नशे में धुत्त सचिव बना पंचायत की बदहाली की वजह, जनपद सीईओ ने दिया दो दिन का अल्टीमेटम, जवाब न देने पर होगी कड़ी कार्रवाई
Drunk secretary became the reason for the bad condition of the Panchayat, District CEO gave a two-day ultimatum, strict action will be taken if no reply is given
कोरबा/पोड़ी/उपरोड़ा : नशे में धुत्त सचिव जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा की नवापारा ग्राम पंचायत में एक लंबे समय से चल रही अराजकता और प्रशासनिक लापरवाही अब आखिरकार उच्च अधिकारियों की नज़र में आ गई है. पंचायत सचिव रामेश्वर राजवाड़े के शराब के नशे में नियमित रूप से पंचायत कार्यालय आने की शिकायतें लंबे समय से ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय थी. अब जब यह मामला समाचार माध्यमों और प्रशासन के संज्ञान में आया तो जनपद सीईओ जयप्रकाश डड़सेना ने तत्काल प्रभाव से सचिव को नोटिस जारी कर दो दिन के भीतर सफाईण पेश करने का आदेश दिया है.
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, पंचायत में ठप हैं विकास कार्य
नवापारा के ग्रामीणों में सचिव के प्रति भारी नाराजगी है. उनका कहना है कि सचिव हर दिन शराब पीकर कार्यालय आता है. जिससे पंचायत के कामकाज पूरी तरह से प्रभावित हो गए हैं. लोगों को अपनी समस्याएं लेकर सचिव से मिलना तक मुश्किल हो गया है. उनका व्यवहार अभद्र होता है. और वह फाइलों को देखने या किसी भी विकास कार्य में दिलचस्पी नहीं लेता.
स्थानीय ग्रामीण महिला समूहों ने भी इस पर नाराजगी जताई है और बताया कि कई बार महिलाएं योजना संबंधित कागजातों को लेकर कार्यालय पहुंचती हैं. लेकिन सचिव के नशे में धुत्त होने की वजह से उन्हें या तो खाली हाथ लौटना पड़ता है या अभद्रता सहनी पड़ती है. पंचायत भवन अब एक प्रशासनिक केंद्र कम और नशे के अड्डे जैसा ज्यादा नजर आता है.
पंचायती योजनाओं की उड़ रही धज्जियां
मिली जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कई हितग्राहियों की फाइलें सचिव के कारण अटकी हुई हैं. उन्हें न तो आवास स्वीकृति मिली है और न ही भुगतान की प्रक्रिया में कोई प्रगति हुई है. स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा और वृद्धावस्था पेंशन जैसी योजनाएं भी सचिव की लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी हैं.
जनपद सीईओ द्वारा जारी नोटिस में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि सचिव का यह आचरण शासकीय कार्यों में लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (आचरण) नियम, 1998 का स्पष्ट उल्लंघन है, जो कि ‘कदाचरण’ की श्रेणी में आता है.
जनपद सीईओ ने दिखाया सख्त रुख
सीईओ जयप्रकाश डड़सेना द्वारा जारी नोटिस में लिखा गया है कि सचिव रामेश्वर राजवाड़े को पूर्व में योजनाओं में प्रगति लाने के निर्देश दिए गए थे. लेकिन उसके बावजूद उनके आचरण में कोई सुधार नहीं हुआ है. इसके उलट, सचिव का रवैया और ज्यादा लापरवाह और अनुशासनहीन हो गया.
सीईओ ने सचिव को दो दिन के भीतर सफाई पेश करने का निर्देश दिया है और यह चेतावनी दी है कि अगर सचिव संतोषजनक उत्तर देने में विफल रहते हैं. तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी.
प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद उम्मीद की किरण
इस कार्रवाई के बाद नवापारा के ग्रामीणों को राहत की उम्मीद जगी है. ग्रामीणों का कहना है कि यह पहला मौका है. जब किसी उच्चाधिकारी ने सचिव की लापरवाही को गंभीरता से लिया है. लोगों ने जनपद सीईओ के इस कदम का स्वागत किया है और अपेक्षा जताई है कि सचिव को हटाकर पंचायत में एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी की नियुक्ति की जाए ताकि ग्राम का समुचित विकास हो सके.
क्या सचिव देंगे संतोषजनक जवाब?
अब सबकी निगाहें सचिव रामेश्वर राजवाड़े पर टिकी हैं क्या वह अपने आचरण का औचित्य सिद्ध कर पाएंगे? या प्रशासन को मजबूरन उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करनी पड़ेगी?
इस पूरे मामले ने पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों की जवाबदेही और अनुशासन पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं. यह मामला एक चेतावनी है कि अगर पंचायत स्तर पर कार्यरत अधिकारी लापरवाह, नशेड़ी या भ्रष्ट होंगे. तो उसका सीधा असर ग्रामीण विकास योजनाओं पर पड़ेगा. जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा.
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