गरियाबंद में अवैध निर्माण रोकने की मांग को लेकर पीड़ित पक्ष ने कलेक्टर से लगाई इंसाफ की गुहार, प्रशासन की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
The affected party appealed to the Collector for justice, demanding an end to illegal construction in Gariaband, raising questions about the administration's working style.
गरियाबंद : नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-1 में स्थित एक जमीन विवाद का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. भूमि स्वामित्व को लेकर चल रहे विवाद के बीच कथित अवैध निर्माण और प्रशासनिक उदासीनता के आरोपों ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है. पीड़ित पक्ष ने न्यायालयीन आदेश के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने का आरोप लगाते हुए मीडिया के सामने अपनी पीड़ा जाहिर की. और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है.
मिली जानकारी के मुताबिक वार्ड क्रमांक-1 निवासी सुनिधि गुप्ते ने आरोप लगाया कि खसरा क्रमांक 55/1, रकबा 16.40 स्थित जमीन पर तहसीलदार द्वारा उनके पक्ष में आदेश पारित किया जा चुका है. उस पर विरोधी पक्ष द्वारा जबरन कब्जा कर अवैध निर्माण कराया जा रहा है. उन्होंने बताया कि जितेन्द्र उपाध्याय के कहने पर अवध राम साहू द्वारा उक्त जमीन पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है. जबकि नगर पालिका से भवन निर्माण की वैध अनुज्ञा (परमिशन) भी नहीं ली गई है.
पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस बारे में नगर पालिका कार्यालय में लिखित शिकायत भी की गई. लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. बार-बार शिकायत और जवाब के इंतजार के बाद निराश होकर उन्होंने फिर तहसीलदार से इंसाफ की गुहार लगाई. जिसके बाद तहसीलदार ने स्टे जारी करते हुए निर्माण कार्य पर रोक लगाने के निर्देश दिया. इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने से उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
सुनिधि गुप्ते ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि भूमि से संबंधित सभी दस्तावेज उनके और उनकी बहन के पक्ष में हैं. फिर भी खुलेआम निर्माण कराया जाना न्यायालयीन आदेश की अवहेलना मालुम होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना वैध दस्तावेजों के किसी दुसरे की जमीन पर लेंटर स्तर तक निर्माण होना शक पैदा करता है और यह प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है.
उन्होंने कहा कि जब मामला न्यायालयीन प्रक्रिया के अधीन है. तब भी निर्माण जारी रहना कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है. पीड़ित पक्ष ने प्रशासन से मांग किया कि तत्काल अवैध निर्माण पर रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. ताकि भविष्य में किसी अन्य व्यक्ति की जमीन पर जबरन कब्जा या निर्माण जैसी घटनाएं न हों.
इस मामले को लेकर पीड़ित पक्ष अपर कलेक्टर कार्यालय भी पहुंचा और वहां पूरे दस्तावेज पेश कर इंसाफ की गुहार लगाई. उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे कानूनी लड़ाई तेज करेंगे.
इधर नगर पालिका गरियाबंद की मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) संध्या वर्मा ने बताया कि संबंधित जमीन पर हो रहे निर्माण को लेकर पहले भी कार्रवाई की गई थी. निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए ठेकेदार का सामान जब्त किया गया था. जिसके बाद कुछ समय तक काम बंद रहा. हालांकि बाद में दोबारा निर्माण शुरु होने की जानकारी मिलने पर मामले को फिर से संज्ञान में लिया गया है.
सीएमओ ने कहा कि इस बारे में तहसीलदार से चर्चा की गई है. मेला आयोजन की वजह से फौरन कार्रवाई नहीं हो सकी. लेकिन आगामी एक हफ्ते के भीतर अवैध निर्माण के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की जाएगी.
फिलहाल यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायालयीन आदेशों के पालन को लेकर चर्चा में है. अब देखना होगा कि प्रशासन तय समय सीमा में कार्रवाई कर विवादित निर्माण पर रोक लगाता है या नहीं?
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