प्रेमी-प्रेमिका के बीच गले लगाना और KISS करना जुर्म नहीं, नाबालिग पत्नी के साथ सहमति के साथ संबंध बनाना भी दुष्कर्म, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Hugging and kissing between boyfriend and girlfriend is not a crime having sex with a minor wife with consent is also a misdemeanor High Court gave a big decision

प्रेमी-प्रेमिका के बीच गले लगाना और KISS करना जुर्म नहीं, नाबालिग पत्नी के साथ सहमति के साथ संबंध बनाना भी दुष्कर्म, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

नाबालिग पत्नी के साथ सहमति के साथ संबंध बनाना भी दुष्कर्म, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने कहा कि अगर पत्नी की उम्र 18 साल से कम है. तो सहमति से यौन संबंध बनाने वाले के खिलाफ भी रेप का मामला दर्ज हो सकता है. उच्च न्यायालय ने दोषसिद्धि को बरकरार रखा है.
दोषी का तर्क था कि पीड़िता के साथ यौन संबंध सहमति से बनाए गए थे और उस समय वह उसकी पत्नी थी. ऐसे में इसे बलात्कार नहीं कहा जा सकता है. जस्टिस गोविंद सनप की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 12 नवंबर को जारी आदेश में जज ने कहा कि 'एपेक्स कोर्ट की तरफ से निर्धारित कानून के मद्देनजर यह बात कबूल नहीं की जा सकती कि अपीलकर्ता का पीड़ित पत्नी के साथ यौन संबंध बनाना बलात्कार या यौन हिंसा नहीं माना जाएगा. यह बताना जरुरी है कि 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ संभोग करना बलात्कार है. फिर चाहे वह शादीशुदा हो या नहीं.
अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए इस मौजूदा मामलें में पत्नी के साथ सहमति से यौन संबंध के बचाव तर्क को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. अगर ऐसा मान भी लिया जाए कि दोनों के बीच तथाकथित विवाह हुआ था. तो भी पीड़िता की तरफ से आरोपों के मद्देनजर यौन संबंध उसकी सहमति के बगैर बने थे. इसे रेप माना जाएगा.
9 सितंबर 2021 को वर्धा जिले के ट्रायल कोर्ट ने युवक को POCSO एक्ट के तहत दोषी पाया था. अब उसने हाईकोर्ट में आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी. अपीलकर्ता को नाबालिग लड़की की शिकायत के बाद 25 मई 2019 को गिरफ्तार किया गया था. खास बात है कि उस समय लड़की 31 हफ्ते की गर्भवती थी. पीड़िता का कहना था कि दोनों के बीच प्रेम प्रसंग था और अपीलकर्ता ने उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए और शादी का झूठा वादा कर इसे जारी रखा.
गर्भवती होने के बाद पीड़िता ने अपीलकर्ता से शादी करने के लिए कहा था. इसके बाद उसने एक घर किराए पर लिया और पड़ोसियों की मौजूदगी में हार पहनाए और भरोसा दिलाया कि वह उसकी पत्नी है. इसके बाद उसने शिकायतकर्ता से अबॉर्शन कराने के लिए जोर डाला. हालांकि पीड़िता ने इससे इंकार कर दिया था और मारपीट के आरोप लगाए. जब आरोपी ने पीड़िता को उसके माता-पिता के घर पर छोड़ दिया. तब उसे एहसास हुआ कि अपीलकर्ता ने शादी का दिखावा किया है और उसका शोषण किया है.
ट्रायल कोर्ट में क्रॉस एग्जामिनेशन में पीड़िता ने कबूल किया है कि उसने बाल कल्याण समिति में शिकायत की है. साथ ही तस्वीरों के हवाले से अधिकारियों को बताया था कि वह उसका पति है. अब इसके आधार पर अपीलकर्ता ने कहा था कि यौन संबंध सहमति से बने थे. बेंच ने कहा कि मेरे विचार में इस दलील को स्वीकार नहीं करने के एक से ज्यादा कारण हैं. इस मामले में अभियोजन पक्ष ने साबित कर दिया है कि अपराध के समय पीड़िता की उम्र 18 साल से कम थी. कोर्ट ने अपील को खारिज कर दिया.
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प्रेमी-प्रेमिका के बीच गले लगाना और KISS करना स्वाभाविक है, अपराध नहीं

मद्रास हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि प्रेम करने वाले युवक और युवती के बीच गले लगाना और चूमना स्वाभाविक बात है. कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे एक युवक को राहत देते हुए ये अहम टिप्पणी की.
जस्टिस आनंद वेंकटेश ने कहा कि आईपीसी की धारा 354-A (1) (i) के तहत अपराध होने के लिए पुरुष की तरफ से शारीरिक संपर्क बनाना जरुरी है और प्रेमी-प्रेमिका के बीच शारीरिक संपर्क जैसे गले लगाना या चूमना, स्वाभाविक है. यह किसी भी तरह से जुर्म नहीं है.
यह मामला संथनगणेश नामक व्यक्ति से संबंधित था. जिसने कोर्ट में याचिका दायर करते हुए ऑल वुमन पुलिस स्टेशन की तरफ से उनके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर (FIR) को रद्द करने की मांग की थी. आरोप था कि शिकायतकर्ता ने 13 नवंबर 2022 को याचिकाकर्ता से मिलने के बाद बातचीत के दौरान उसे गले लगा लिया और चूम लिया.
इसके बाद शिकायतकर्ता ने इस घटना की जानकारी अपने माता-पिता को दी और फिर याचिकाकर्ता से शादी करने का आग्रह किया. जिसे उसने नकार दिया. इसके बाद शिकायतकर्ता ने याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी.
कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को राहत दी और कहा कि अगर आरोपों को सच मान भी लिया जाए तो भी याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई जुर्म का केस नहीं बनता है. कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई की कोई जरुरत नहीं है. यह फैसला प्रेम संबंधों में शारीरिक संपर्क को अपराध के रूप में न देखने की दिशा में अहम कदम है.
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