छत्तीसगढ़ की 9 स्कूलों की मान्यता रद्द, अब शिक्षाकर्मी भी बन सकेंगे प्राचार्य, हाईकोर्ट ने चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को किया खारिज

Recognition of 9 schools of Chhattisgarh cancelled, now Shikshakarmis can also become principals, High Court dismissed all the petitions challenging it

छत्तीसगढ़ की 9 स्कूलों की मान्यता रद्द, अब शिक्षाकर्मी भी बन सकेंगे प्राचार्य, हाईकोर्ट ने चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को किया खारिज

छत्तीसगढ़ की 9 स्कूलों की मान्यता रद्द

रायपुर : छत्तीसगढ़ में 9 स्कूलों को मान्यता न मिलने से बड़ा झटका लगा है. माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने राज्य के 184 स्कूलों में से सिर्फ 175 को मान्यता प्रदान की है. बाकी 9 स्कूलों के आवेदन को मानक पूरा न करने की वजह से अमान्य घोषित कर दिया गया.
माध्यमिक शिक्षा मंडल ने रायपुर के 3 और प्रदेश के कुल 9 स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी है. मंडल ने इसकी लिस्ट जारी कर दी है. जिसमें बताया है कि मापदंड का पालन नहीं करने वाले स्कूलों को मान्यता नहीं दी है. इनमें दुर्ग और कवर्धा के 2-2, महासमुंद और कोरिया के 1-1 स्कूल के नाम शामिल है. मंडल सचिव पुष्पा साहू ने बताया कि 184 में से 175 स्कूलों को मान्यता दी गई है.
माध्यमिक शिक्षा मंडल की तरफ से जारी मापदंड के मुताबिक स्कूल की भूमि, भवन, संकाय, छात्रों की दर्ज संख्या अनुसार बैठक व्यवस्था होनी चाहिए. इसके अलावा पेयजल व्यवस्था, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल मैदान, प्रसाधन और शैक्षणिक स्टाफ होनी चाहिए. अन्य सुविधाओं में फर्नीचर, विद्युत, वित्तीय व्यवस्था, विद्यार्थियों की सुरक्षा आदि मापदंड होनी चाहिए.
देखें स्कूलों के नाम
इन मापदंड का पालन नहीं करने पर 9 स्कूलों को मान्यता नहीं दी गई. इनमें रायपुर के 3 स्कूल हैं. इनमें ब्लेसिंग उमावि सड्डू, शांति निकेतन पब्लिक उमावि बोरिया कला और वीर छत्रपति शिवाजी प्रोफ़ेसर कॉलोनी, दुर्ग के दीक्षा पब्लिक हाईस्कूल कृष्णा नगर सुपेला, इंडियन पब्लिक स्कूल नंदनी रोड जामुल, कवर्धा के लिटिल फ्लावर हाई स्कूल सैगोना, लक्ष्य पब्लिक स्कूल हाईस्कूल रैतापारा, महासमुंद के आइडियल कॉन्वेंट हाईस्कूल घोड़ारी बिरकोना और कोरिया के कोरिया ज्ञान गंगा हाईस्कूल शिवपुर चरचा है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI

अब शिक्षाकर्मी भी बन सकेंगे प्राचार्य, हाईकोर्ट ने चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को किया खारिज

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ में हाईकोर्ट के अहम फैसले के बाद से अब शिक्षाकर्मी भी प्राचार्य बन सकेंगे. बिलासपुर के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि सरकार ने पदोन्नति के लिए नियम तय करने में शिक्षा विभाग में पहले से कार्यरत लेक्चरर के हितों को ध्यान में रखा है. 65% पदों में से 70% पद ई-संवर्ग के लेक्चरर के लिए आरक्षित किए गए हैं.
चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज
कोर्ट ने शिक्षक भर्ती और प्रमोशन नियम को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज करते कहा कि प्रमोशन संवैधानिक या कानूनी हक नहीं हैं. उल्लेखनीय है कि शिक्षाकर्मियों के संविलियन के बाद शिक्षा विभाग में आए लेक्चरर एलबी के लिए 30% पद आरक्षित किए गए हैं. ऐसे में नियम को असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता है.
राज्य सरकार की तरफ से उप महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कहा कि पंचायत विभाग और स्थानीय निकायों के शिक्षकों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन राज्य सरकार का नीतिगत फैसला है. सभी विभागों के कर्मचारियों के स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन के बाद उनके हितों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग संवर्ग बनाए गए हैं. सभी संवर्गों को पदोन्नति के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं.
इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की तरफ से द्वारिका प्रसाद के मामले में दिए गए फैसले का हवाला भी दिया गया. जिस पर डिवीजन बेंच ने कहा है कि पदोन्नति का अवसर संवैधानिक या कानूनी हक नहीं है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI