काम बाद में होता रहेगा, भुगतान पहले ले लो, नगर पालिका अध्यक्ष ने किया शिकायत, जांच के बाद तत्कालीन CMO अविनाश देवांगन समेत 3 अधिकारी सस्पेंड
Work could have been done later, but payment was taken upfront; the Municipal Council President lodged a complaint, and following an investigation, three officials—including the then-CMO Avinash Dewangan—were suspended.
खैरागढ़ : नगर पालिका परिषद खैरागढ़ में अधोसंरचना मद के तहत कराए गए विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) अविनाश देवांगन, उप अभियंता मुजफ्फर हुसैन और लेखापाल नीरज सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. तीनों अधिकारियों को निलंबन अवधि के दौरान क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग से संबद्ध किया गया है. विभाग की प्रारंभिक जांच में बिना काम पूरा कराए और आवश्यक अभिलेखीय प्रक्रिया का पालन किए बिना भुगतान किए जाने के प्रथम दृष्टया प्रमाण मिलने पर यह कार्रवाई की गई.
संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास द्वारा जारी आदेश के मुताबिक अधोसंरचना मद से स्वीकृत बरेठपारा क्षेत्र के नाली निर्माण कार्य में माप पुस्तिका (एमबी) में प्रविष्टि दर्ज किए बिना भुगतान किया गया. वहीं सीसी सड़क का निर्माण पूरा होने से पहले ही संबंधित एजेंसी को रकम जारी कर दी गई. प्रारंभिक जांच में इन मामलों में संबंधित अधिकारियों की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाए जाने के बाद विभाग ने निलंबन की कार्रवाई की गई है.
नगर पालिका अध्यक्ष ने की मामले की शिकायत
इस मामले की शुरुआत नगर पालिका अध्यक्ष गिरजा चंद्राकर द्वारा 23 अप्रैल को की गई शिकायत से हुई. शिकायत में बरेठपारा वार्ड में सीसी सड़क का निर्माण कराए बिना ही ठेकेदार को भुगतान किए जाने का आरोप लगाते हुए विभागीय जांच की मांग की गई. शिकायत के बाद विभागीय टीम ने स्थल निरीक्षण कर वार्ड पार्षद उर स्थानीय नागरिकों के बयान दर्ज किए. करीब तीन महीने तक चली जांच के बाद विभाग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है.
बता दे कि जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि अधोसंरचना मद के अंतर्गत नगर के कई वार्डों में सीसी सड़क, नाली, हाईमास्ट लाइट तथा मिनी उद्यान जैसे विकास कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया के जरिए एजेंसियों का चयन किया गया था. इसी कड़ी में वार्ड नम्बर 4 में स्वीकृत सीसी सड़क का निर्माण निर्धारित स्थल के बजाय दुसरे स्थान पर किए जाने और उसके बावजूद भुगतान जारी होने जैसे मामलों की भी जांच में समीक्षा की गई है.
भ्रष्टाचार को लेकर लगातार हो रही कार्रवाई, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल
नगर पालिका परिषद खैरागढ़ में पिछले करीब ढाई साल के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक विवादों के मामलों में लगातार विभागीय कार्रवाई होती रही है. विभिन्न मामलों में अब तक चार से ज्यादा मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (सीएमओ), एक उप अभियंता, एक लेखापाल तथा एक राजस्व निरीक्षक (आरआई) पर निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है.
गौरतलब है कि जिम सामग्री खरीदी, निर्माण कार्यों, दवा खरीदी, दुकान नीलामी और अन्य वित्तीय मामलों को लेकर भी पूर्व में विभागीय जांच और कार्रवाई हो चुकी है. वहीं अब ताजा निलंबन ने एक बार फिर नगर पालिका की वित्तीय व्यवस्था, प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिये हैं.
सूत्रों के मुताबिक अधोसंरचना मद के तहत करोड़ों रुपये की राशि से विभिन्न विकास कार्य स्वीकृत किए गए थे. लेकिन कई कार्यों के निष्पादन और भुगतान प्रक्रिया को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं. स्टेशनरी, सफाई सामग्री, फिटकरी, ई-रिक्शा सहित अन्य खरीदी प्रक्रियाओं को लेकर भी समय-समय पर विवाद उठते रहे हैं. नगर पालिका के कर्मचारियों का मानना है कि लगातार हो रही विभागीय कार्रवाइयों से प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हुई है.
उनका कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता. मामले में अब ताजा कार्रवाई यह संकेत देती है कि स्थानीय निकायों में सार्वजनिक धन के उपयोग, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता तथा भुगतान प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए.
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