सिकासार बांध से छोड़ा गया 7000 क्यूसेक पानी, नदी के टापू में फंसे पुजारी को बाढ़ बचाव दल ने रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला, 94 गांव में ब्लैकआउट

7,000 cusecs of water released from Sikasar Dam; flood rescue team rescues priest stranded on river island; 94 villages blackout

सिकासार बांध से छोड़ा गया 7000 क्यूसेक पानी, नदी के टापू में फंसे पुजारी को बाढ़ बचाव दल ने रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला, 94 गांव में ब्लैकआउट

सिकासार बांध से छोड़ा गया 7000 क्यूसेक पानी

गरियाबंद : कार्यपालन अभियंता जल संसाधन संभाग गरियाबंद के निर्देशानुसार सिकासार बांध से दिनांक 3 अक्टूबर 2025 को 7000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है.
बांध में वर्तमान में जलभराव 196.80 मि.क्यू.मी दर्ज किया गया है. जो बांध की 98.93 प्रतिशत क्षमता है. पानी छोड़े जाने के बाद नदी किनारे बसे गांवों को अलर्ट कर दिया गया है. अनुविभागीय अधिकारी, पैरी शीर्ष कार्य जल संसाधन उपसंभाग क्रमांक-02 सिकासार, जिला गरियाबंद ने तटवर्ती एवं निचले क्षेत्रों के ग्रामीणों से अपील किया कि वे सतर्क रहें तथा किसी तरह की दुर्घटना से बचने के लिए नदी-नालों के किनारे अनावश्यक रुप से न जायें.
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जलस्तर बढ़ने नदी के टापू में फंसे पुजारी को बाढ़ बचाव दल ने रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला

धमतरी : धमतरी जिले के ग्राम नवीन जोरा तराई थाना कुरुद में आज एक बड़ी घटना टल गई. जब मंदिर के पुजारी नदी के बीच बने टापू में फंस गए थे. ग्राम के मंदिर पुजारी  इतवारी राम कश्यप पिता  सीताबी राम कश्यप, उम्र 65 वर्ष, नदी का जलस्तर बढ़ने से अचानक टापू में फंस गए थे.
इस बारे में खबर मिलते ही जिला सेनानी सुश्री शोभा ठाकुर ने तत्परता दिखाते हुए रेस्क्यू टीम को मोटर बोट सहित तत्काल रवाना किया. रेस्क्यू दल ने मौके पर पहुंचकर सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई करते हुए पुजारी को सुरक्षित निकालकर नदी पार कराया. इस दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई और पुजारी को सुरक्षित उसके परिजनों को सौंप दिया गया.
रेस्क्यू अभियान में बाढ़ बचाव दल के जवान कलीराम ध्रुव, अनिल नेताम, टिकेश साहू, नरेंद्र डहरिया, दुष्यंत नेताम एवं चन्द्र कुमार सक्रिय रूप से उपस्थित रहे. जिला प्रशासन ने जवानों के इस साहसिक कार्य की सराहना की है.
इस घटना से यह साफ होता है कि जिला प्रशासन एवं बचाव दल किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं. समय पर की गई कार्यवाही से एक बड़ी जनहानि टल गई.
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कई जिलों में झमाझम बारिश

गरियाबंद : राजधानी रायपुर और आसपास के जिलों में गुरुवार रात से लगातार झमाझम बारिश का दौर जारी है. शुक्रवार सुबह से भी तेज बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और मौसम खुशनुमा बना हुआ है. लगातार हो रही बारिश से जनजीवन पर भी असर पड़ने लगा है.
मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ के कई जिलों में अगले 24 घंटे के लिए भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. रायपुर, महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है. इन जिलों में व्यापक वर्षा के साथ स्थानीय जलभराव और निचले इलाकों में पानी भरने की हालत बन सकती है.
वहीं, बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, बालोद, बेमेतरा, दुर्ग, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर चौकी और राजनांदगांव जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इन क्षेत्रों में बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है. बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सरंगढ़-बिलाईगढ़, मुंगेली और बिलासपुर जिलों में भी बारिश के आसार हैं.
तटीय और आदिवासी इलाकों में तेज हवा चलने और स्थानीय जलभराव की संभावना है. विभाग ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान अनावश्यक रुप से घर से बाहर न निकलें. नदियों और नालों के किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है.
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94 गांव में ब्लैकआउट

गरियाबंद/देवभोग : छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक में गुरुवार रात आए तेज आंधी-तूफान और भारी बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. तूफान की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि 33 केवी विद्युत सप्लाई लाइन के दो बड़े पोल धराशायी हो गए. जिसके चलते देवभोग नगर पंचायत सहित ब्लॉक के 94 गांव में बिजली आपूर्ति ठप हो गई. पूरा इलाका शुक्रवार सुबह से ही अंधेरे में डूब गया. और जनजीवन पर इसका व्यापक असर देखा जा रहा है.
बीती रात करीब 11 बजे के आसपास तेज हवाओं और बारिश की वजह से सप्लाई लाइन के पोल गिर गए. ये पोल ब्लॉक मुख्यालय से जुड़े कई गांव के लिए मुख्य विद्युत आपूर्ति का माध्यम थे. पोल गिरने से न केवल गांवों की रोशनी बुझ गई बल्कि नगर पंचायत देवभोग भी पूर्ण रूप से ब्लैकआउट की स्थिति में आ गया.
लगातार 12 घंटे से ज्यादा समय तक बिजली गुल रहने से ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है. विद्युत चालित नलजल योजनाएं और हैंडपंप मोटरें बंद हो गई हैं. जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए दूर-दूर भटकना पड़ रहा है.
घटना की जानकारी मिलते ही बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई. गिरे हुए पोलों को खड़ा करने और क्षतिग्रस्त तारों को बदलने का कार्य जारी है. विभागीय अधिकारियों ने बताया कि यह 33 केवी की मेन लाइन है. जिसकी मरम्मत तकनीकी रुप से चुनौतीपूर्ण है. बारिश के बीच काम करना भी मुश्किल हो रहा है.
गांवों में लगातार बिजली गुल रहने से जन-जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बिजली विभाग से जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति बहाल करने की मांग की है. उनका कहना है कि बारिश के मौसम में पानी और बिजली दोनों की समस्या एक साथ आने से हालत गंभीर होती जा रही है.
देवभोग क्षेत्र में मानसून के दौरान तेज आंधी-तूफान आम बात है. यहां ऊँचे पेड़ और खुले क्षेत्रों में लगी बिजली सप्लाई लाइनें अक्सर तेज हवाओं में क्षतिग्रस्त हो जाती हैं. पिछले सालों में भी कई बार इसी तरह के हादसे हो चुके हैं. लेकिन स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकला है.
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दशहरा पर आफत की बारिश: अमाड़ नदी में खाट पर बंधी प्रसव पीड़िता का Video वायरल

गरियाबंद : गरियाबंद जिले की सबसे ज्यादा चर्चा इस वक्त अमाड़ नदी के एक वीडियो की हो रही है. जिसमें लोगों को भारी जोखिम उठाकर 24 साल की गर्भवती महिला को खाट पर बांध कर नदी पार कराते देखा गया. लगातार बारिश से मैनपुर तहसील क्षेत्र के ज्यादातर बरसाती नाले और नदियां उफान पर हैं. इसी बीच देवझर अमली गांव की रहने वाली पिंकी नेताम को अचानक प्रसव पीड़ा शुरु हुई. घर वाले उसे फौरन अस्पताल ले जाने की कोशिश में लगे. लेकिन चारों तरफ पानी का सैलाब होने से रास्ते कट गए थे.
उफनती अमाड़ नदी को पार करना। ऐसे में ग्रामीणों ने मिलकर पिंकी को खाट (चारपाई) पर लिटाया और सावधानी बरतते हुए उसे मजबूती से रस्सियों से बांध दिया ताकि पानी के तेज बहाव में गिरने का खतरा न रहे. इसके बाद कई ग्रामीणों ने नदी के तेज प्रवाह में उतरकर खाट को अपने कंधों पर उठाया और धीरे-धीरे नदी पार कराई.
यह दृश्य इतना भावुक और रोमांचक था कि मौके पर मौजूद किसी ने वीडियो बना लिया. जो अब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो बन चुका है. इसे देखने के बाद लोग ग्रामीणों की बहादुरी और जुगाड़ की तारीफ कर रहे हैं. तो वहीं कई लोग सिस्टम की खामियों पर भी सवाल उठा रहे हैं – आखिर 2025 में भी क्यों गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के लिए यह हालात झेलने पड़ रहे हैं.
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