स्कूल में टीचर ने छात्र को जड़ा 4 थप्पड़, 13 साल के सार्थक की सुनने की ताकत 80% खत्म, सड़क पर उतरा परिवार, लगाई इंसाफ की गुहार
Teacher slapped a student 4 times in school, 13 year old Sarthak's hearing power got reduced by 80%, family came out on the streets and pleaded for justice
राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के एक प्रतिष्ठित स्कूल में शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है. यहां सातवीं कक्षा के एक छात्र को होमवर्क की किताब निकालने में थोड़ी देर होने पर महिला टीचर ने इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी सुनने की शक्ति तकरीबन खत्म हो गई है. डॉक्टरों के मुताबिक़ बच्चे के कानों को 70 से 80 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है. यह दिल दहला देने वाला मामला डोंगरगढ़ के खालसा पब्लिक स्कूल का है. जिसके बाद से परिवार सदमे में है और बच्चे का रायपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है.
मिली जानकारी के मुताबिक 2 जुलाई को कक्षा 7वीं का छात्र सार्थक सहारे उम्र 13 साल अपनी क्लास में था. सामाजिक विज्ञान की टीचर प्रियंका सिंह क्लास में आईं और उन्होंने सार्थक को किताब निकालने के लिए कहा. सार्थक को किताब निकालने में थोड़ी देर हो गई. उसने दोबारा टीचर से पूछा, “मैम, मैं सुन नहीं पाया। आपने क्या कहा?”
बस इतनी सी बात पर टीचर प्रियंका सिंह गुस्से से तमतमा उठीं और उन्होंने छात्र के गालों पर एक के बाद एक 3-4 जोरदार थप्पड़ जड़ दिया. स्कूल से घर लौटते ही सार्थक ने अपनी मां से कहा, “मम्मी, मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा.” घबराए हुए माता-पिता उसे फौरन डोंगरगढ़ के सरकारी अस्पताल ले गए. डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि थप्पड़ से बच्चे के कान के पर्दों पर गंभीर अंदरुनी चोट आई है.
बच्चे की हालत की गंभीरता को देखते हुए उसे पहले राजनांदगांव जिला अस्पताल और फिर रायपुर के एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में रेफर किया गया. जहां उसका इलाज चल रहा है.
पिता सुधाकर सहारे ने बताया कि डॉक्टरों के मुताबिक, बेटे का दायां कान 70% और बायां कान 80% तक खराब हो गया है. इलाज लंबा चलेगा और परिवार को हर कुछ दिन में डोंगरगढ़ से रायपुर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.
इस मामले में स्कूल की ही एक अन्य छात्रा श्वेता गजभिए ने हिम्मत दिखाते हुए बताया कि आरोपी टीचर प्रियंका सिंह पहले भी कई छात्रों के साथ मारपीट कर चुकी हैं. वह बच्चों से चीखकर बात करती हैं और डर की वजह से कोई भी उनकी शिकायत नहीं करता था.
पीड़ित छात्र के पिता ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने स्कूल प्रबंधन से शिकायत की. तो उन्होंने सिर्फ एक ‘शो-कॉज नोटिस’ जारी कर अपना पल्ला झाड़ लिया। प्रबंधन ने न तो अपनी गलती मानी. न ही माफी मांगी और न ही बच्चे के इलाज का खर्च उठाने की पेशकश की.
छात्र की मां संतोषी सहारे ने रोते हुए कहा, “हम बस अपने बच्चे के लिए इंसाफ चाहते हैं. उस टीचर को फौरन सस्पेंड किया जाए और हमारे बच्चे के इलाज का पूरा खर्च स्कूल प्रबंधन उठाए। यह कोई मामूली सजा नहीं। हमारे बच्चे की जिंदगी पर जानबूझकर किया गया हमला है.”
मामला तूल पकड़ने के बाद डोंगरगढ़ की बीईओ वीरेंद्र कौर गरछा ने बताया कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एक जांच कमेटी बना दी गई है. जो 48 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. रिपोर्ट के आधार पर आरोपी टीचर के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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