जानलेवा हमला केस में नौ माह तक जेल की हवा खाता रहा प्रधान पाठक, विभाग को भनक नहीं, अब 5 साल की सजा पाने वाला हेडमास्टर विजय बर्खास्त

Headmaster Vijay, who spent nine months in jail in connection with a case of life-threatening assault—a fact that remained unknown to the department—has now been dismissed following his five-year prison sentence.

जानलेवा हमला केस में नौ माह तक जेल की हवा खाता रहा प्रधान पाठक, विभाग को भनक नहीं, अब 5 साल की सजा पाने वाला हेडमास्टर विजय बर्खास्त

सरगुजा : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराध में दोषी ठहराए गए एक सरकारी प्रधान पाठक के खिलाफ शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. कलेक्टर अजीत वसंत की नाराजगी और विभागीय कार्रवाई में देरी का मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने शासकीय प्राथमिक शाला पेण्डरखी में पदस्थ प्रधान पाठक विजय कुमार यादव को अब सरकारी सेवा से बर्खास्त किया है.
अदालत ने शिक्षक को जानलेवा हमला और हत्या के प्रयास के मामले में पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी. इसके बावजूद करीब नौ महीने तक शिक्षा विभाग की तरफ़ से अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठे थे. मामले में तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक रिसोर्स सेंटर समन्वयक को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया.
कलेक्टर से शिकायत के बाद हरकत में आया शिक्षा विभाग
मिली जानकारी के मुताबिक सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने प्रधान पाठक विजय कुमार यादव के खिलाफ अदालत से दोषसिद्धि होने के बावजूद समय पर विभागीय कार्रवाई नहीं किए जाने की शिकायत कलेक्टर अजीत वसंत से की थी.  शिकायत में न्यायालयीन दस्तावेज पेश कर आरोप लगाया गया कि संबंधित कर्मचारी के जेल में रहने के बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा आवश्यक कार्रवाई में देरी की गई. जिसके बाद कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी से जवाब तलब किया. इसके बाद संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया तेज की गई.
जानलेवा हमले में मिली थी पांच साल की सजा
विजय कुमार यादव उदयपुर विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला पेण्डरखी में प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत थे. उनके खिलाफ मणीपुर थाने में दर्ज आपराधिक मामले की सुनवाई अंबिकापुर के पंचम अपर सत्र न्यायालय में हुई थी. 3 जनवरी 2026 को अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 148, 323/149 और 307/149 के तहत दोषी ठहराया था. मामले में घातक हथियार से हमला करने और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराध शामिल थे. अदालत ने अधिकतम पांच वर्ष के सश्रम कारावास के साथ अर्थदंड की सजा सुनाई थी.
3 जनवरी से 9 अक्टूबर तक जेल में रहे प्रधान पाठक
अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद विजय कुमार यादव को केंद्रीय जेल अंबिकापुर में निरुद्ध किया गया था. वे 3 जनवरी 2026 से 9 अक्टूबर 2026 तक जेल में रहे. इसके बाद उन्होंने सजा के खिलाफ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अपील की. हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर 2026 के आदेश में उनकी मूल कारावास की सजा अपील के निराकरण तक स्थगित कर जमानत का लाभ दिया था. हालांकि हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई थी. इसका मतलब है कि कारावास की सजा स्थगित होने के बावजूद निचली अदालत द्वारा दी गई दोषसिद्धि प्रभावी बनी हुई है.
नौ महीने की देरी पर दो अधिकारियों को नोटिस
शिक्षा विभाग ने 22 अक्टूबर 2026 को प्रधान पाठक विजय कुमार यादव को सस्पेंड किया था। इसके बाद दोषसिद्धि और संबंधित सेवा नियमों का परीक्षण करते हुए उन्हें सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया. विभागीय कार्रवाई में करीब नौ महीने की देरी को लेकर कलेक्टर अजीत वसंत ने उदयपुर के तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक रिसोर्स सेंटर समन्वयक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. दोनों अधिकारियों से जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी.
सिविल सेवा नियमों के तहत की गई बर्खास्तगी
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि प्रधान पाठक का दोषसिद्ध आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 के खिलाफ है. आदेश में शिक्षकीय पद की मर्यादा, विद्यार्थियों के हित और लोक विश्वास को ध्यान में रखते हुए संबंधित आचरण को गंभीर कदाचरण माना गया है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2) के द्वितीय परंतुक (क) और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम 19(1) के तहत आपराधिक दोषसिद्धि के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है. इसी आधार पर सक्षम प्राधिकारी ने विजय कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से अलग करने का आदेश जारी किया है.
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