छुरा की गोल्डन गर्ल की किचन में फंदे से लटकी मिली लाश, गांव में शोक की लहर, मेडल जीतने वाली बेटी की हत्या या आत्महत्या, जांच में जुटी पुलिस
The body of Chhura's golden girl was found hanging from a noose in the kitchen, a wave of mourning in the village, the medal winning daughter was murdered or committed suicide, police is investigating
गरियाबंद/छुरा : गरियाबंद जिला के छुरा की धरती को बार-बार गौरवान्वित करने वाली ‘गोल्डन गर्ल’ संध्या साहू की अचानक मौत की खबर से पूरे नगर में शोक की लहर दौड़ गई है. महज 20 साल की उम्र में छह मेडल जीतने वाली यह होनहार खिलाड़ी मंगलवार सुबह अपने घर के किचन में फंदे से लटकी मिली. इस दौरान संध्या की मां नहाने गई थी. जब संध्या को फंदे पर लटका देखा तो बचाने की कोशिश की मगर तब तक देर हो चुकी थी. पुलिस मामले की जांच में जुटी है.
बताया जा रहा है कि संध्या की मां ने दरवाज़ा तोड़कर उसे बचाने की कोशिश की. लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और संध्या को फंदे से उतारकर फौरन छुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए. जहां डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद से पूरे गांव का माहौल गमगीन है और सभी की आंखें नम हो गई.
घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा. मर्ग कायम कर मामले की जांच की जा रही है. आत्महत्या के कारणों की जांच के लिए फारेंसिक टीम को भी बुलाया गया. टीम ने मौके से कुछ साक्ष्य जब्त किए हैं. पुलिस का कहना है कि संध्या किन कारणों से तनाव में थी या उसने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसका पता लगाया जा रहा है.
संध्या की मौत को लेकर हत्या की आशंका भी जताई जा रही है. घटना की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया गया है. जिसने सबूत इकठ्ठा किए हैं. पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हर पहलू से जांच शुरू कर दी है.
मृतका छुरा नगर के आवासपारा क्षेत्र की रहने वाली थी और वर्तमान में कचना धुरवा महाविद्यालय में ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही थी. उसकी उपलब्धियों को देखते हुए लोग उसे ‘छुरा की गोल्डन गर्ल’ कहकर पुकारते थे. संध्या के पिता एक स्कूल बस चालक हैं. घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. लोगों के मन में सवाल है कि इतनी होनहार छात्रा ने आत्महत्या जैसा कदम क्यों उठाया?
संध्या ने खेलो इंडिया, तमिलनाडु, कोलकाता जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में भाग लेकर गरियाबंद जिले को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी. चार गोल्ड और दो अन्य मेडल उसके संघर्ष और मेहनत की कहानी खुद बयां करते हैं. छुरा के कचना धुरवा कॉलेज में पढ़ाई कर रही संध्या की जिंदगी में बहुत कुछ बाकी था.
परिजनों के मुताबिक संध्या एक अनुशासित, मेहनती और सादा जीवन जीने वाली लड़की थी. सुबह जल्दी उठकर मैदान में अभ्यास और फिर कॉलेज यही उसकी दिनचर्या थी. उसकी एक ही तमन्ना थी छत्तीसगढ़ का नाम और ऊंचा करना.
इतनी होनहार, मेहनती और सम्मानित खिलाड़ी ने ऐसा कदम क्यों उठाया? या फिर वह किसी साजिश की शिकार हुई? यह सवाल अब न सिर्फ परिजनों और खेल जगत को, बल्कि पूरे समाज को मथ रहा है.
छुरा नगर में इस खबर के फैलते ही शोक की लहर दौड़ गई. खेल जगत से जुड़े लोगों और शिक्षकों ने संध्या को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है. जिन लोगों ने संध्या को कभी गर्व से मंच पर पदक लेते देखा था. आज वे उसकी तस्वीरों को देखकर आंसू बहा रहे हैं.
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