दीवाली की रौशनी से पहले छा गया अंधेरा, दिन-रात चल रही कोयले की गाड़ियां लेकिन मजदूरों को बोनस और वेतन नहीं दे रहा प्रबंधन
Darkness descends before the light of Diwali, coal trucks ply day and night, but management refuses to pay workers bonuses and salaries.
बिलासपुर/दीपका : दीवाली की रौशनी से पहले दीपका के मजदूरों के जीवन में अंधेरा छा गया है. जहां एक तरफ़ कोयले की गाड़ियां दिन-रात चल रही हैं. वहीं दूसरी तरफ उन्हीं मजदूरों को उनके हक का बोनस और वेतन नहीं मिल पा रहा है. एसईसीएल दीपका के मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के बाहर मजदूरों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा. भीड़ के शक्ल में मजदूर नारेबाजी करते हुए मुख्यमहाप्रबंधक कार्यालय में प्रवेश कर गए.
दीवाली से पहले बोनस और केंद्र द्वारा तय वेतन नहीं मिलने से मजदूरों में भारी आक्रोश है. कोयला मजदूर पंचायत के बैनर तले आंदोलन प्रबंधन के खिलाफ चेतावनी बनकर उठा.
मजदूरों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन का पालन नहीं किया जा रहा है. और पीएलआई बोनस (प्रदर्शन आधारित लाभांश) से मजदूरों को पूरी तरह वंचित रखा गया है.
इतना ही नही तीन-तीन महीनों से तनख्वाह नहीं मिली. बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, ऊपर से बोनस भी रोक दिया गया. ये कहां का न्याय है?.
कोयला मजदूर पंचायत के प्रतिनिधि ने कहा कि अगर ठेका कंपनी बोनस देने में आनाकानी कर रही है. तो महाप्रबंधक को यह अधिकार है कि बोनस राशि सीधे मजदूरों को देकर कंपनी के बिल से काटी जाए. लेकिन इसके बावजूद प्रबंधन चुप है, जिससे मजदूरों में रोष फैल गया है.
दीपका में यह आंदोलन केवल बोनस की मांग नहीं, बल्कि इंसाफ की पुकार बन गया है. मजदूरों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गई, तो वे दीपावली के पहले ही कोयला परिवहन रोकने जैसे बड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे.
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