धान न बिकने और टोकन न मिलने से हताश किसान का टूटा हौसला, कीटनाशक पीकर दी जान देने की कोशिश, कांग्रेस सांसद पहुंची अस्पताल

A frustrated farmer, unable to sell his paddy and not receiving a token, attempted suicide by drinking pesticide, and a Congress MP rushed him to the hospital.

धान न बिकने और टोकन न मिलने से हताश किसान का टूटा हौसला, कीटनाशक पीकर दी जान देने की कोशिश, कांग्रेस सांसद पहुंची अस्पताल

कोरबा : कोरबा जिले में एक किसान ने धान बिक्री का टोकन न मिलने से परेशान होकर कीटनाशक का सेवन कर लिया. घटना के बाद उसे नाजुक हालत में जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उसका इलाज जारी है. कांग्रेस कोरबा की कांग्रेस सांसद अस्पताल पहुंची और किसानों की हालत पर नाराजगी जताई.
मिली जानकारी के मुताबिक कोरबी जिला के  ग्राम पुटा, हरदीबाजार निवासी सुमेर सिंह गोड़ उम्र 40 साल ने करीब 3 एकड़ 75 डिसमिल जमीन खरीदी थी और बहुत दिनों से 68 क्विंटल से ज्यादा धान बिक्री के लिए टोकन कटवाने की लगातार कोशिश कर रहा था. लेकिन लगातार टोकन न मिलने और मोबाइल फोन नहीं होने की वजह से उसे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. टोकन को लेकर किसान ने इतना असहाय महसूस किया कि उसने आत्महत्या करने के इरादे से कीटनाशक पी लिया.
किसान सुमेर सिंह का आरोप है कि फड़ प्रभारी द्वारा बार-बार आज-कल कहकर टाल दिया जा रहा था. जिससे वह मानसिक तनाव में आ गया. आर्थिक संकट और प्रशासनिक उदासीनता के चलते किसान ने यह आत्मघाती कदम उठाया.
परिजनों के मुताबिक किसान ने अपनी समस्या को लेकर जनदर्शन कार्यक्रम में भी आवेदन दिया था. लेकिन वहां से भी कोई ठोस समाधान नहीं मिला. लगातार अनदेखी से किसान हताश हो गया.
घटना की खबर मिलते ही कोरबा प्रवास पर रहीं कांग्रेस सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत जिला अस्पताल पहुंचीं. उन्होंने किसान से मुलाकात कर उसका हाल जाना और चिकित्सकों से इलाज की जानकारी ली. सांसद ने प्रशासनिक अधिकारियों से भी पूरे मामले की जानकारी लेकर धान खरीद व्यवस्था में लापरवाही पर नाराजगी जताई.
इस घटना ने जिले में धान खरीद प्रणाली, टोकन वितरण और फड़ प्रभारियों की भूमिका पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. किसानों का कहना है कि अगर समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया. तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं.
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने एक किसान मनबोध गांड़ा धान बेचने के लिए कई दिनों से परेशान था. लेकिन धान बेचने के लिए टोकन नहीं मिल रहा था. इसी बात से परेशान होकर उसने ब्लेड से खुद का गला काट लिया. जिसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया. लेकिन हालत नाजुक होने के बाग उसे रायपुर रेफर कर दिया गया है. जहां उसका इलाज जारी है.
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