नहीं रहे उदारीकरण के नायक मनमोहन सिंह, सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित, आज सुबह 11 बजे कैबिनेट की बैठक, राहुल बोले- मैंने गुरु खो दिया
Liberalization hero Manmohan Singh is no more, 7 days of national mourning declared, Cabinet meeting tomorrow at 11 am, Rahul said- I have lost my Guru
देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 92 साल की आयु में दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली. उनके निधन पर कांग्रेस के सीनियर नेताओं ने दुख जताया है. केंद्र सरकार ने पूर्व पीएम के निधन पर सात दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है. आज के सभी सरकारी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं. शुक्रवार सुबह पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक होगी. डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास पर पहुंचीं.
मनमोहन सिंह ने 1962 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के नफील्ड कॉलेज से अर्थशास्त्र में डी फिल की उपाधि ली थी. शिक्षा के प्रति उनका लगाव उन्हें पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अध्यापन की तरफ ले गया. मनमोहन सिंह प्रखर अर्थशास्त्री थे। 1991 में देश में शुरु किए गए आर्थिक उदारीकरण के वे शिल्पकार रहे. 2004 से 2014 तक वे प्रधानमंत्री रहे. उनके निधन से देशभर में शोक की लहर है.
कांग्रेस के नेता सांसद राहुल गांधी ने प्रख्यात अर्थशास्त्री और पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के परिवार से फोन पर बात की और उनके सांत्वना दी. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पूर्व पीएम के निधन पर कहा कि मैंने अपना मार्गदर्शक खो दिया है.
कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने मनमोहन सिंह के निधन पर शोक जताया. उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री रहते हुए तब उन्होंने जो किया. आज उसी की नींव पर हम देश को आगे बढ़ा रहे हैं. इतने मध्यम वर्ग के हितैषी थे. उन्होंने सूचना के अधिकार से लेकर भोजन, स्वास्थ्य का अधिकार देश को दिया.
मनमोहन सिंह के निधन पर खरगे ने कहा, ‘‘मैं एक वरिष्ठ सहकर्मी, एक सौम्य बुद्धिजीवी और एक विनम्र व्यक्ति के निधन पर शोक व्यक्त करता हूं, जिन्होंने भारत की आकांक्षाओं को मूर्त रुप दिया. जो अटूट समर्पण के साथ आगे बढ़े’’ उन्होंने कहा कि मुझे श्रम मंत्री, रेल मंत्री और समाज कल्याण मंत्री के रुप में उनके मंत्रिमंडल का हिस्सा होने पर गर्व है. निश्चित तौर पर इतिहास दयालुता के साथ उनका मूल्यांकन करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने एक दूरदर्शी राजनेता, बेदाग नेता और अद्वितीय अर्थशास्त्री खो दिया है.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा है कि डॉ. मनमोहन सिंह जैसे राजनेता बहुत कम हुए हैं. जिन्हें राजनीति में अत्यधिक सम्मान मिला है. वाड्रा ने कहा कि राजनीति में बहुत कम लोग सरदार मनमोहन सिंह जी जैसा सम्मान पाते हैं. उनकी ईमानदारी हमेशा हमारे लिए प्रेरणास्रोत रहेगी और वे हमेशा उन लोगों के बीच खड़े रहेंगे. जो इस देश से सच्चा प्यार करते हैं. क्योंकि वे अपने विरोधियों द्वारा अनुचित और गहरे व्यक्तिगत हमलों के बावजूद राष्ट्र की सेवा करने की अपनी प्रतिबद्धता में दृढ़ रहे.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर शोक प्रकट किया. राष्ट्रपति ने कहा, डॉ. मनमोहन सिंह उन दुर्लभ राजनेताओं में से एक थे. जिन्होंने शिक्षा और प्रशासन की दुनिया में समान सहजता से काम किया. सार्वजनिक कार्यालयों में अपनी कई भूमिकाओं में, उन्होंने सुधार के लिए अहम योगदान दिया.
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पूर्व पीएम को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कहा कि मनमोहन सिंह ने साहसपूर्वक हमारे देश को एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से बाहर निकाला और विकास और समृद्धि के लिए नए रास्ते खोले.
पीएम नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया. पीएम मोदी ने X पर लिखा, "भारत अपने सबसे प्रतिष्ठित नेताओं में से एक डॉ. मनमोहन सिंह जी के निधन पर शोक मना रहा है. साधारण पृष्ठभूमि से उठकर वे एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री बन गए. उन्होंने वित्त मंत्री सहित विभिन्न सरकारी पदों पर कार्य किया और वर्षों तक हमारी आर्थिक नीति पर अपनी मजबूत छाप छोड़ी. संसद में उनके हस्तक्षेप भी व्यावहारिक थे। हमारे प्रधान मंत्री के रुप में उन्होंने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए व्यापक प्रयास किए.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन पर गहरा शोक जताया है. ममता ने गुरुवार रात डॉ सिंह के निधन पर एक्स पर लिखा, 'हमारे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आकस्मिक निधन से मैं बहुत स्तब्ध और दुखी हूं. मैंने उनके साथ काम किया था और केंद्रीय मंत्रिमंडल में उन्हें बहुत करीब से देखा था. उनकी विद्वता और बुद्धिमत्ता पर कोई सवाल नहीं था और देश में उनके द्वारा शुरु किए गए वित्तीय सुधारों की गहराई को व्यापक रुप से स्वीकार किया जाता है. देश को उनकी बहुत कमी खलेगी और मुझे उनके स्नेह की कमी खलेगी. उनके परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं.
उद्योगपति और अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया. अडानी ने सोशल मीडिया एक्स पर अपने शाेक संदेश में लिखा, “इतिहास 1991 के आर्थिक सुधारों में डॉ. मनमोहन सिंह की महती भूमिका के लिए उन्हें हमेशा सम्मान देगा. उनके सुधारवादी कदमों से भारत को एक नया रुप मिला और देश ने दुनिया के लिए अपने दरवाजे खोले.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर अपनी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए आज कहा कि 1991 का मील का पत्थर बजट पेश कर भारतीय अर्थव्यवस्था को उदार बनाने वाले डॉ सिंह सभी के द्वारा सम्मानित, वे मृदुभाषी और सौम्य थे.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर आज गहरी शोक संवेदना व्यक्त की. अपने शोक संदेश में कहा, “देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह का निधन दुखद है. वे एक कुशल राजनेता एवं अर्थशास्त्री थे.
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ओबामा ने कहा था- जब मनमोहन बोलते हैं तो दुनिया सुनती है, किताब में लिखी थी ये बात..
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी एक बार मनमोहन सिंह की तारीफ करते हुए कहा था कि 'जब मनमोहन सिंह बोलते हैं तो पूरी दुनिया सुनती है.'
ओबामा ने अपनी किताब 'A Promised Land' में भी मनमोहन सिंह की जमकर तारीफ की थी. बराक ओबामा की यह किताब 2020 में आई थी. किताब में ओबामा ने लिखा था कि मनमोहन सिंह भारत की अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण के इंजीनियर रहे हैं. उन्होंने लाखों भारतीयों को गरीबी के दुश्चक्र से बाहर निकाला है. ओबामा ने बताया था कि उनके और मनमोहन सिंह के बीच गर्मजोशी भरे रिश्ते थे.
ओबामा ने लिखा, 'मेरी नजर में मनमोहन सिंह बुद्धिमान, विचार और राजनीतिक रूप से ईमानदार व्यक्ति हैं. भारत के आर्थिक कायाकल्प के चीफ आर्किटेक्ट के रूप में पू्र्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मुझे विकास के प्रतीक के रूप में दिखे: एक छोटे सिख समुदाय का सदस्य, जिसे कई बार सताया भी गया, जो कि इस देश के सबसे बड़े पद तक पहुंचा और वे एक ऐसे विनम्र टेक्नोक्रेट थे जिन्होंने लोगों का विश्वास उनकी भावनाओं को अपील कर नहीं जीता, बल्कि लोगों को उच्च जीवन स्तर देकर वे कामयाब हुए.'
ओबामा ने लिखा, 'उन्होंने बड़ी मेहनत से अर्जित बेईमान न होने की अपनी ख्याति कायम रखी.' पूर्व राष्ट्रपति ओबमा ने अपनी किताब में लिखा कि उनके और मनमोहन सिंह के बीच गर्मजोशी भरे रिश्ते थे. ओबामा कहते हैं कि मनमोहन सिंह विदेश नीति के मामले में काफी सावधान रहते थे और वे भारत की ब्यूरोक्रेसी को दरकिनार कर ज्यादा आगे बढ़ने से परहेज करते थे, क्योंकि भारत की ब्यूरोक्रेसी अमेरिकी मंशा को लेकर ऐतिहासिक रूप से शंकालु रही है.
ओबामा ने लिखा कि जब वे डॉ. मनमोहन सिंह से मिले तो उनको लेकर उनकी धारणा पुष्ट हो गई कि वे असाधारण मेधा के व्यक्ति हैं. ओबामा ने लिखा कि जब वो नई दिल्ली की यात्रा पर आए थे तो डॉ. मनमोहन सिंह ने उनके लिए एक डिनर पार्टी दी थी. इस पार्टी में ओबामा जब मनमोहन सिंह से मिले तो पत्रकारों से दूर डॉ. मनमोहन सिंह देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित नजर आ रहे थे.
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वे सितंबर 1982 से जनवरी 1985 तक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर रहे. जून 1991 से मई 1996 तक पीवी नरसिम्हा रॉव की सरकार में वित्त मंत्री रहे. मार्च 1998 से मई 2004 तक राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे. और फिर मई 2004 से मई 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे. 1991 से लेकर अप्रैल 2024 तक राज्यसभा के सदस्य रहे.
1991 से भारतीय संसद के उच्च सदन (राज्य सभा) के सदस्य रहे. जहां पर वे साल 1998 और 2004 के बीच विपक्ष के नेता की भूमिका में रहे. इसके बाद उन्होंने साल 2004 के लोकसभा चुनावों के बाद पहली बार 22 मई को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और फिर दूसरी बार 22 मई 2009 को दूसरे कार्यकाल के लिए पद की शपथ ली। वह लगातार दस साल तक प्रधानमंत्री रहे.
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री पद पर आने वाले पहले सिख नेता और पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरु के बाद पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा चुने जाने वाले पहले प्रधानमंत्री भी थे. वे एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री थे. उन्हें मनरेगा योजना और आधार लाने का श्रेय दिया जाता है.
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सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी ‘एक्स’ पर लिखा, ‘सत्य और सौम्य व्यक्तित्व के धनी महान अर्थशास्त्री भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी का निधन एक अंतरराष्ट्रीय अपूरणीय क्षति है। भावभीनी श्रद्धांजलि!’
इसके अलावा, बसपा प्रमुख मायावती ने लिखा, ‘देश के पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह का आज रात निधन होने की ख़बर अति-दुखद। भारत की अर्थव्यवस्था सुधार में उनका ख़ास योगदान रहा। वे नेक इंसान थे। उनके परिवार व सभी चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदना।’



