राजिम कुंभ कल्प में प्रसिद्ध गायिका ऐश्वर्या पंडित और हंसराज रघुवंशी के गीतों में झूमे दर्शक, पंडोखर सरकार का दिव्य दरबार, शिक्षा विभाग का लगा स्टॉल
In Rajim Kumbh Kalp, the audience danced to the songs of famous singers Aishwarya Pandit and Hansraj Raghuvanshi, divine court of Pandokhar government, stall of education department was set up.
राजिम कुंभ कल्प में प्रसिद्ध गायिका ऐश्वर्या पंडित के सुपर हिट गीतों की हुई प्रस्तुति
राजिम कुंभ कल्प के मुख्य मंच पर 23 फरवरी रविवार को प्रसिद्ध गायिका ऐश्वर्या पंडित द्वारा सुपर हिट गीतों की प्रस्तुति हुई. कार्यक्रम की कड़ी में गोविन्द साहू की टीम लोक कलामंच की शानदार प्रस्तुति दी.। द्रोपती बाई निषाद की टीम जसगीत के माध्यम से भक्तिमय गीतों की प्रस्तुति दी. शकुन साहू की टीम छत्तीसगढी लोक नृत्य सुवा, शिल्पा सिंग-मॉ कत्यानी की टीम कत्थक नृत्य से अपनी प्रस्तुति दी. रामदास कुर्रे की टीम लोककला मंच की प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनोरंजन किया.
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राजिम कुंभ कल्प में लगा चैतन्य नौ देवियों की झांकी: मां दुर्गा के स्वरूपों का हो रहा साक्षात दर्शन
राजिम कुंभ कल्प मेला में कुलेश्वर मंदिर के पास संत समागम स्थल पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा शिव दर्शन आध्यात्मिक पंडाल में चैतन्य नौ देवियों की झांकी लगाई गई है। इन नौ देवियों के दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो रहे हैं। ब्रह्माकुमारी बहनों ने बताया कि राजिम कुंभ मेला में प्रतिवर्ष उनकी यह झांकी लगाई जाती है, जिसमें मां दुर्गा के स्वरूपों का साक्षात दर्शन हो रहा है। इस झांकी के माध्यम से वर्तमान समय में निराकार परमात्मा प्रजापिता ब्रह्मा के माध्यम से सहज राजयोग की शिक्षा कैसे दे रहे हैं उसे चैतन्य रूप में दर्शाया गया है। राजयोग के माध्यम से ये चैतन्य नौ देवियां शक्तियां ले कर अपने अपने कर्तव्य व नाम पुष्पित कर रही हैं। लाइट और साउंड के अद्भुत संयोजन से उनके आकर्षण में चार चांद लग जाते हैं। इस दौरान ब्रह्माकुमारी बहनों द्वारा श्रद्धालुओं को चैतन्य देवियों का आध्यात्मिक महत्व शिव अवतरण के बारे में भी बताया जा रहा है। कार्यक्रम के पश्चात तीन दिन का राजयोग शिविर भी कराया जा रहा है।
झांकी देखने पहुंचे धमतरी, भेण्डरी, नवागांव, गरियाबंद, कौंदकेरा, मानिकचौरी सहित अन्य स्थानों के लोगों ने बताया कि ऐसी सुंदर और जीवंत झांकी का दृश्य देखकर बहुत ही सुखद अनुभूति हो रही है। कई लोगों ने ऐसी झांकी पहली बार देखी है। कहा कि यह गौरव की बात है कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारियों द्वारा इतना सुन्दर आयोजन राजिम कुंभ कल्प मेला में किया गया है। यहां आने के बाद व्यक्ति स्वयं को तनाव मुक्त महसूस करने लगता है। आदिशक्ति के रूपों की जीवंत प्रस्तुति अत्यंत सराहनीय है।
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प्रसिद्ध गायक बाबा हंसराज रघुवंशी को सुनने उमड़ा जन सैलाब, भोलेबाबा के भजनों से झूम उठे भक्त
हंसराज के तुमसे लगी लगन मेरे शंकरा..., मेरा भोला है भंडारी..., शिव कैलाश जैसे ओजस्वी प्रस्तुति ने दर्शकों को किया झूमने पर मजबूर
राजिम कुंभ कल्प के दसवें दिन सुप्रसिद्ध गायक बाबा हंसराज रघुवंशी ने राजिम कुंभ कल्प मेला के सांस्कृतिक मंच पर अलग ही जान डाल दी। बाबा हंसराज रघुवंशी के ओजस्वी प्रस्तुति ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। मंच पर सुरमयी गीतों एवं भजनों के साथ संगीत के मिश्रण ने ऐसा रंग जमाया की कुछ समय के लिए श्रोतागण संगीत के सुरमयी धारा में बाबा हंसराज रघुवंशी के साथ हो लिए।
बाबा हंसराज रघुवंशी के भोले शंकर.. शिव शंभू से ओतप्रोत भक्तिमय गीतों के सुरों में लोग झूम उठे। जय शिव शंभू.., राधे राधे..., शिव समा रहे मुझमें.., लगी तो तुमसे लगन मेरे शंकरा..., मेरा भोला है भंडारी..., शिव कैलाश के वासी..., महाकुंभ में डुबकी लगा..., महादेव मिल जाएंगे..., हम भोले के हैं भक्त..., अयोध्या आएं है प्यारे राम..., भोले बाबा तेरी क्या बात हैं..., पार्वती बोली शंभू से..., महादेव तेरी डमरू डम -डम -बाजे..., जैसे मनभावन भक्ति गीतों से लोगों का मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी भक्तिमय गीतों ने भगवान शंकर के प्रति आस्था एवं समर्पण से अवगत कराया। शुक्रवार को बाबा हंसराज ने अपने भजनों से ऐसा समा बंधा कि लोग नाचते, गाते और झुमते हुए दिखे। छोटे बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्ग तक उनके भजनों में झूमने नाचने लगे। हंसराज की एक झलक पाने और उनको सुनने जन सैलाब उमड़ पड़ा। मंच से सामने दर्शकों की ऐसी भीड़ थी कि पैर रखने के लिए जगह नहीं बची थी।
सांस्कृतिक मंच पर दर्शकों ने अन्य कार्यक्रम भी उठाया लुत्फ
सांस्कृतिक मंच में कामीन टोण्डरे की टीम ने पंथी नृत्य के माध्यम से संत गुरू घासीदास के संदेशो को श्रोताओं तक पहुंचाया और मनुष्य के जीवन में अध्यात्मिक, निर्गुण भक्ति के प्रभाव को बताया। जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। नंदकुमार साहू की टीम ने राजकीय गीत से कार्यक्रम की शुरुआत की। राजीव लोचन को प्रणाम करते हुए सुमधुर भजन तोर घर बेटा बिराजै..., लल्ला बेटा राजा मइया..., गोकुल जावत है..., कृष्ण लीला की झांकी व कृष्ण भगवान की बाल लीला की बहुत सुंदर प्रस्तुति दी। लोकेश्वर वर्मा की टीम ने जसगीत में भक्तिमय प्रस्तुति दी। ललित यादव की टीम ने भजन संध्या से अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी। शिवनंदन चक्रधारी की टीम ने मानस गान में राम भक्त हनुमान के भक्ति की व्याख्या की। धन्नू लाल साहू की टीम लोक कला मंच ने छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परंपरा को मंच पर बिखेरा। साधेलाल रात्रे की टीम ने पंथी नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गीत से ताल मिलाते हुए एक साथ तय बरत रहिबे बाबा... पर नृत्य किया। बिलासपुर की आंचल पाण्डेय ने नृत्य नाटिका के माध्यम से भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की जीवंत प्रस्तुति दी। आरती सिंह ने मनमोहक भाव भंगिमा के साथ कत्थक नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। देवी भूमिका की टीम ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। व्यास नाथ योगी ने चंदैनी एवं आनंद निषाद की लोक कला मंच ने शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
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राजिम कुंभ कल्प में लगा शिक्षा विभाग का स्टॉल
गणित और भौतिक के सूत्रों को समझाने बनाया गया चलित मॉडल
राजिम कुंभ कल्प के नवीन मेला मैदान में गरियाबंद जिले के विभिन्न विभाग द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसमें शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल प्रदर्शनी में बच्चों द्वारा बनाए गए विज्ञान के मॉडलों से लोगों को विज्ञान के धर्मगुण और सूत्र समझाने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा भौतिक विषय के अंतर्गत कई मॉडलों द्वारा प्रायोगिक विषयों की जानकारी दी जा रही है। गणित विषय के लिए मॉडल बनाकर गणित और भौतिक के सूत्रों को समझाने के लिए चलित मॉडल बनाए गए हैं। इन मॉडलों के माध्यम से यदि बच्चों को स्कूलों में गणित और भौतिक जैसे विषयों पर समझाया जाए, तो बच्चों को गणित और भौतिक के सूत्रों को समझने में काफी आसानी होगी।
इसी प्रकार रेलवे स्टेशन का मॉडल बनाया गया है। जिसमें ट्रेन जाने के बाद ऑटोमेटिक एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म जाने के लिए एक ऐसा रास्ता बन जाता है, जिसमें चलकर बुजुर्ग, बीमार, असहाय लोग बिना ओवरब्रिज के चढ़े एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक आसानी से पहुंच सकते हैं। इसी तरह खेल खेल में पढ़ाई के विभिन्न माध्यमों की जानकारीयां मेले घूमने आए छात्रों और अभिभावकों को दी जा रही है।
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राजिम कुंभ कल्प में पहुंचने लगे साधु-संत: छह फिट लंबी जटा और दाढ़ी वाले बाबा को देखने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
12 फरवरी से प्रारंभ हुए राजिम कुंभ कल्प मेला में 21 फरवरी से संत समागम प्रारंभ हो गया है। संत समागम में शामिल होने देश के विभिन्न क्षेत्रों से साधु-संत महात्मा पहुंचे हुए हैं। जहां संत होते है वहां सात्विक भाव और शांति होती है। उनके दर्शन से ही पुण्य फल की प्राप्ति होती है। संतो के अमृत वचनों से भटके हुए मन को नई दिशा मिलती है। जिनका आशीर्वाद पाने दूर-दूर से भक्त जन राजिम आ रहे है। त्रिवेणी संगम क्षेत्र में बने संत समागम स्थल पर श्रध्दालुओ की भीड़ देखी जा रही है।
लोमष ऋषि आश्रम में एक ऐसे संत आए हैं, जिनका नाम है चंदन भारती। वे जुना अखाडा से है जिनके गुरू सुशील भारती जी है। महाराज जी की जटा और दाढ़ी 6 फीट की है। उन्होंने चर्चा के दौरान बताया कि वे प्रयागराज से सीधे राजिम कुंभ आए हैं। 2006 से प्रतिवर्ष राजिम कुंभ मेला में शामिल होते हैं। अपनी जटा के बारे में बताया की जो शिव जी के भक्त होते हैं, वे श्रद्धा भाव से जटा रखते है। साधु एक जगह स्थिर नही होते। वे साधना पूर्ण जीवन व्यतीत करते है। जंगल-झाडी में जहां मन लगता है, वहीं विश्राम कर लेते है।
वे सुख-सुविधाओं को त्याग कर शिव भक्ति में लीन रहते है। शिव भक्तों में जटा के महत्व को बताते हुए कहा कि इन जटाओं को रखने के पीछे कई धार्मिक, वैज्ञानिक और अध्यात्मिक कारण होते है। कोई भी व्यक्ति सन्यास लेने के बाद ही साधु बनते है, जो की सांसारिक मोह-माया से दूर होते है। जप-तप और अनुष्ठान से श्रेष्ठ कार्य कर अपना जीवन ईश्वर की सेवा मे समर्पित करते है। साधु-संतो की जटाए उनके जीवन में त्याग-तपस्या पूर्ण जीवन शैली का प्रतीक है। उनकी जटाएं भगवान शिव के प्रति उनकी सच्ची अराधना को प्रदर्शित करते है।
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राजिम कुंभ कल्प के मुख्य मंच पर बरसी संतों की अमृतवाणी
धर्म का रास्ता देखने संतो की शरण में जाना होगा
राजिम कुंभ कल्प मेला में 21 फरवरी से संत समागम का शुभारंभ हुआ। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह शामिल हुए। कार्यक्रम में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद गिरि, महामंडलेश्वर नवल गिरी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशानंद महाराज, महामंडलेश्वर मनमोहनदास महाराज, ब्रह्मचारी डॉ. इंदुभवानंद महाराज, दंडी स्वामी सच्चिदानंद तीर्थ महाराज, संत द्वारकेश महाराज, संत गुरुशरण महाराज (पंडोखर सरकार), महंत नरेंद्र दास महाराज, स्वामी राजीव लोचन दास महाराज, रामबालक दास महाराज, साध्वी महंत प्रज्ञा भारती सहित विशिष्ट साधु-संतों का सानिध्य एवं आशीर्वचन श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ।
सनातन और हिन्दुत्व की आंधी आई है - महामंडलेश्वर नवल गिरी
इस अवसर पर महामंडलेश्वर नवल गिरी महाराज ने कहा की सनातन और हिन्दुत्व की आंधी आई है। भारत की शक्ति को देखिए। अभी प्रयागराज महाकुंभ का आयोजन हो रहा, जहां भीड रूक नहीं रही। आज हम गर्व से कह सकते है कि हम हिन्दू है। कहा कि हम चाहते है की बच्चों को बडी-बडी डिग्री भले ही दे, लेकिन सबसे पहले उन्हें संस्कार सिखाएं। सुबह उठकर हनुमान चालिसा की पाठ अवश्य पढ़ने की आदत डालें। राजिम और प्रयागराज के कुंभ दर्शन से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
सभी युवा विवेकानंद की तरह सनातन धर्म का प्रचार करें - महामंडलेश्वर शैलेशानंद
महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशानंद महाराज ने कहा कि जिस दिन से राजिम कुंभ परंपरा का प्रारंभ हुआ वह दिन शुभ था। यह सनातन धर्म को आगे बढ़ाने का सबसे अच्छा माध्यम है। अभी प्रयागराज में जन सैलाब है। वैसे ही एक दिन इस राजिम कुंभ में भी श्रध्दालुओं की भीड़ रहेगी। प्रत्येक संत चाहते है की प्रत्येक युवा विवेका नंद की तरह सनातन धर्म का प्रचार करें। हमारे देश में फिर से मकरंद हो जाए..., युवा पीढी संभलकर विवेकानंद हो जाएं। आज युवा पीढ़ी भटक रही है। कुछ विद्रोहियो द्वारा हमारी संस्कृतियो को दूषित किया जा रहा है।
राजीव लोचन और कुलेश्वर महादेव से राजिम की पहचान - स्वामी राजीव लोचन दास
इस अवसर पर स्वामी राजीव लोचन दास महाराज ने कहा किं राजीव लोचन और कुलेश्वर महादेव से राजिम की पहचान है। 500 वर्षाे के वनवास के बाद भगवान श्रीराम अपने स्थान पर पहुचे। उन्होंने कहा अपनी जुबान से ऐसी बात बोलों जिससे समाज को नई दिशा मिले। 57 करोड लोगो ने कुंभ मे स्नान किया है और विश्व का इतिहास बदल दिया है। संत समागम का संचालन महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद गिरि ने किया। उन्होंने कहा कि गुगल में पृथ्वी का रास्ता दिख सकता है, लेकिन धर्म का रास्ता देखने के लिए संतो की शरण में जाना होगा।
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राजिम कुंभ कल्प में कार्यक्रम हेतु भव्य मंच तैयार किया गया है। पंचकोशी धाम की थीम पर बना मुख्य मंच की साज सज्जा देखते ही बनती है। यहां मंचीय कार्यक्रम के अलावा प्रतिदिन राष्ट्रीय स्तर के कलाकार अपनी प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। साथ ही बॉलीवुड के प्रसिद्ध कलाकार भी दर्शकों के दिल को जीत लेते है। राष्ट्रीय स्तर के इस मंच में आना ही सौभाग्य की बात है।
राजिम कुंभ कल्प के इस मंच में इस बार सबसे अधिक छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में उभर रही प्रतिभाओं को मंच में स्थान दिया गया है। यह सब भगवान कुलेश्वर नाथ महादेव और राजिम लोचन के कृपा से संभव हो पा रहा है। विशाल मंच पर प्रतिदिन संध्या भगवान राजीव लोचन की पूजा आरती पंडितों के मंत्रोच्चारण के साथ किया जाता है। पंडित अर्जुन प्रसाद तिवारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ के लोगों की सुख-समृध्दि और विकास की कामना के लिए हम संध्या कालीन आरती करते है। शाम 7:30 बजे आरती कर भगवान को भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया जाता है। राजिम कुंभ कल्प में आने वाले सभी कलाकार प्रस्तुति से पहले भगवान श्री राजीव लोचन का आशीर्वाद लेते है और अपनी कला का प्रदर्शन करते है।
राजिम कुंभ कल्प मेला के संत समागम स्थल पर पंडोखर सरकार का दिव्य दरबार 21 फरवरी से प्रारंभ हो गया है। यह दरबार 25 फरवरी तक दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक लगाया जा रहा है। 22 फरवरी शनिवार को महाराज के भक्त और शिष्यगणों ने दिव्य दरबार में उपस्थित होकर अपनी जिज्ञासाओ और समस्याओं के समाधान पाया। इस दौरान पंडोखर सरकार के गुरुशरण महाराज ने भक्तों की समस्याओं को सुनकर उसका समाधान बताया।
दरबार शुरू होने से पहले मंच पर बालाजी महाराज की पूजा अर्चना कर उनकी आरती की गई। फिर गुरू पूजन के बाद दरबार की औपचारिक कार्यवाही शुरू की गई। जिसका लाभ उपस्थित जन समुदाय में अपने समस्याओं का समाधान प्राप्त कर उठाया। लंबे अंतराल के बाद इस बार पंडोखर सरकार का दरबार राजिम के कुंभ कल्प में लगाया गया है, जिसके कारण उनके भक्तों और शिष्यों में काफी उत्साह है। उनके दर्शन और अपनी समस्याओ के समाधान के लिए भक्तों की भीड दरबार में पहुंच रही है। भक्त अपनी समस्याओं को लेकर अपनी बारी का इंतजार करते रहते हैं.



