया गया। शुक्रवार को छठ पर्व के चौथे दिन वर्तियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही विधि विधान से पूजा अर्चना की.
इस दौरान छठ घाट पनभरिया तालाब में पूजा के लिए श्रद्धालुओं सुबह से ही सैलाब उमड़ पड़ा। व्रतियों ने स्नान करने व जल चढ़ाने के बाद उगते सूर्य को अध्यं देकर अपने व परिवार के सुख समृद्धि की कामना की