छत्तीसगढ़ में करोड़ों का घोटाला -विकास उपाध्याय, लहसुन के बाद जनता को मंहगाई की एक और मार, खाद्य तेल 10% से ज्यादा वृद्धि -शैलेष पाण्डेय
Scam worth crores in Chhattisgarh - Vikas Upadhyay after garlic another hit of inflation to the public increase in edible oil by more than 10 - Shailesh Pandey
छत्तीसगढ़ में करोड़ों का घोटाला -विकास उपाध्याय
रायपुर : छत्तीसगढ़ में एक बाग फिर शिक्षा के शर्मशार करने का मामला सामने आया है. रायपुर जिले के सरियारी स्थित रियल पेपर मिल में लाखों किताबों को कबाड़ में फेंकने का मामला सामने आया है. यह किताबें शिक्षा विभाग द्वारा खरीदी गई थीं. लेकिन इन्हें समय पर वितरित नहीं किया गया और आखिरकार कबाड़ के रुप में बेच दी गई. इस कुप्रबंधन ने बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किया है.
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने इस मुद्दे को उठाया है और आरोप लगाया है कि किताबों की छपाई और बटाई में बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है. उपाध्याय ने सिलियारी में धरना देकर सरकार को चुनौती दी है और मुख्यमंत्री से जवाब की मांग की है. जो शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
मीडिया ने इस भ्रष्टाचार के खुलासे को प्रमुखता से दर्शाया है. जिससे जन जागरुकता बढ़ी है. इस गंभीर मामले में कार्रवाई की मांग तेज हो गई है. सरकार के लिए यह एक बड़ा चुनौती है कि वह इस मुद्दे की गंभीरता को समझे और दोषियों के खिलाफ उचित कदम उठाए.
विकास उपाध्याय ने सिलियरी स्थित रियल पेपर मिल फैक्ट्री कैसे गोदाम के अंदर जाकर किताबों के पन्नों की जांच की तो पाया कि किताबें इसी सत्र की है और अभी भी पूरी तरीके से अच्छी कंडीशन में है. सत्र शुरु हुए अभी कुछ ही महीना हुआ है और किताबें छात्रों को मिल नहीं पाई हैं. किताबें बांटने के पहले उसे कबाड़ में भेज दिया गया है. इन किताबो उपयोग में लाया जा सकता है. लेकिन इन्हें रद्दी बताकर बेचा जा चूका है.
जिससे लाखों-करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान प्रदेश को हुआ है. गांवों के बच्चे आज भी किताबों के लिए तरस रहे हैं. जबकि सरकार की नाक के नीचे ये किताबें बर्बाद हो रही हैं. मुख्यमंत्री खुद शिक्षा विभाग संभाल रहे हैं. उनसे मेरा सीधा सवाल है कि "कबाड़ में फेंकी जा रही इन किताबों का जिम्मेदार कौन है? शिक्षा विभाग और सरकार कब तक इस शर्मनाक स्थिति पर चुप रहेंगे?
विकास उपाध्याय ने कहा कि वह जल्द ही शिक्षा सचिव से मुलाकात करेंगे और इस घोटाले की विस्तृत जांच की मांग करेंगे. उन्होंने मीडिया से अपील की है कि वे इस भ्रष्टाचार को उजागर करें और जनता के सामने इस घोटाले की सच्चाई लाएं. यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है. बल्कि लाखों बच्चों के भविष्य का सवाल है.
विकास उपाध्याय ने इस पूरे मामले को पार्टी स्तर से भी सदन में उठाए जाने की बात कहते हुए बच्चों के भविष्य को कबाड़ में डालने वाली सरकार से श्वेत पत्र जारी कर स्थिति स्पष्ट करने की भी मांग की.
यह किताबें सर्व शिक्षा अभियान और छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा प्रकाशित की गई थी. जो सरकार द्वारा छात्रों को मुफ्त वितरण के लिए खरीदी थी. सरकार ने किताबें खरीदी. लेकिन उन्हें छात्रों तक पहुंचाने के बजाय कबाड़ में बेच दिया.
विकास उपाध्याय स्कूल मामले में बड़े भ्रष्टाचार होने की आशंका व्यक्त करते हुए मामले की जांच की मांग की है. उन्होने इस मामले में गोदाम मालिक से सच्चाई जानने की कोशिश की. लेकिन वह उपलब्ध नहीं हो सके घंटे तक गोदाम में विकास उपाध्याय अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठे रहे. लेकिन कोई जिम्मेदार इस मामले की सुध लेने नहीं आया.
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लहसुन के बाद जनता को मंहगाई की एक और मार, खाद्य तेल 10% से ज्यादा वृद्धि -शैलेष पाण्डेय
बिलासपुर : पूर्व विधायक शैलेष पाण्डेय ने कहा कि देश में त्योहारों का सीजन चल रहा है और देशबमे त्योहार सिर्फ अमीर लोग ही नहीं मानते बल्कि गरीब से गरीब से लेकर हर व्यक्ति, हर परिवार और हर वर्ग मनाता है और हमारे देश में त्योहारों में कई तरह के व्यंजन और पूजा पाठ का भोग लगता है. ऐसे में खाद्य तेलों में तेज़ी आ गई है और सभी खाद्य तेल दस प्रतिशत की वृद्धि में आ गए हैं. यानि जो तेल एक लीटर में 105 रुपये था. वो अब सीधे 120 रुपये हो गया है और टीना 400 रुपये मंहगा हो गया है यानि अब टीना 2100 या 2200 रुपये का हो जाएगा.
आज के जमाने में सभी जरुरी सामान वैसे ही मंहगे हैं. रोजमर्रा की ज़िंदगी अब और मंहगी होती जा रही है. लहसुन ने अभी-अभी खाने को बेस्वाद किया है. क्योंकि वो अभी ज्यादा मंहगा हो गया है. और बाकि किचन पहले से ही मंहगा है.
गृहणियों को घर चलाना मुश्किल हो गया है. महीना बड़ी मुश्किल से बीत रहा है. सब्ज़ियों और फलों के दाम इस बार कम ही नहीं हुए और डीज़ल और पेट्रोल ने पहले से ही आग लगा कर रखी है. जिसके कारण हर वस्तु मंहगा है.
सरकार का GST हर चीज़ के लिए इतना ज्यादा है कि आम ज़रुरतों की चीज़े बढ़ते हुए टैक्स की वजह से और मंहगी हो रही है. और सरकार से कोई राहत नहीं है. बजट में बड़ी बड़ी राहत की बात करने वाली मोदी सरकार जनता को ज्यादा टैक्स की मार दे रही है. देश में वैसे भी अमीर और गरीब के बीच की खाई बढ़ती जा रही है. पहले की तुलना में अरब पति देश में बढ़े हैं. और पहले की तुलना में गरीबी भी बढ़ी है. तो कुल मिलाकर महंगाई की मार से गरीब और मध्यम वर्ग ज्यादा परेशान है. और कुछ बोलो तो बड़े बड़े झूठे सपने दिखाने लगते हैं. कि देश आगे जाकर सबसे बड़ी अर्थ शक्ति बनेगा ये होगा वो होगा ये सब..
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राजीव भवन में पत्रकार वार्ता को किया संबोधित
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राजीव भवन में पत्रकार वार्ता को किया संबोधित करते हुए कहा कि 90 दिनों से गायब थाना सीतापुर के बेलजोरा निवासी दीपेश उर्फ संदीप लकड़ा का शव ग्राम लूरेना बड़वापाट में जल जीवन मिशन का ठेकेदार अभिषेक पांडेय के साइड में बनाये गये पानी टंकी के नीचे दबा मिलता है.
ठेकेदार अभिषेक पांडेय और उनके आदमी दीपेश लकड़ा उर्फ संदीप के घर जाकर उनके पिताजी को धमकाते हैं. और डराते हैं. चुनौती देते हुये कहते हैं कि अपने बेटे को अब ढूंढ लेना. 7 जून 2024 की शाम को अभिषेक पांडेय ठेकेदार और उनके मुंशी प्रत्युष पांडेय और अन्य लोग ग्राम उलकिया से राजमिस्त्री दीपेश उर्फ संदीप लकड़ा के साथ मारपीट कर अपहरण कर लेते हैं.
दीपेश लकड़ा के पत्नी अपने पति के गुमशुदगी शिकायत दर्ज कराते हैं., पुलिस के द्वारा मामला को गंभीरता से नहीं लिया जाता है. समाज के अन्य लोग पीड़ित के साथ प्रदर्शन करते हैं. तब एफआईआर दर्ज किया जाता है. पुलिस के साथ मिलीभगत कर ठेकेदार ने दीपेश के खिलाफ चोरी का मामला दर्ज किया जाता है. इस तरह से पूरे मामले में पुलिस प्रशासन अपराधियों को बचाने के लिये 90 दिनों तक परिजनों को गुमराह करती रही.
यह बहुत ही गंभीर मामला है. फिर से प्रदेश में आदिवासी भाई की जघन्य हत्या हुई है. राजमिस्त्री जो ठेकेदार के अंदर में काम करने वाला है को चोरी के इल्जाम में फंसाकर घर वालों को धमकी दिया जाता है. पुलिस प्रशासन कुछ नहीं करती है. अपहरण किया जाता है. तब भी पुलिस प्रशासन कुछ नहीं करती है. गांव वाले प्रदर्शन करते हैं. उसके बाद चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज होता है. उनका अपहरण कर मार दिया जाता है. मारने के बाद जघन्य अपराध को छुपाने के लिये ठेकेदार द्वारा टंकी का निर्माण किया जा रहा था. उस टंकी के करीब 15 से 20 फीट नीचे उसको गाड़ दिया जाता है और उसके ऊपर टंकी का निर्माण कर दिया जाता है.
3 महिना के बाद भी पुलिस प्रशासन कार्यवाही नहीं करती है. हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद एफआईआर होता है उसके बाद पुलिस प्रशासन संज्ञान में लेती है. और फिर कार्यवाही करती है. ठेकेदार के द्वारा लगातार गुमराह किया गया. पुलिस प्रशासन की मदद से मृत्य व्यक्ति के मोबाइल को अन्य शहरों में ले जाकर ट्रेस कराना और इस शहर में उनका लोकेशन बताना प्रशासन की भूमिका पर सवाल है.
यह भी जानकारी है कि ठेकेदार के अकाउंट से इस तीन महिने के दौरान आनलाईन करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है. मतलब साफ है इस मामले को दबाने के लिये इस मामले को गुमराह करने के लिये इस मामले को लीपा-पोती करने के लिये करोड़ो रुपये का लेनदेन हुआ है. इसकी निष्पक्षता से जांच करनी चाहिये.
आदिवासी समाज लगातार आक्रोशित है। लगातार आंदोलन कर रहे हैं. न्याय की मांग को लेकर. आदिवासी समाज ने मांग किया है मृत परिवार को 2 करोड़ रुपये मुआवजा मिलना चाहिये. साथ ही इस मामले को सरकार को गंभीरता से जांच करनी चाहिये. जो दोषी है उनको कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए. लेकिन सरकार जिस गति से एफआईआर दर्ज करने में लेटलतीफी कर रही है. अपराधियों को बचाने का काम कर रही है. ये प्रदेश के आम नागरिक के लिए सबसे बड़ा चुनौती भरा हुआ है.
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रायपुर : 4 सितंबर शनिवार को शाम 6:30 बजे न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन, रायपुर में भाजपा ने आर्थिक प्रकोष्ठ, व्यापार प्रकोष्ठ, और व्यावसायिक प्रकोष्ठ के तहत व्यापारियों और उद्योगपतियों के लिए एक सदस्यता अभियान का आयोजन किया. इस अभियान में मुख्य अतिथि के रुप में भाजपा प्रदेश प्रभारी नितिन नवीन और प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव भी मौजूद थे.
इस सदस्यता अभियान में मंच पर बैठे नेताओं और कार्यकर्ताओं की तादाद सामने बैठी ओडियन्स से ज्यादा देखी गई. जिससे उपस्थिति की उम्मीदों पर पानी फिर गया. भाजपा के इस अभियान का उद्देश्य व्यापारिक समुदाय और उद्योगपतियों को पार्टी से जोड़ना था. लेकिन कार्यक्रम में अपेक्षाकृत बहुत ही कम लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई.
इस मौके पर कई प्रमुख भाजपा नेता मौजूद थे. लेकिन जनता की उदासीनता और खाली पड़ी कुर्सियों ने यह साफ कर दिया कि भाजपा का यह अभियान आम जनता से कटा हुआ और प्रभावहीन साबित हो रहा है.
मुख्य बिंदु:
1. भाजपा के सदस्यता अभियान में बेहद कम उपस्थिति
2. मंच पर बैठे नेताओं की संख्या ऑडियंस से ज्यादा रही
3. व्यापारिक और उद्योगपति वर्ग के बीच भाजपा की लोकप्रियता में कमी दिखी
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