हाईकोर्ट ने सरकार को दिया  बड़ा झटका, LB शिक्षकों को मिली बड़ी राहत, पेंशन पात्रता के लिए सेवा अवधि की गणना पर पुनर्विचार का आदेश रखा बरकरार

The High Court dealt a major blow to the government while granting significant relief to LB teachers by upholding the order to reconsider the calculation of service tenure for pension eligibility.

हाईकोर्ट ने सरकार को दिया  बड़ा झटका, LB शिक्षकों को मिली बड़ी राहत, पेंशन पात्रता के लिए सेवा अवधि की गणना पर पुनर्विचार का आदेश रखा बरकरार

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शिक्षक एलबी (LB) संवर्ग की पेंशन पात्रता से जुड़े एक बेहद अहम मामले में राज्य  सरकार की अपील को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश को यथावत रखा है. जिसमें सरकार को शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना के नियमों पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए गए थे. कोर्ट के इस फैसले को राज्य के हजारों शिक्षकों के भविष्य के लिहाज से एक बड़ा ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है.
याचिकाकर्ता शिक्षकों का मुख्य विवाद शासकीय सेवा अवधि की गणना को लेकर है. वर्तमान में राज्य सरकार एलबी संवर्ग के शिक्षकों की सेवा की गणना 1 जुलाई 2018 से कर रही है जब इन्हें औपचारिक रूप से नियमित शासकीय सेवा में समाहित किया गया था.
शिक्षकों का पक्ष
शिक्षकों का तर्क है कि नियमित होने से पहले उन्होंने एक लंबे समय तक ‘शिक्षाकर्मी’ के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं. नियम के मुताबिक शासकीय सेवा में पेंशन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 10 साल की अर्हता सेवा जरुरी है. अगर सरकार सिर्फ 2018 से सेवा की गणना करती है. तो सेवानिवृत्त होने वाले कई शिक्षक अपनी लंबी वास्तविक सेवा के बावजूद पेंशन के लाभ से पूरी तरह वंचित हो जाएंगे. इसलिए उनकी पूर्व सेवा (शिक्षाकर्मी के तौर पर व्यतीत अवधि) को भी इस गणना में जोड़ा जाए.
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
सनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने साफ किया कि सिंगल बेंच का आदेश किसी भी तरह से नीतिगत मामलों में न्यायिक अतिक्रमण नहीं था. एकल पीठ ने सरकार को कोई नई नीति थोपने या जबरन लागू करने का आदेश नहीं दिया था. बल्कि सिर्फ इस संवेदनशील विषय पर सहानुभूतिपूर्वक और तर्कसंगत पुनर्विचार करने को कहा था. यह निर्देश पूरी तरह से न्यायिक अधिकार क्षेत्र के भीतर आता है. यह भी रेखांकित किया कि यह मामला महज कुछ व्यक्तिगत याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं है. बल्कि इससे राज्य का एक बहुत बड़ा कर्मचारी वर्ग सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है. इस विसंगति की वजह से लगातार कानूनी विवाद और मुकदमेबाजी बढ़ रही है. ऐसे में राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह एक स्पष्ट, तर्कसंगत और पारदर्शी नीति तैयार करे ताकि भविष्य में ऐसे विवादों को बार-बार अदालत न लाना पड़े.
प्रदेश के हजारों कर्मचारियों को मिल सकती है राहत
डिवीजन बेंच द्वारा सरकार की अपील खारिज किए जाने के बाद अब शासन स्तर पर इस नीतिगत पेंच को सुलझाने का दबाव बढ़ गया है. अगर छत्तीसगढ़ सरकार इस विषय पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए शिक्षाकर्मी के रूप में की गई पूर्व सेवाओं को पेंशन गणना में शामिल करती है. तो प्रदेश के हजारों एलबी संवर्ग के शिक्षकों को बुढ़ापे का एक सुरक्षित संबल (पेंशन) मिल सकेगा.
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