छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था में बाधा डाल रहे डॉक्टर को कलेक्टर ने किया जिला बदर, आदेश जारी, छह जिलों की सीमा से किया गया बाहर
In Chhattisgarh, the district collector has banished a doctor who was disrupting law and order, and has issued an order banning him from the boundaries of six districts.
दुर्ग : दुर्ग जिला प्रशासन और पुलिस ने कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले एक कुख्यात बदमाश पर बड़ी कार्रवाई की है. नंदिनी नगर क्षेत्र में क्लीनिक की आड़ में दबंगई और मारपीट कर दहशत फैलाने वाले डॉ. दुष्यंत खोसला को एक साल के लिए जिला बदर किया गया है. दुर्ग जिलाधीश ने पुलिस के प्रतिवेदन पर यह आदेश जारी किया. यह मामला भिलाई के नंदिनी नगर थाना क्षेत्र का है.
मिली जानकारी के मुताबिक डॉ. दुष्यंत खोसला नंदिनी नगर थाना क्षेत्र के अहिवारा में एक क्लीनिक चला रहा था. हालांकि वह इलाज के बजाय अपनी दबंगई और आपराधिक गतिविधियों के लिए जाना जाता था. स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि वह लोगों को बेवजह डराता-धमकाता था. मारपीट करता था और अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर इलाके में डर का माहौल बनाता था.
डॉ. दुष्यंत खोसला के खिलाफ नंदिनी नगर थाने में मारपीट, धमकी और उपद्रव से संबंधित कुल 5 आपराधिक मामले दर्ज हैं. लगातार शिकायतों के बाद पुलिस ने उसे "गुंडा बदमाश" की लिस्ट में शामिल किया था. पुलिस का मकसद उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखना और उसे सुधार का मौका देना था.
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक चेतावनी और निगरानी के बावजूद डॉ. खोसला समाज विरोधी गतिविधियों में लगातार शामिल रहा. लोगों में डर फैलाने की उसकी हरकतें जारी रहीं. हालात की गंभीरता को देखते हुए, दुर्ग पुलिस ने उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई का फैसला लिया और जिलाधीश दुर्ग को जिला बदर की अनुशंसा करते हुए एक विस्तृत प्रतिवेदन भेजा.
दुर्ग जिलाधीश ने 8 जनवरी को छत्तीसगढ़ सुरक्षा अधिनियम की संबंधित धारा के तहत आदेश पारित किया. आदेश के मुताबिक डॉ. दुष्यंत खोसला को दुर्ग जिले के साथ-साथ राजनांदगांव, रायपुर, धमतरी, बालोद और कबीरधाम जिलों की सीमाओं से एक साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है. इस अवधि के दौरान वे इन जिलों में प्रवेश नहीं कर सकेंगे. अगर आदेश का उल्लंघन किया गया तो उनके खिलाफ और भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है. क्योंकि छत्तीसगढ़ में यह पहला मौका है. जब किसी डॉक्टर को आपराधिक गतिविधियों के आधार पर जिला बदर किया गया है. आमतौर पर चिकित्सकों को समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त होता है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति अपने पेशे की गरिमा का दुरुपयोग कर कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बनता है. तो उसके खिलाफ भी समान रुप से कठोर कार्रवाई की जाएगी. यह संदेश इस फैसले के जरिए दिया गया है.
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