सरकारी पैसों से बने पीएम आवास पर चल रहा प्रशासन का बुलडोजर? विधायक कॉलोनी के लिए साजिश!, गांव में बवाल, पुलिस-ग्रामीणों में धक्का-मुक्की

Is the administration's bulldozer targeting PM Awas houses built with public funds? A conspiracy for an 'MLA Colony'! Uproar in the village; scuffles break out between police and villagers.

सरकारी पैसों से बने पीएम आवास पर चल रहा प्रशासन का बुलडोजर? विधायक कॉलोनी के लिए साजिश!, गांव में बवाल, पुलिस-ग्रामीणों में धक्का-मुक्की

रायपुर : राजधानी रायपुर के नकटी गांव में इस वक्त भारी तनाव का माहौल है. प्रशासन की टीम जब एक दर्जन से ज्यादा मकानों को तोड़ने के लिए बुलडोजर लेकर पहुंची तो पूरा गांव सड़क पर उतर आया. ग्रामीणों ने गांव के बाहर ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को रोक लिया. इस दौरान गुस्साए ग्रामीणों और पुलिस के बीच जमकर धक्का-मुक्की भी हुई. हालात बिगड़ते देख मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.
पीएम आवास के मकानों को ही बता दिया अवैध..
इस पूरे मामले का सबसे हैरान करने वाला एंगल यह है कि जिन मकानों को प्रशासन अवैध बताकर आज तोड़ने पहुंचा है, उनमें से कई मकान शासन की ही ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के पैसों से बने हैं. ग्रामीणों का रो-रोकर बुरा हाल है. उनका सीधा सा सवाल है कि जब शासन ने खुद आर्थिक सहायता देकर ये पक्के मकान बनवाए थे. तो अब अचानक वे अवैध कैसे हो गए? जिन बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों ने अपनी जिंदगी भर की पूंजी लगाकर और कर्ज लेकर अपने घर बनाए थे. प्रशासन उन्हें बेघर कर खुले आसमान के नीचे लाने की तैयारी कर रहा है.
विधायक कॉलोनी के लिए रची जा रही साजिश?
ग्रामीणों ने प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उन्हें उनके ही घरों से बेदखल करने के पीछे विधायक कॉलोनी बनाने की साजिश है. गांव की जिस 37 एकड़ जमीन को चारागाह बताकर खाली कराया जा रहा है. दरअसल उसे उनके पूर्वजों ने पशुओं के उपयोग और गांव की निस्तारी के लिए दान में दिया था. अब उसी पुश्तैनी जमीन पर रसूखदार लोगों और भूमाफियाओं की नजर गड़ गई है. प्रशासन ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था और समय पूरा होते ही मकान तोड़ने पहुंच गए.
पहले भी हुआ था कड़ा विरोध, आमसभा की आपत्ति भी की दरकिनार.
यह विवाद कोई नया नहीं है. ग्रामीणों ने बताया कि पिछले साल भी प्रशासन ने सैकड़ों परिवारों को बेदखल करने का नोटिस थमाया था. तब ‘जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी’ के हस्तक्षेप और अमित बघेल की अगुवाई में ग्रामीणों ने एकजुट होकर बड़ा आंदोलन किया था. जिसके दबाव में तब कार्रवाई रोकनी पड़ी थी.
अब एक बार फिर बिना कोई मुआवजा दिए या उनके रहने की व्यवस्था किए गांव खाली कराया जा रहा है. ग्राम पंचायत नकटी की आमसभा ने भी लिखित में आपत्ति दर्ज कराई थी. लेकिन प्रशासन ने उसे नजरअंदाज कर दिया. अगर आज यहां कार्रवाई होती है तो 1300 से ज्यादा आबादी वाला पूरा गांव बुरी तरह प्रभावित होगा. फिलहाल गांव में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं.
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