आयुष्मान कार्ड से नहीं हो रहा मरीजों का इलाज. 10 प्राईवेट अस्पतालों में CMHO ने दी दबिश, एम्स रायपुर में मरीज को दी गई डेढ़ साल की वेटिंग
Patients are not being treated using Ayushman Card. CMHO raided 10 private hospitals, patients were made to wait for one and a half years in AIIMS Raipur
आयुष्मान कार्ड से नहीं हो रहा मरीजों का इलाज. 10 प्राईवेट अस्पतालों में CMHO ने दी दबिश
राजनांदगांव : मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन के नेतृत्व में जिला टीम ने 10 निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया. ये सभी अस्पताल आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के तहत पंजीकृत हैं. निरीक्षण के दौरान टीम ने अस्पतालों को आयुष्मान कार्ड से मरीजों का इलाज करने के निर्देश दिए. साथ ही सरकारी मानदंडों का पालन न करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी.
टीम ने अस्पतालों को चिकित्सकों और स्टाफ का आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में पंजीयन करने को कहा है. मरीजों के परिजनों का आयुष्मान कार्ड और वरिष्ठ नागरिकों का आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाने के भी निर्देश दिए गए.
जिले में कुल 28 निजी अस्पताल इन योजनाओं के तहत पंजीकृत हैं. निरीक्षण टीम में औषधी निरीक्षक नवीन कुमार बघेल, विष्णु प्रसाद साहू, जिला परियोजना समन्वयक ऐश्वर्य साव और स्वास्थ्य मितान पवन यादव शामिल थे. बता दें कि पूर्व में भी CMHO द्वारा निजी अस्पतालों की जांच की गई थी. लेकिन उसकी रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है. मरीजों को महंगी दवाइयां लिखे जाने की शिकायतें भी मिल रही हैं. इस मामले में सीएमएचओ का कहना है कि जांच की जानकारी सिर्फ कलेक्टर को दी जाती है.
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एम्स रायपुर में मरीज को दी गई डेढ़ साल की वेटिंग
रायपुर : छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी के संयोजक डॉ कुलदीप सोलंकी ने एम्स रायपुर में हार्निया की सर्जरी के लिए डेढ़ साल की वेटिंग को बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण और असंवेदनशील बताया. रायपुर एम्स में हर साल करोड़ों रुपए का बजट है. सैकड़ो स्पेशलिस्ट हैं. लेकिन उसके बाद भी वहां डेढ़ साल की वेटिंग दी जाती है. जबकि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित साधारण PHC में भी हर्निया के ऑपरेशन मे एक हफ्ते से ज्यादा का वेटिंग नहीं होता है.
अमेरिका और यूरोप के सरकारी अस्पतालों में भी हर्निया ऑपरेशन की वेटिंग 4 से 5 महीने से ज्यादा नहीं होती है. रायपुर एम्स की ऐसी कार्यप्रणाली बहद चिंताजनक है. डॉ. सोलंकी ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की जनता को एम्स रायपुर से बहुत ज्यादा उम्मीदें हैं लेकिन उन्हें समय पर ना तो बेड मिलता है और सर्जरी एवं सीटी स्कैन/एन्डोस्कोपी जैसी जांचों के लिए के लिए गैर जरुरी वेटिंग का रोजाना सामना करना पड़ता है.
छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने एम्स रायपुर प्रशासन से आग्रह किया है कि वह गैर जरुरी वेटिंग को फौरन सुचारु करें. वरना इस मुद्दे को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं प्रधानमंत्री के संज्ञान में लायेंगे और उन्हें मिलकर ज्ञापन सौंपेंगे.
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