गरियाबंद-रायपुर और बिलासपुर में धान खरीदी से पहले कर्मचारियो ने किया बहिष्कार का ऐलान, 12 माह वेतन व नियमितीकरण की मांग पर अड़ा संघ

Employees in Gariaband, Raipur, and Bilaspur announced a boycott before paddy procurement, with the union adamant on demanding 12 months' pay and regularization.

गरियाबंद-रायपुर और बिलासपुर में धान खरीदी से पहले कर्मचारियो ने किया बहिष्कार का ऐलान, 12 माह वेतन व नियमितीकरण की मांग पर अड़ा संघ

गरियाबंद : चार सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी संघ, रायपुर एवं छ.ग.समर्थन मूल्य धान खरीदी कम्यूटर ऑपरेटर संघ, संयुक्त रुप से एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया नगर के गांधी मैदान में आयोजित धरना प्रदर्शन के बाद छत्तीसगढ़ के कई मंत्रियों के नाम, जिला स्तरीय ज्ञापन रैली आयोजित की.
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी से सम्बंधित कर्मचारियों के दोनो संगठनों द्वारा अपनी मांगों के लिये चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार की. जिसके तहत शुक्रवार छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में एक साथ जिला स्तरीय एक दिवसीय धरना प्रदर्शन ज्ञापन रैली, 28 अक्टूबर को प्रदेश स्तरीय महाहुंकार रैली, 3 नवम्बर से 11 नवंबर तक संभाग स्तरीय अनिश्चित कालीन आंदोलन, जबकि 12 नवंबर से छ.ग.शासन केबिनेट के निर्णय तक अनिश्चित कालीन आंदोलन की चेतावनी दी गई. 
कर्मचारी संघ के ज्ञापन में लेख है कि समर्थन मूल्य धान खरीदी में समय पूर्व प्रदेश के 2058 समितियों के 2739 उपार्जन केंद्रों से समानुपात में धान का परिवहन नही होने से मार्कफेड रायपुर द्वारा सुखत की राशि सहित प्रासंगिक व्यय सुरक्षा व्यय कमीशन की राशि काटकर समितियों को भुगतान करती है और मिलर द्वारा समय पर धान नहीं उठाने पर पेनाल्टी राशि खुद लेती है. फलस्वरुप धान खरीदी से होने वाली क्षति से समिति कर्मचारियों को समय पर वेतन नही मिल पा रहा है. जिससे सहकार से समृद्धि लाना असंभव है.
संघ द्वारा खाद्य विभाग में लंबित दो सूत्रीय मांगो तथा सहकारिता विभाग में लंबित दो सूत्रीय मांगों, इस तरह कुल 4 सूत्रीय मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की है. वरना अनिश्चित कालीन हड़ताल की चेतावनी दी.
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रायपुर : छत्तीसगढ़ समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ ने प्रदेश भर के 2739 धान उपार्जन केंद्रों में कार्यरत ऑपरेटरों को 12 माह की बजाय सिर्फ 6 माह का वेतन देने के शासन के फैसले के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर कहा कि ऑपरेटर साल भर काम करते हैं ऐसे में सिर्फ 6 महिना का वेतन देना न तो न्यायसंगत है और न ही संवैधानिक दृष्टि से उचित..
संघ के प्रदेश अध्यक्ष ऋषिकांत मोहरे ने बताया चार सूत्रीय मांग को लेकर वे कलेक्टरे में संघ की चार सूत्रीय माँग को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन देंने पूरे संघ के साथ पहुचे. संघ के द्वारा एसडीएम हीतेश्वरी बाघे को ज्ञापन सौपा गया.
अध्यक्ष मोहरे ने कहा कि धान खरीदी की तैयारियाँ 1 जुलाई से शुरु होकर 31 जनवरी तक चलती हैं. जबकि फाइल अपलोडिंग और भुगतान कार्य अगले कुछ महीनों तक चलता रहता है. फिर भी शासन ने 2025-26 में सिर्फ 6 माह का वेतन स्वीकृत किया है. यह फैसला ऑपरेटरों के साथ अन्यायपूर्ण है. जिन्हें पिछले 18 साल से न्यूनतम पारिश्रमिक पर काम कराया जा रहा है.
जिला कोषाध्यक्ष, समिति कर्मचारी महासंघ दिनेश चंद्राकर ने कहा कि धान खरीदी के दौरान हम कर्मचारी लगातार धान को सुरक्षित रखते हैं. लेकिन शासन द्वारा तीन-तीन महीने बाद उठाव किया जाता है. ऐसे में धान में सुखत आना स्वाभाविक है. शासन द्वारा हम कर्मचारियों पर एफ आई आर होता है जो गलत है. इसलिए हमारी प्रमुख मांग है कि धान में होने वाले सुखत का उचित प्रावधान शासन स्तर पर किया जाए.
संघ ने इस अन्यायपूर्ण नीति के विरोध में आंदोलन की रूपरेखा भी तय की है
1️⃣ 24 अक्टूबर 2025 को सभी जिलों में जिला मुख्यालयों पर प्रतीकात्मक रैली और ज्ञापन सौंपा जाएगा
2️⃣ 28 अक्टूबर 2025 को संभागीय स्तर पर धरना प्रदर्शन होगा
3️⃣ 3 नवम्बर से अनिश्चित कालीन आंदोलन
4️⃣ 12 नवंबर 2025 से मांगें पूरी न होने की स्थिति में प्रदेश स्तरीय अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरु की जाएगी
संघ ने चेतावनी दी कि अगर शासन ने आगामी कैबिनेट बैठक में कंप्यूटर ऑपरेटरों की 12 माह के वेतन भुगतान और नियमितीकरण की मांग पर फैसला नहीं लिया तो प्रदेशभर के 15 हजार से ज्यादा समिति कर्मचारी और ऑपरेटर आंदोलन को व्यापक बनाएंगे.
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बिलासपुर : छत्तीसगढ़ में धान खरीदी शुरू होने से पहले ही छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ और ऑपरेटर संघ ने धान खरीदी का बहिष्कार करने का ऐलान किया. आने वाले दिनों में इसका असर सीधे धान खरीदी प्रक्रिया पर पड़ेगा. राज्य सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द फैला नहीं लिया, तो वे 12 नवंबर से धान खरीदी का पूर्ण बहिष्कार करेंगे. इसमें प्रदेश की सभी सहकारी समितियों के कर्मचारी और 39 उपार्जन केंद्रों के संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल होंगे.
इस बार धान खरीदी से पहले सरकार और कर्मचारियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी. अब यह देखने की बात है कि प्रशासन समय रहते कर्मचारियों को मनाने में कामयाब होता है या आंदोलन धान खरीदी की शुरुआत से पहले ही खरीदी केंद्रों पर असर दिखाएगा. धान खरीदी और किसानों का भविष्य अब सीधे इस आंदोलन से जुड़ा हुआ है.
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