हसदेव में अब पांच लाख पेड़ काटने की तैयारी!, मंजूरी वापस लेने की मांग, आलोक शुक्ला ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
Now preparations to cut five lakh trees in Hasdeo! Demand to withdraw approval, Alok Shukla warned of state-wide agitation
सरगुजा : छत्तीसगढ़ के सरगुजा में स्थित हसदेव जंगल नए सिरे से पांच लाख पेड़ों की कटाई की कथित मंजूरी को लेकर एक बार फिर चर्चा में है. पता चला है कि सरगुजा स्थित हसदेव के केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक में खनन के लिए सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं.
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के नेता आलोक शुक्ला ने कहा कि यह सब छत्तीसगढ़ विधानसभा के सर्व सम्मति से पारित उस प्रस्ताव को दरकिनार कर हो रहा है. जिसमें पिछली कांग्रेस सरकार के समय हसदेव अरण्य के सभी कोल ब्लॉक के आवंटन को निरस्त करने का संकल्प लिया गया था. यही नहीं, भारतीय वन्य जीव संस्थान ने भी हसदेव में खनन पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी.
हाल ही में सरगुजा वनमंडल के वनमंडलाधिकारी का एक पत्र सामने आया है. जिसमें केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक खुली खदान में खनन को मंजूरी दी गई है. प्रमाण पत्र की शक्ल के वनमंडलाधिकारी के दस्तखत से जारी इस लेटर में कहा गया है कि उन्होंने खुद इस क्षेत्र का 26 जून को भौतिक निरीक्षण किया. इसमें लिखा है कि ‘आवेदक द्वारा मांग की गई वन भूमि के गैर वानिकी प्रयोजन कोयला उत्खनन कार्य केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक खुली खदान परियोजना आवेदक संस्थान राजस्थान राज्य विद्युत निगम लिमिटेड जयपुर हेतु वनभूमि व्यपवर्तन प्रस्ताव की मंजूरी की अनुशंसा की जाती है.’
इसका मतलब है कि केते एक्सटेंशन में खनन पर छत्तीसगढ़ सरकार के अधीन काम करने वाले वन विभाग को कोई आपत्ति नहीं है. इससे यहां करीब पांच लाख पेड़ काटने का रास्ता साफ हो गया है. पता चला है कि यह अनुशंसा केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव का हिस्सा है. जिसके तहत 1742 हेक्टेयर घने जंगल को खनन के लिए साफ किया जाना है.
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के नेता आलोक शुक्ला ने फेसबुक पर एक विज्ञप्ति जारी करते हुए राज्य की भाजपा सरकार से इस मंजूरी को तुरंत वापस लेने की मांग की है और इसे लेकर प्रदेश व्यापी आंदोलन का ऐलान किया है. शुक्ला ने याद दिलाया कि स्थानीय लोगों ने पर्यावरण स्वीकृति की जनसुनवाई में भी अपना विरोध दर्ज करवाने के लिए 1623 व्यक्तिगत पत्र जमा किए थे. शुक्ला ने आरोप लगाया कि ‘भाजपा को आदिवासियों के जीवन उनकी आजीविका और संस्कृति के बजाय अदानी की लूट को बरकररार रखने की चिंता है.’
कांग्रेस महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी आज रायपुर में यह मामला उठाया. बघेल ने कहा कि 1760 हेक्टर की कटाई होनी है. कांग्रेस सरकार ने इसका विरोध किया है. लेकिन मोदी सरकार ने राजस्थान और अडानी के नाम अधिग्रहण जारी रखा. बघेल ने आरोप लगाया कि हसदेव में जंगलों की कटाई जब रमन सिंह मुख्यमंत्री थे. तभी शुरु हो गई थी. उन्होंने कहा कि राजस्थान को आवंटित कोल ब्लॉक 15 सालों के लिए आरक्षित है. हमें देखना होगा कि राजस्थान को आवंटित कोल ब्लॉक में कितना हिस्सा राजस्थान का है और कितना अडानी का है.
लेमरु हाथी रिज़र्व इस परियोजना से 3 किलीमीटर की दूरी पर स्थित है. इस बारे में पूर्व कॉंग्रेस सरकार ने 13-08-2020 और 19 जनवरी 2021 को पत्र जारी कर हाथी के संरक्षण और हाथी द्वन्द को रोकने, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता एवं जल उपलब्धता जैसे विषय की गंभीरता को सामने रखते हुए इस परियोजना पर आपत्तियां दर्ज की थी. इन सभी विषयों खास कर के हाथी मानव द्वन्द की छत्तीसगढ़ में गंभीर स्थिति और पर्यावरण संवेदनशीलता के सवालो को दरकिनार करते हुए केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की EAC कमिटी और राज्य में वन मण्डलाधिकारी, सुरगुजा द्वारा केते एक्सटेंशन परियोजना की पर्यावरण एवं वन स्वीकृति के प्रस्ताव की अनुशंसा की गई है. भारतीय वन्यजीव संस्थान ने हसदेव अरण्य की जैव विविधता पर किये गए अध्ययन में भी स्पष्ट रुप से उल्लेख किया है कि “हसदेव एक महत्वपूर्ण वन्यजीव रहवास है और इस में कोई भी खनन बड़े पैमाने पर हाथी मानव द्वन्द की समस्या को इतना बढ़ा देगा कि इसको संभाल पाना राज्य के लिए कठिन हो जाएगा.”
इसके साथ ही इस परियोजना के संबंध में स्थानीय लोगों ने पर्यावरण स्वीकृति की जनसुनवाई में भी अपने विरोध को दर्ज कराने 1623 व्यक्तिगत विरोध पत्र जमा किये. EAC ने लोगों के अपने वनों के विनाश के विरोध में दर्ज कराए गए पत्रों को भी संज्ञान में नहीं लिया और स्वीकृति की एकतरफा अनुशंसा जारी कर दी. वन स्वीकृति की यह अनुशंसा बहुत स्पष्ट रूप से भाजपा और उसकी विष्णुदेव साय सरकार की अदानी के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है.l भाजपा को आदिवासियों के जीवन, उनकी आजीविका और संस्कृति की बजाए अदानी की लूट को बरकरार रखने की चिंता है. राज्य सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार करते हुए इस अनुशंसा को तत्काल वापस नहीं लिया तो इसके ख़िलाफ़ प्रदेश व्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा.
इस स्वीकृति के बाद आलोक शुक्ला, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन और उमेश्वर सिंह आर्मो, संयोजक, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा करते हुए सभी पर्यावरण प्रेमी और प्रदेशवासियों को आंदोलन में शामिल होने अपील की है.
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