विधानसभा में गूंजा वेलकम डिस्टलरी से प्रदूषण, छात्रावास में बच्चों की मौत का मामला, किसान न्याय योजना के भुगतान को लेकर सदन में हंगामा
Pollution from Welcome Distillery echoed in the assembly, the matter of death of children in the hostel, uproar in the House over the payment of Kisan Nyay Yojana
विधानसभा में गूंजा वेलकम डिस्टलरी से प्रदूषण का मामला, कार्रवाई की मांग तेज
रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा में शीतकालीन सत्र के चौथे दिन आज प्रश्नकाल के दौरान वेलकम डिस्टलरी से होने वाले प्रदूषण का मुद्दा छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रमुखता से उठाया गया. इस पर आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि डिस्टलरी के खिलाफ शिकायतों के आधार पर बीते साल में तीन बार जुर्माना लगाया गया है. पहली बार तीन लाख 90 हजार रुपये और दो बार नौ-नौ लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है.
विधायक अटल श्रीवास्तव ने सिर्फ जुर्माना लगाने को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़ी कार्रवाई जरुरी है. उन्होंने कहा, “डिस्टलरी का पूरा क्षेत्र पेसा कानून के अंतर्गत आता है. डिस्टलरी से निकलने वाले अपशिष्ट खेतों में फेंके जा रहे हैं. जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है और क्षेत्र में बदबू की वजह से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं” उन्होंने इस मामले की जांच विधायकों की कमेटी से कराने की मांग की.
मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि भारत सरकार ने वेलकम डिस्टलरी को 10 किलोलीटर रोजाना से बढ़ाकर 60 किलोलीटर रोजाना क्षमता विस्तार की पर्यावरणीय स्वीकृति 2004 में दी थी. इस स्वीकृति के तहत प्रदूषण नियंत्रण के कई मानक तय किए गए थे.
उन्होंने कहा, “डिस्टलरी को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा जल और वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियमों के तहत संचालन की अनुमति 2012 में दी गई थी. इसमें दूषित जल का बायो-मीथेनेशन, सक्रिय स्लज प्रोसेस और बायो-कंपोस्टिंग के जरिए निपटान सुनिश्चित करने, शून्य निस्सारण बनाए रखने और चिमनी से उत्सर्जन को निर्धारित मानकों के अनुरुप रखने जैसी शर्तें शामिल हैं.”
विधायक उमेश पटेल ने निरीक्षण के दौरान संबंधित क्षेत्र के विधायक अटल श्रीवास्तव को भी शामिल करने की मांग की. उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी से समस्याओं की सही तस्वीर सामने आ सकेगी.
मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि समय-समय पर डिस्टलरी का निरीक्षण किया जाता है. नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है. हालांकि इस जवाब से संतुष्ट न होते हुए विपक्षी विधायकों ने प्रदूषण की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की.
वेलकम डिस्टलरी से होने वाले प्रदूषण का मुद्दा विधानसभा में चर्चा का केंद्र बना रहा. जहां सरकार ने जुर्माना और निरीक्षण की जानकारी दी. वहीं विपक्ष ने कड़े कदम उठाने और कमेटी से जांच कराने की मांग की. अब देखना होगा कि सरकार इस दिशा में क्या ठोस कार्रवाई करती है.
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किसान न्याय योजना के भुगतान को लेकर सदन में हंगामा
रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत किसानों को कम भुगतान का मुद्दा गरमा गया. बीजेपी विधायक मोतीलाल साहू ने 2020-21 और 2021-22 में योजना के तहत भुगतान में कमी को लेकर सरकार से सवाल किया. उन्होंने पूछा, “आम तौर पर योजनाओं में राशि बढ़ाई जाती है. लेकिन यहां भुगतान कम क्यों किया गया?”
कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने बताया कि 2020-21 में इस योजना के लिए 5627.89 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे. जबकि 2021-22 में यह राशि घटकर 5552.45 करोड़ रुपये हो गई. उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने किसानों के रकबे में कटौती की थी और मेढ़ का रकबा घटा दिया गया था.
मंत्री नेताम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा “किसानों के हितैषी होने का ढोंग करने वालों ने उनके साथ छल किया है. हमारी सरकार ने साल भर में किसानों को 17 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया है.”
विधायक मोतीलाल साहू ने मंत्री से सीधे सवाल करते हुए पूछा, “योजना में 73 करोड़ 95 लाख रुपये की कटौती क्यों की गई?” इस सवाल पर सदन में हंगामा शुरु हो गया.
कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा, “आपकी सरकार ने वादे के अनुसार किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल कब और कैसे देंगे? आज ही सदन में इसकी घोषणा करें।” उनके इस बयान पर पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई.
इस मुद्दे पर सदन में शोरगुल के बीच विधायकों के बीच तकरार जारी रही. बीजेपी ने जहां सरकार पर किसानों के साथ वादाखिलाफी का आरोप लगाया. वहीं कांग्रेस ने योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता का दावा किया.
राजीव गांधी किसान न्याय योजना में भुगतान की कटौती को लेकर विधानसभा में सियासी गर्मी चरम पर रही. जहां बीजेपी ने इसे किसानों के हितों पर चोट बताया. वहीं कांग्रेस ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया. अब देखना होगा कि सरकार इस मामले पर क्या कदम उठाती है.
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सदन में जोर शोर से उठा छात्रावास में बच्चों की मौत का मामला
रायपुर : प्रश्न काल के दौरान कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने प्रदेश में छात्रावास एवं आश्रम में बच्चों की मौत का मामला उठाया. उन्होंने आदिम जाति कल्याण मंत्री राम विचार नेताम से पूछा कि छत्तीसगढ़ राज्य के अंतर्गत आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत ऐसी कौन-कौन से आश्रम छात्रावास है? जहां गत 12 महीने के भीतर बीमारी से और अन्य कार्यों से बच्चों की मौत हुई और मौत की वजह सहित जानकारी दें.
इन मामलों में विभाग के द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में सवाल का जवाब देते हुए आदिम जाति कल्याण मंत्री राम विचार नेताओं ने कहा कि आश्रम और छात्रावास में बच्चों की मौत हुई यह मामला गंभीर है. उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा शैक्षणिक सत्र 2024-25 में छात्रावास में जरुरी व्यवस्था एऔर पूरी तैयारी सुनिश्चित करने के लिए जारी दिशा निर्देशों के मुताबिक सभी छात्रावास अधीक्षकों को निवासरत विद्यार्थियों से व्यक्तिगत तौर पर संपर्क स्थापित कर उनके स्वास्थ्य संबंधी और अन्य व्यक्तिगत समस्याओं का निराकरण करने के लिए निर्देशित किया है.'
उन्होंने कहा कि छात्रावास में जो बच्चों की मौत हो रही है वह गंभीर मामला है और इसकी जांच कराने के निर्देश दिए हैं. कांग्रेस विधायक चरणदास मंत्र ने कहा कि छात्रावास में बच्चों की मौत हुई यह जांच का विषय है. सवाल का जवाब देते हुए रामविचार नेताम ने कहा कि छात्रावास में जो बच्चों की मौत हुई है. इसकी हम जल्द से जल्द जांच कराएंगे. जांच में जो सही पाया गया उस पर कार्रवाई की जाएगी.
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मुख्यमंत्री साय से पद्मश्री अनुराधा पौडवाल ने की मुलाकात
रायपुर : मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ आगमन पर शॉल और बेल मेटल की नन्दी भेंट कर उनका स्वागत और अभिनंदन किया. मुख्यमंत्री साय और पद्मश्री अनुराधा पौडवाल के बीच छत्तीसगढ़ की लोककला, गीत-संगीत और संस्कृति को लेकर विस्तृत चर्चा हुई. इस मौके पर विधायक और पद्म अनुज शर्मा मौजूद थे.
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IAS सुबोध कुमार सिंह होंगे सीएम साय के प्रमुख सचिव
रायपुर : सुबोध कुमार सिंह, भा.प्र.से. (1997 बैच) को राज्य शासन द्वारा प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री के पद पर नियुक्त किए जाने का आदेश एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला है. इस पद पर वे मुख्यमंत्री के सचिवालय से जुड़े प्रमुख कार्यों और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. IAS सुबोध सिंह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस लौटकर आने पर उन्हें मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव बनाया गया है. 1997 बैच के IAS सुबोध सिंह पांच साल केंद्र में रहने के बाद छत्तीसगढ़ लौटे हैं.
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