यूथ हब के लिए आज से सत्याग्रह, प्रदेश में प्रशासनिक और राजनैतिक अराजकता चरम पर -सुशील आनंद शुक्ला, विधायक पति लगाया झूठा आरोप -कांग्रेस

Satyagraha for Youth Hub from today administrative and political chaos is at its peak in the state Sushil Anand Shukla MLA husband made false allegations Congress

यूथ हब के लिए आज से सत्याग्रह, प्रदेश में प्रशासनिक और राजनैतिक अराजकता चरम पर -सुशील आनंद शुक्ला, विधायक पति लगाया झूठा आरोप -कांग्रेस

राजनीतिक हठधर्मिता के चलते विकास का विरोध, विनाश का समर्थन बंद करो- विकास उपाध्याय

रायपुर : पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि भाजपा जिसे अपना आदर्श मानती है उस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच स्मार्ट सिटी की परिकल्पना के तहत बने यूथ हब का भाजपा के विधायक विरोध कर रहे हैं. यूथ हब का राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते उजाड़े जाने की तैयारी है. विश्वविद्यालय आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए सुंदर स्वच्छ और एक बेहतरीन एजुकेशन हब को रायपुर पश्चिम के विधायक सिर्फ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और अपनी हठ धार्मिता के कारण उजाड़ना चाहते हैं. क्या इस यूथ हब को उजाड़ा जाना जरुरी है? क्या इस यूथ हब को उजाड़ना सरकारी पैसों की बर्बादी नहीं है? इन सब मुद्दों को लेकर सरस्वती नगर थाने के सामने चरणबद्ध आंदोलन की आज दोपहर 12 बजे से शुरुआत होगी.
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प्रदेश में प्रशासनिक और राजनैतिक अराजकता चरम पर -सुशील आनंद शुक्ल

रायपुर : प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा समर्थित एक व्यापारी द्वारा जीएसटी की महिला अधिकारी को धमकाने और उसके बाद व्यापारी के यहां जीएसटी की छापेमारी राज्य में चल रही भर्राशाही का नमूना है.
उन्होंने कहा कि व्यापारी, महिला अधिकारी को अपनी अपनी पहुंच का धौंस दिखाता है और जब उसकी बातचीत का ऑडियो वायरल हो जाता है तो अपनी इज्जत बचाने सरकार व्यापारी के यहां कार्यवाही करवाती है. प्रदेश में राजनैतिक और प्रशासनिक अराजकता चरम पर है.
उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में भाजपा सरकार व्यापारियों को प्रताड़ित कर रही है. 11 महिने में लगातार व्यापारियों के यहां सरकार ने जीएसटी के छापेमारी कराया. पहले सरकार उनको परेशान करने ईवे बिल में छूट को खत्म करने का फैसला ले लिया था. अब व्यापारियों की दस्तावेजों की जांच कर रही है. पंजीयन के समय सभी दस्तावेज जांच कर पंजीयन कराया गया था. फिर नया पंजीयन क्यों?
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जीएसटी दस्तावेज की जांच के नाम पर भाजपा सरकार व्यापारियों का भयादोहन कर रही है. 1.50 करोड़ से ज्यादा से टर्न ओवर वाले व्यापारियों के दस्तावेजों की जांच भाजपा सरकार का व्यापारी विरोधी रवैया है.
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार व्यापारियों को टैक्स चोर समझ रही है. जब से राज्य में भाजपा की सरकार बनी है .जीएसटी के नाम पर व्यापारियों को परेशान कर रही है. यह सरकार का व्यापारियों पर अत्याचार है. भाजपा सरकार उद्योग व्यापार को चौपट करने वाला फैसले ले रही है. जिन व्यापारियों उद्योगपतियों के दिये जाने वाले टैक्स के पैसे से सरकार विकास और राहत के काम करती है. उन्हीं व्यापारियों को परेशान किया जाना गलत है?
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा की सरकार लगातार व्यापारी विरोधी फैसले ले रही है. जमीनों के फ्री-होल्ड को बंद कर दिया. गाईड लाईन की दरों में 30 प्रतिशत छूट को खत्म कर दिया. जीएसटी की जांच के नाम पर छापेमारी कर व्यापारियों को परेशान करना शुरु किया गया. उद्योगों की बिजली के दाम में बढ़ोतरी कर दिया गया. सरकार में बैठे हुए लोग व्यापारियों से अनैतिक वसूली के लिये दबाव बनाते हैं. यह सरकार व्यापारी विरोधी सरकार है.
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विधायक पति लगाया झूठा आरोप

सारंगढ़ : जिला कांग्रेस कमेटी के द्वारा कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता आहुत की गई. प्रेस वार्ता में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अरुण मालाकार, वरिष्ठ विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सूर्यकुमार तिवारी, पूर्व गौ सेवा आयोग के सदस्य पुरुषोत्तम साहू, विधायक प्रतिनिधि अजय बंजारे, प्रमोद मिश्रा, राज कमल अग्रवाल, अशोक अग्रवाल पार्षद, सरिता गोपाल, बबलू बहिदार, चारु शर्मा के साथ ही साथ वरिष्ठ कांग्रेसी मौजूद थे । इस दौरान प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पच्चीस से ज्यादा पत्रकार साथी मौजूद रहे.
प्रेस को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अरुण मालाकार ने बताया कि जून से पूर्व के गौड़ खनिज की राशि जिला पंचायत के द्वारा रोक दी गई है. जो राशि जनपद के जनप्रतिनिधियों के द्वारा करवाए जाने वाले जनहित के कार्यों की राशि है उसे भाजपा नेता के इशारे पर रोका गया है. उच्च सदन और निम्न सदन के निर्वाचित और मनोनीत जनप्रतिनिधि के द्वारा जारी की जाने वाली जनहित राशि में जहां जनप्रतिनिधि और ठेकेदारों को रॉयल्टी क्लियरेंस के नाम पर कलेक्टर द्वारा सभी विभागों में पेमेंट रुकवा दिया गया है. जिला कार्यालय के द्वारा जन प्रतिनिधियों को कोई भी विकास कार्य नहीं करने दिया जा रहा है.
अरुण मालाकार ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताएं कि बुंदेली में हुए कांग्रेसी नेता पर जानलेवा हमला के आरोपी को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है. धान खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था से कृषक पीड़ित हैं.  ₹3100 में धान खरीदी की गारंटी लेने वाला प्रदेश सरकार किसानों को धान का 2300 रुपए दे रहा है. धान खरीदी केंद्रों में किसानों के लिए ना तो कोई उचित व्यवस्था है और ना हीं धान के भरने के लिए बारदाना है. सरकार के कथनी, करनी दोनों में जमीन आसमान का फर्क दिखाई दे रहा है.
भाजपा सरकार दिखावे के लिए किसान का हितेषी है. जबकि वास्तव में धान बेचने वाले किसानों को जो परेशानियां आ रही उसे बयां नहीं किया जा सकता है. इलेक्ट्रॉनिक कांटा के नाम पर किसानों को ठगा जा रहा है. 40 किलो के बोरी की जगह तौल 42 किलो से ज्यादा का हो रहा है. यही भाजपा सरकार ने एक मुश्त 3100 रुपया देने की गारंटी दी थी. जिस गारंटी की पूरी तरह से हवा निकल गई है. भाजपा सरकार ने गद्दी पर बैठे से पूर्व ₹ 500 में रसोई गैस देने की गारंटी ली थी. आज तक किसी भी महिला को ₹ 500 में रसोई गैस नहीं मिली. भाजपा सरकार विकास के नाम पर कुछ नहीं कर रही है. सिर्फ ₹1000 महतारी वंदन का देकर वाह-वाही लूट रही है.
अरुण मालाकार ने प्रेस को बताया कि रक्सा धान खरीदी केंद्र में 28 नवंबर की देर रात भाजपा नेताओं द्वारा जमकर हल्ला बोला गया. इसके बाद प्रशासनिक जांच की गई और जांच के बाद 2 दिन पहले सात लोगों पर FIR दर्ज किया गया. जिसमें विधायक पति गनपत जांगड़े का भी नाम है. उक्त FIR में दर्ज होने के बाद मामला पूरी तरह से गरमा गया है.
सूत्रों की माने तो उक्त मामले में विधायक पति ने उक्त जप्त धान खुद का नहीं होना बताया इसके बाद उक्त मामले में राजनीति साजिश की छवि साफ नजर आ रही है. उक्त घटना के घटनाक्रम और दो दिनों पहले हुए FIR के बाद सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 26 नवंबर से 29 नवंबर तक जांगड़े दंपत्ति विशाखापट्टनम में स्वास्थ्य लाभ के लिए गयें थे. जहां उनकी रेलवे से मिली यात्रा टिकट, जिस होटल में ठहरे थे उसकी रसीद, प्रपत्र और पर्चियां के साथ लाइव फेसबुक, इंस्टा ग्राम इत्यादि में साफ नजर आ रहा हैं कि वे जब सारंगढ़ में थे ही नहीं तो FIR में उनका नाम कैसे दर्ज हो गया ? इसमें षड्यंत्र है. यहां तक कि धान खरीदी केंद्र में ना तो उनकी उपस्थित है. ना ही धान बेचने पर लिए गए. फिंगरप्रिंट अंगूठे के निशान उनके है? ना किसी तरह का मोबाइल में मैसेज या ओटीपी का आना उक्त दिनांक में प्राप्त हुआ है? ना खरीदी केंद्र के सीसीटीवी में गनपत जांगड़े दिखाई दे रहें हैं? बल्कि बैंक द्वारा भेजे गए राशि को तत्काल पत्र लिख कर उक्त बैंक को अवगत भी कराया गया. 
विधायक श्रीमती उत्तरी गनपत जांगड़े ने कहा कि अगर उक्त तथ्य विधायक पति गनपत जांगड़े के सत्य निकलते हैं तो क्या यह पूरा घटनाक्रम कूट रचित पूर्व प्लानिंग और राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा है? किसी तरह कांग्रेस के मजबूत गढ़ सारंगढ़ में कांग्रेस विधायक के लगातार दो पंचवर्षीय बड़ी जीत से घबराई भाजपा उन्हें घेरने का भरसक प्रयास कर रही है.
उक्त घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस नेताओं ने विरोध दर्ज कर पूरे मामले को राजनीतिक द्वेष और षड्यंत्र कहा है? तो वही श्रीमती जांगड़े ने उक्त धान उनके पति द्वारा धान खरीदी केंद्र नहीं ले जाना बताया गया.
पत्रकारों की उपस्थिति में जिलाध्यक्ष अरुण मालाकार ने बताया कि जिला प्रशासन के खिलाफ 11 दिसंबर को आंदोलन किया जाएगा और जिला प्रशासन के द्वारा खुलकर भाजपाई राजनीति की जा रही है उसके खिलाफ चुनाव आयोग और राज्यपाल को ज्ञापन भी दिया जाएगा. अब इस मामले में क्या-क्या नई जानकारियां खुलकर सामने आती है इस पर सब की नजर टिकी हुई है.
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NSUI ने किया पंडित सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय के कुलसचिव का घेराव. निविदा में गड़बड़ी का विरोध

बिलासपुर : एनएसयूआई (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) ने बिलासपुर स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय में कुलसचिव भुवन राज सिंह का घेराव किया. एनएसयूआई के प्रदेश सचिव लोकेश नायक के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में जारी की गई निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर हुआ.
लोकेश नायक ने बताया कि हाल ही में विश्वविद्यालय द्वारा स्टेशनरी और सफाई सामग्री की खरीद के लिए निविदा आमंत्रित की गई थी. जिसमें नियमों में बदलाव के चलते पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं. एनएसयूआई का आरोप है कि विश्वविद्यालय द्वारा निविदा के नियमों को जानबूझकर कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के मकसद से तैयार किया गया है.
एनएसयूआई ने निम्नलिखित बिंदुओं पर आपत्ति जताई:
1. तारीख में बिना वजह बदलाव: निविदा की तिथि को बिना कोईवजह बताए आगे बढ़ाया गया.
2. शुल्क निर्धारित न करना: निविदा प्रक्रिया के दौरान कोई निर्धारित शुल्क नहीं लगाया गया. जो पारदर्शिता में कमी की तरफ इशारा करता है.
3. निविदा का समय: निविदा जमा करने का समय सुबह 11 बजे रखा गया. जिससे कई आवेदकों को असुविधा हो सकती थी.
4. मटीरियल की तादाद में कमी: निविदा जारी करते समय सामग्री की सही तादाद नहीं बताई गई. जिससे पारदर्शिता में कमी महसूस हुई.
5. कार्यादेश में देरी: न्यूनतम राशि निर्धारित होने के बावजूद कार्यादेश नहीं दिए गए.
6. आंकड़े छिपाने का आरोप: विश्वविद्यालय पर यह आरोप लगाया गया कि सामग्री की तादाद जानबूझकर छिपाई गई ताकि अपने खास लोगों को नाजायज फायदा दिलाया जा सके.
एनएसयूआई का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इन नियमों में जानबूझकर फेरबदल किए गए. ताकि निविदा प्रक्रिया में धांधली की जा सके. और अपने पसंदीदा ठेकेदारों को काम दिया जा सके.
एनएसयूआई की मांगें:
लोकेश नायक ने विश्वविद्यालय से निविदा प्रक्रिया में सुधार करने की मांग करते हुए कहा कि सभी अनियमितताओं को दूर कर नई निविदा आमंत्रित की जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो एनएसयूआई निविदा को रद्द करने की मांग करेगा और इसके लिए बड़े आंदोलन का आयोजन किया जाएगा. साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय से एक हफ्ते के भीतर सभी मुद्दों पर लिखित जवाब देने की मांग की.
विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया:
कुलसचिव भुवन राज सिंह ने एनएसयूआई के ज्ञापन को स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रहित में उचित फैसला लेगा और निविदा प्रक्रिया में जरुरी सुधार किए जाएंगे.
आंदोलन की चेतावनी:
एनएसयूआई ने यह साफ़ कर दिया है कि अगर विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक हफ्ते के भीतर उचित कदम नहीं उठाए तो वे उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे.
घेराव में मुख्य रुप से एनएसयूआई के प्रदेश सचिव लोकेश नायक, जिला उपाध्यक्ष सुमित शुक्ला, जिला महासचिव शुभम जैसवाल, प्रवीण साहू, सुबोध नायक, पुस्कर पाल, योगेश साहू, तरुण यादव और अंश बाजपेयी समेत कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल हुए.
इस विरोध प्रदर्शन के जरिए एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और छात्रों के हितों की रक्षा करने का दबाव बनाया है. अब यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाएगा और क्या एनएसयूआई के आरोपों पर निष्पक्ष जांच होगी.
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