जर्जर कच्चा मकान ढहने से मासूम पोते की मौत, दादी की हालत नाजुक, परिवार ने उठाए आवास योजना पर सवाल, ग्रामीणों में आक्रोश

Innocent grandson dies due to collapse of dilapidated kutcha house, grandmother's condition critical, family raises questions on housing scheme, villagers angry

जर्जर कच्चा मकान ढहने से मासूम पोते की मौत, दादी की हालत नाजुक, परिवार ने उठाए आवास योजना पर सवाल, ग्रामीणों में आक्रोश

बस्तर : छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के नानगुर थाना क्षेत्र के अलनार गांव में बीती रात दर्दनाक हादसा हो गया. कच्ची दीवार ढहने से जमीन पर सो रहे 14 साल के छात्र की मौत हो गई. जबकि उसकी दादी गंभीर रुप से घायल हो गईं. परिजनों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत कई बार आवेदन देने के बावजूद उन्हें अब तक पक्का मकान नहीं मिला. जिसकी वजह से यह हादसा हुआ.
मिली जानकारी के मुताबिक अलनार गांव निवासी 14 साल के लोकेश नाग (पुत्र लोकनाथ नाग, माता सोनादई) अपने आंगन में जमीन पर सो रहा था. अचानक देर रात करीब 2:30 बजे मकान की कच्चा दीवार भरभराकर गिर पड़ी और वह मलबे के नीचे दब गया. परिजनों ने किसी तरह उसे बाहर निकाला. लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. लोकेश कक्षा 8वीं का छात्र था और पढ़ाई में भी अच्छा माना जाता था. उसकी अचानक मौत से परिवार और पूरे गांव में शोक की लहर है.
हादसे में मृतक के साथ पास ही सो रही उसकी दादी चंपा नाग उम्र 62 साल भी घायल हो गई. उन्हें कमर पर गंभीर चोटें आईं और फिलहाल उनका इलाज चल रहा है. ग्रामीणों ने नानगुर थाने को खबर दी. जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नानगुर के शवपोस्टमार्टम के लिए भेजा.
परिवार का आरोप है कि समय पर पोस्टमार्टम नहीं होने से दाह संस्कार में देर हुई. मृतक के परिजनों का कहना है कि वे शव को लेकर अस्पताल पहुंचे. लेकिन घंटों डॉक्टर का इंतजार करना पड़ा. समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं होने से उनकी पीड़ा और बढ़ गई.
घायल दादी चंपा नाग ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने कई बार पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान पाने के लिए आवेदन दिया था. लेकिन हर बार आश्वासन मिला. सुनवाई नहीं हुई. उनका कहना है कि अगर घर पक्का होता तो यह हादसा टल सकता था. और उनके पोते की जान बच जाती.
घटना से ग्रामीणों में भी नाराजगी है.
उनका कहना है कि कई गरीब परिवार अब भी कच्चे और जर्जर मकानों में रह रहे हैं. बारिश के दिनों में दीवारें और छतें कमजोर हो जाती हैं. जिससे हादसे का खतरा बढ़ जाता है. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मदद और पक्के आवास की मांग की है.
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