मुफ्त शिक्षा का टूटा सपना!, आत्मानंद स्कूलों में अब लगेगी सालाना 1500 रुपए फीस!, कांग्रेस ने जताया जमकर विरोध, बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़

The dream of free education is shattered! Atmanand schools will now charge an annual fee of ₹1,500! Congress protests, claiming children's futures are being compromised.

मुफ्त शिक्षा का टूटा सपना!, आत्मानंद स्कूलों में अब लगेगी सालाना 1500 रुपए फीस!, कांग्रेस ने जताया जमकर विरोध, बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़

रायपुर : छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है. जिस स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना को पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को बेहतर और निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के मकसद से शुरू किया था, अब उसी योजना में फीस वसूली के फैसले पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है. कांग्रेस और छात्र संगठन इसे शिक्षा पर अतिरिक्त बोझ बता रहे हैं, जबकि सरकार इसे नियमों के तहत लिया गया निर्णय बता रही है.
वर्ष 2019-20 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की शुरुआत की थी. इन स्कूलों का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को अंग्रेजी और हिंदी माध्यम में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना था. योजना को प्रदेश भर में व्यापक समर्थन मिला और बड़ी तादाद में अभिभावकों ने अपने बच्चों का प्रवेश इन विद्यालयों में कराया. लेकिन अब शिक्षा सत्र 2026-27 से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर के विद्यार्थियों से कई मदों में शुल्क लेने का आदेश जारी होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है.
आदेश के मुताबिक हाईस्कूल विद्यार्थियों की वार्षिक फीस 410 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दी गई है. जबकि हायर सेकेंडरी विद्यार्थियों की फीस 445 रुपये से बढ़ाकर 550 रुपये कर दी गई है. यह फैसला सरकारी स्कूलों के साथ-साथ स्वामी आत्मानंद स्कूलों और अनुदान प्राप्त विद्यालयों पर भी लागू होगा. शुल्क में गतिविधि निधि, विज्ञान क्लब, रेडक्रॉस, क्रीड़ा, प्रयोगशाला और परीक्षा शुल्क जैसे मद शामिल हैं. प्रदेश के कई जिलों में इस फैसले को लेकर विरोध के स्वर सुनाई देने लगे हैं.
छात्र संगठन NSUI ने सरकार के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जिन विद्यालयों की स्थापना गरीब विद्यार्थियों को निःशुल्क और बेहतर शिक्षा देने के मकसद से की गई थी. वहां फीस वसूली करना योजना की मूल भावना के विपरीत है. संगठन का आरोप है कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.
सरकारी स्कूलों में स्थानीय शुल्क बढ़ाए जाने के विरोध में कांग्रेस ने राजधानी रायपुर स्थित शिक्षा विभाग कार्यालय का घेराव किया. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने जॉइंट डायरेक्टर को ज्ञापन सौंपकर बढ़ाई गई फीस तत्काल वापस लेने की मांग की. इसको लेकर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष श्रीकुमार मेनन ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है. और बेशर्म सरकार फिर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और उनके पालकों पर वार कर रही है.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बढ़ाए गए शुल्क का आदेश वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी. 
हाई स्कूल के विद्यार्थियों को 90 रुपये और हायर सेकेंडरी के विद्यार्थियों को 105 रुपये अतिरिक्त भुगतान करना होगा. बता दें कि प्रदेश में करीब 56 हजार स्कूल संचालित हैं. जिनमें करीब 56 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं. इनमें से 44 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राएं सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं. ऐसे में फीस वृद्धि से बड़ी तादाद में अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ने की संभावना है.
फिलहाल फीस वृद्धि और शुल्क वसूली के मुद्दे ने शिक्षा के साथ-साथ राजनीति को भी गर्मा दिया है. अब देखना होगा कि सरकार इस फैसले पर कायम रहती है या विरोध के बीच कोई नया फैसला सामने आता है.
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