अस्पताल का हाल बेहाल: डॉक्टरों ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी में किया नसबंदी ऑपरेशन, 7 जनरेटर रहे बंद, सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें

The condition of the hospital is bad Doctors performed sterilization operation in the light of mobile torch 7 generators remained switched off pictures going viral on social media

अस्पताल का हाल बेहाल: डॉक्टरों ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी में किया नसबंदी ऑपरेशन, 7 जनरेटर रहे बंद, सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें

बिलासपुर : बिलासपुर जिला अस्पताल इन दिनों अपनी लचर व्यवस्था की वजह से सुर्खियों में है. फिर से एक बड़ी लापरवाही सामने आई है. जहां मोबाइल के टॉर्च की रोशनी में डॉक्टरों ने मरीज का ऑपरेशन कर दिया. टॉर्च की रोशनी में किए गए इस लापरवाही भरे ऑपरेशन की तस्वीरें भी सामने आई हैं.
मिली जानकारी के मुताबिकसोमवार को बिलासपुर जिला अस्पताल में नसबंदी के ऑपरेशन के दौरान अचानक बिजली चली गई. हालत इतनी गंभीर हो गई कि डॉक्टरों को मोबाइल टॉर्च की मदद से मरीज का ऑपरेशन करना पड़ा. जिससे मरीज की जान पर बन आई. डॉक्टरों ने मोबाइल के टॉर्च की रोशनी के सहारे ही ऑपरेशन किया. अस्पताल में बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद नसबंदी सहित दुसरे ऑपरेशनों को भी टालना पड़ा.
बताया जा रहा है कि ऑपरेशन थियेटर में पॉवर बैकअप देने के लिए अस्पताल में 7 जनरेटर मौजूद होने के बावजूद कोई काम नहीं आया. क्योंकि सभी जनरेटर बंद पड़े थे. जनरेटर बंद रहने की वजह डीजल की कमी बताई जा रही है. इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही को उजागर किया है.
अस्पताल प्रशासन ने इस घटना पर सफाई देते हुए कहा है कि बिजली गुल होने की स्थिति अनपेक्षित थी और स्थिति को संभालने के लिए तात्कालिक उपाय किए गए. हालांकि, इस सफाई से जनता की नाराजगी कम होती नहीं दिख रही है. लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसी जगहों पर ऐसी घटनाओं से मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है और यह स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की फौरन जरुरत को दर्शाता है.
बता दें कि कुछ दिन पहले ही जिला अस्पताल में एक दुर्घटनाग्रस्त युवक के इलाज में लापरवाही बरती गई थी. इस मामले में मीडिया में खबर आने पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है और जनहित याचिका के रुप में सुनवाई शुरु की. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 4 अक्टूबर को निर्धारित की गई है.
इस ताजा घटना के बाद सोशल मीडिया पर जनता और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जमकर नाराजगी जताई है. लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर कमियों को उजागर करती हैं. राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ता जा रहा है. ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों.
बिलासपुर जिला अस्पताल की यह घटना सरकारी अस्पतालों में सुधार की जरूरत पर जोर देती है। यह साफ़ है कि स्वास्थ्य सेवाओं में न केवल उपकरणों और संसाधनों की कमी है. बल्कि आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए भी पर्याप्त तैयारी नहीं है. अब यह देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस घटना पर क्या कदम उठाते हैं और क्या भविष्य में इस तरह की लापरवाही को रोका जा सकेगा.
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