धमतरी पुलिस ने साइबर अपराधियों पर कसा शिकंजा, फर्जी सिम कार्ड जारी करने वाले दो पीओएस एजेंट गिरफ्तार, मोबाइल और SIM जब्त

Dhamtari police tightens noose on cyber criminals, arrests two POS agents for issuing fake SIM cards, seizes mobile phones and SIM cards

धमतरी पुलिस ने साइबर अपराधियों पर कसा शिकंजा, फर्जी सिम कार्ड जारी करने वाले दो पीओएस एजेंट गिरफ्तार, मोबाइल और SIM जब्त

धमतरी/अर्जुनी-मगरलोड : धमतरी पुलिस ने साइबर अपराधों पर नकेल कसते हुए फर्जी सिम कार्ड जारी करने वाले दो पीओएस एजेंटों को गिरफ्तार किया है, थाना अर्जुनी और थाना मगरलोड पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मोबाइल, सिम और अन्य उपकरण जब्त किए गए हैं, अभियान में अब तक 6 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं.
थाना अर्जुनी की कार्रवाई
पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर से मिली जानकारी के बाद अर्जुनी पुलिस ने जांच शुरु की. जांच में पता चला कि नूरेन्द्र पुरी उम्र 23 साल निवासी तरसींवा) नामक पीओएस एजेंट ने एयरटेल के 95 और वोडाफोन-आईडिया के 44, कुल 139 फर्जी सिम कार्ड जारी किए थे. आरोपी ने ग्राहकों के आधार, फोटो और बायोमेट्रिक डेटा का दुरुपयोग कर सिम कार्ड सक्रिय किए. जिन्हें बाद में साइबर ठगी और ओटीपी चोरी जैसे अपराधों में उपयोग किया गया.
जिस पर अपराध क्रमांक 40/2025 दर्ज कर आरोपी को धारा 318(4) BNS, 66(सी) आईटी एक्ट, और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023 की धारा 42(3)(E) के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया.
थाना मगरलोड की कार्रवाई
वहीं, मगरलोड पुलिस ने शिकायत के आधार पर नंदकुमार निषाद उम्र 41 साल निवासी बोरसी भाठापारा) को गिरफ्तार किया है. आरोपी ने वर्ष 2022 में एक ग्राहक के आधार और फेस आईडी का उपयोग कर फर्जी जिओ सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को जारी कर दिया था. उसके पास से पीओएस उपकरण और मोबाइल बरामद किए गए हैं.
जिस पर अपराध क्रमांक 57/2025 पर धारा 419, 420 भा.दं.सं., 66(सी) आईटी एक्ट व 42(3)(E) टेलीकम्युनिकेशन एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया है. सिटी कोतवाली व सिहावा पुलिस पहले ही चार आरोपियों को जेल भेज चुकी है. धमतरी पुलिस का कहना है कि फर्जी सिम कार्ड जारी करने वालों और म्यूल अकाउंट धारकों पर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी.
क्या होता है “म्यूल अकाउंट”?
म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग ठगी से प्राप्त पैसों को छिपाने या आगे ट्रांसफर करने में किया जाता है.
जो लोग अपने खाते दूसरों को उपयोग के लिए देते हैं. वे भी जुर्म में सहभागी माने जाते हैं और उन पर आईटी एक्ट व ठगी की धाराओं में कार्रवाई हो सकती है.
फर्जी सिम से कैसे होता है धोखा
फर्जी सिम कार्ड झूठे दस्तावेज़ों या किसी और की पहचान पर जारी किए जाते हैं. इनका उपयोग ऑनलाइन फ्रॉड, बैंक ठगी और फर्जी कॉल सेंटरों में होता है. ऐसे सिम बेचने या इस्तेमाल करने वाले को भी अपराधी माना जाता है.
क्या आपके आधार का इस्तेमाल कर आपके नाम पर भी फर्जी मोबाइल नंबर सक्रिय है? आज ही चेक करे https://tafcop.sancharsaathi.gov.in/ पर अपना फोन नंबर डाले और अपने नाम पर जारी सारे फोन नंबरों को देखे और फर्जी नंबर को ब्लॉक करवाए.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t