युक्तियुक्तकरण की आड़ में सेटअप बदलने की साजिश, पांच कक्षा को पढ़ाने एक शिक्षक और प्रधानपाठक से कैसे आएगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा?

Conspiracy to change the setup under the guise of rationalization how will quality education come from one teacher and head teacher teaching five classes

युक्तियुक्तकरण की आड़ में सेटअप बदलने की साजिश, पांच कक्षा को पढ़ाने एक शिक्षक और प्रधानपाठक से कैसे आएगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा?

छत्तीसगढ़ में शासकीय शिक्षकों के हजारों पद विलोपित कर बेरोजगार युवाओं को रोजगार से वंचित करने की तैयारी!

रायपुर : स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के स्कूलों और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के लिए दिशानिर्देश जारी करते ही बवाल मच गया है. शालेय शिक्षक संघ ने इसे सरकारी स्कूल के बच्चों के साथ पक्षपातपूर्ण फैसला बताते हुए विभाग से पूछा है कि क्या इन बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करने का हक नही है? अगर है तो अधिकारी बतायें कि पांच कक्षा को एक प्रधानपाठक और एक शिक्षक कैसे अध्यापन कार्य कराएंगे? ऊपर से नित नए अनुचित प्रयोगों को नवाचार के नाम पर स्कूल में थोपे जाते हैं. जनगणना, अनेकों सर्वे, मध्यानभोजन, ऑनलाइन/ऑफलाइन जानकारियां मांगने जैसे कई गैर शैक्षणिक कार्यो से वैसे भी पढ़ाई बाधित होती रही है. ऊपर से अब युक्तियुक्तकरण के इस जारी निर्देश में प्राथमिक शालाओं की पांच कक्षा और बालवाड़ी को पढ़ाने के लिए सिर्फ एक शिक्षक और एक प्रधानपाठक के जिम्मे छोड़ा जा रहा है जो कि अव्यवहारिक और अनुचित है.
सभी संगठन को एकजुट कर किया जायेगा प्रखर विरोध, आवश्यकता पड़ने पर कोर्ट जाने से नही होगा गुरेज
छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने युक्तियुक्तकरण के लिए जारी दिशानिर्देश को प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं की शिक्षा को गर्त में ले जाने वाला बताते हुए कड़ा विरोध किया है. युक्तियुक्तकरण की आड़ में सेटअप बदलने की साजिश की जा रही है. युक्तियुक्तकरण सिर्फ शिक्षक विहीन और एक शिक्षकीय शालाओं में शिक्षक उपलब्ध कराने की सीमा तक किया जाना चाहिए. लेकिन इसमे तो प्राथमिक स्कूलों माध्यमिक स्कूलों से शिक्षकों को छीना जा रहा है. पहले प्राथमिक शाला की पांच कक्षा को पढ़ाने एक प्रधानपाठक और 2 शिक्षक का सेटअप था लेकिन अब सिर्फ एक प्रधानपाठक और एक शिक्षक का सेटअप दिया जा रहा है. जो कि पूरी तरह से गलत फैसला है. मुख्यमंत्री जी को इस मुद्दे पर संज्ञान लेकर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए स्कूलों में कक्षा और विषयानुसार पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने का आदेश देना चाहिए.
प्रांतीय महासचिव धर्मेश शर्मा और प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने बताया कि यह युक्तियुक्तकरण की आड़ में सेट अप बदलने की साज़िश है. प्रधान पाठक सहित सिर्फ दो शिक्षकों का न्यूनतम सेट आपत्तिजनक है. शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने वालों के जिम्मेदारी में ही है. युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया सरकारी स्कूल के बच्चों से दोयम व्यवहार और प्रताड़ित हो रहे हैं. शिक्षक सिर्फ शिक्षक विहीन और एक शिक्षकीय शालाओं को शिक्षक उपलब्ध कराने की सीमा तक होना चाहिए. युक्तियुक्तकरण और युक्तियुक्तकरण के पहले हो पदोन्नति:
जहां पदोन्नति नहीं वहां, युक्तियुक्तकरण भी नहीं होना चाहिए. ये पूरा मामला लाया जाएगा सी एम के संज्ञान में क्योंकि अधिकारी उनको कर रहे हैं गुमराह. सभी संगठनों के साथ मिलकर विरोध की बनाई जाएगी रणनीति और इसका पुरजोर विरोध किया जायेगा. वर्तमान निर्देशानुसार युक्तियुक्तकरण नहीं होने दिया जाएगा और जरुरत पड़ने पर अदालत की शरण भी ली जाएगी.
शालेय शिक्षक संघ के प्रांतीय पदाधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी, सुनील सिंह, विष्णु शर्मा, डॉ सांत्वना ठाकुर, सत्येंद्र सिंह, विवेक शर्मा, गजराज सिंह, राजेश शर्मा, शैलेन्द्र सिंह, प्रह्लाद जैन, सन्तोष मिश्रा, सन्तोष शुक्ला, शिवेंद्र चंद्रवंशी, दीपक वेंताल, यादवेंद्र दुबे, सर्वजीत पाठक, मंटू खैरवार, पवन दुबे, भोजराम पटेल, विनय सिंह, आशुतोष सिंह, भानु डहरिया, रवि मिश्रा, जितेंद्र गजेंद्र, अजय वर्मा, कृष्णराज पांडेय, घनश्याम पटेल, बुध्दहेश्वर शर्मा, प्रदीप पांडेय, कैलाश रामटेके, देवव्रत शर्मा, अब्दुल आसिफ खान, अमित सिन्हा, विक्रम राजपूत, द्वारिका भारद्वाज, सुशील शर्मा, विजय बेलचंदन, अशोक देशमुख, तिलक सेन, शालेय शिक्षक संघ सूरजपुर के जिलाध्यक्ष यादवेन्द्र दुबे आदि पदाधिकारियो ने सरकार से उपरोक्त मांगो पर जल्द से जल्द फैसला लेने की मांग की है.
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