खाद्यान्न वितरण में गड़बड़ी का मामला उजागर, ग्रामीणों ने 35 किलो के स्थान पर कई हितग्राहियों को सिर्फ 20 किलो राशन देने का लगाया आरोप, जांच की मांग

Irregularities in food grain distribution have come to light; villagers have alleged that several beneficiaries received only 20 kg of rations instead of the allotted 35 kg and have demanded an inquiry.

खाद्यान्न वितरण में गड़बड़ी का मामला उजागर, ग्रामीणों ने 35 किलो के स्थान पर कई हितग्राहियों को सिर्फ 20 किलो राशन देने का लगाया आरोप, जांच की मांग

रायपुर/तिल्दा नेवरा : रायपुर जिला के ग्राम पंचायत भुरसुदा में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत खाद्यान्न वितरण में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है. ग्रामीणों का आरोप है कि शासन द्वारा निर्धारित 35 किलोग्राम खाद्यान्न दिए जाने के बजाय कई हितग्राहियों को सात महीनों तक सिर्फ 20 किलोग्राम ही राशन वितरित किया गया. इस मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है.
ग्रामीणों का कहना है कि राशन लेने पहुंचे कई हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा से काफी कम खाद्यान्न दिया गया. जब उन्होंने इसका कारण पूछा तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला. इसके बाद ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग उठाई.
मामले में सरपंच पुत्र सतीश वर्मा संदिग्ध
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खाद्यान्न वितरण में हुई इस कथित गड़बड़ी के पीछे सरपंच के पुत्र की भूमिका है. उनका कहना है कि वितरण प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई, जिससे पात्र हितग्राहियों को उनका पूरा अधिकार नहीं मिल सका.
उप सरपंच राजेश नायक का आरोप
इस बारे में ग्राम पंचायत के उप सरपंच ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि पूरी अनियमितता सरपंच के बेटे द्वारा की गई है. उप सरपंच के मुताबिक सरपंच के बेटे के नाम से राशन वितरण के लिए आईडी बनवाई गई थी और उसी आईडी के जरिए करीब सात महीनों तक राशन का वितरण किया गया. उनका आरोप है कि इस अवधि में लगातार गड़बड़ियां हुईं. कई पात्र हितग्राहियों को पूरा राशन नहीं मिला और कुछ लोगों को राशन से वंचित भी होना पड़ा. उप सरपंच ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
सरपंच सरोज वर्मा एवं उसके बेटे का पक्ष
सरपंच और उनके बेटे ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि करीब 15 से 20 हितग्राहियों को पिछले सात महीनों से 35 किलोग्राम के स्थान पर सिर्फ 20 किलोग्राम राशन मिला है. उनका कहना है कि मामले की जांच की जा रही है. अगर जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होती है. तो जरूरत पड़ने पर वे अपने स्तर से प्रभावित हितग्राहियों को राशन उपलब्ध कराएंगे. या शासन से अतिरिक्त चावल उपलब्ध कराने की मांग करेंगे. ताकि किसी पात्र हितग्राही का नुकसान न हो.
खाद्य विभाग के अधिकारी का पक्ष
इस बारे में मिडिया ने खाद्य विभाग की अधिकारी से भी दूरभाष पर संपर्क किया. उन्होंने बताया कि पहले पूरे मामले की जांच की जाएगी. जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे. उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा.
ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए संचालित की जाती है. ऐसे में अगर खाद्यान्न वितरण में किसी तरह की अनियमितता हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और जिन हितग्राहियों को कम राशन मिला है. उन्हें उनका पूरा खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाना चाहिए.
फिलहाल मामला जांच के दायरे में है. अब सभी की निगाहें खाद्य विभाग की जांच रिपोर्ट और प्रशासन द्वारा की जाने वाली आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.
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