राजिम कुंभ कल्प मेला के आमंत्रण कार्ड में मुख्य पेज पर छपी किसी अन्य स्थान की तस्वीर, दुकान आवंटन को लेकर नाराज व्यापारियों का प्रदर्शन

The invitation card for the Rajim Kumbh Kalpa Mela featured a picture of a different location on the main page, prompting angry traders to protest over shop allotment.

राजिम कुंभ कल्प मेला के आमंत्रण कार्ड में मुख्य पेज पर छपी किसी अन्य स्थान की तस्वीर, दुकान आवंटन को लेकर नाराज व्यापारियों का प्रदर्शन

​दुकान आवंटन को लेकर व्यापारियों का प्रदर्शन

गरियाबंद/राजिम : छत्तीसगढ़ का प्रयागराज कहलाने वाला राजिम धर्म नगरी के कुंभ कल्प मेला 2026 अभी शुरू होने से पहले ही चर्चाओं की भेंट चढ़ गया है. राजिम कुंभकल्प मेले का आगाज हो चुका है. लेकिन इस बार मेले में पुण्य से ज्यादा पैसे की चर्चा है. लोमस ऋषि आश्रम के पास का नजारा इन दिनों किसी आध्यात्मिक शिविर जैसा नहीं, बल्कि एक अघोषित धरना स्थल जैसा नजर आ रहा है. यहां मगरलोड क्षेत्र के व्यापारी और जनप्रतिनिधि प्रशासन की अदभुत कार्यप्रणाली का गुणगान (नारेबाजी) की.
मेले में दुकान आवंटन को लेकर व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन ने सुविधा शुल्क के नाम पर वसूली का नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है. आरोप है कि दुकान आवंटन के लिए व्यापारियों से अनुचित तरीके से 1 हजार वसूले जा रहे हैं. व्यापारियों का कहना है कि यह कुंभ है या वसूली मेला? समझ नहीं आ रहा.
​दूसरी तरफ मगरलोड जनपद के जनप्रतिनिधियों का दर्द अलग ही है. उनका कहना है कि प्रशासन ने उन्हें आयोजन से ऐसे गायब कर दिया है जैसे धूप में कपूर! उपेक्षा से नाराज माननीय अब गरियाबंद जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर सुर से सुर मिला रहे हैं.
​राजिम कुंभकल्प की शुरुआत ही विरोध प्रदर्शनों के साथ हुई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि व्यवस्था बनाने के नाम पर सिर्फ अव्यवस्था ही परोसी जा रही है. लोमस ऋषि आश्रम के पास धरने पर बैठे लोग अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं.
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आमंत्रण कार्ड में मुख्य पेज पर छपी किसी अन्य स्थान की तस्वीर

राजिम : राजिम के कुंभ कल्प मेला 2026 में इस बार 1 फरवरी से 15 फरवरी तक आयोजित होने वाले इस भव्य धार्मिक आयोजन के लिए छपाए गए आधिकारिक आमंत्रण कार्ड के मुख्य पृष्ठ पर राजिम की बजाय किसी दूसरे स्थान की फोटो छाप दी गई. जिससे स्थानीय श्रद्धालुओं और निवासियों में गहरा आक्रोश फैल गया है.
यह बात तब सामने आई जब कार्ड वितरित होने शुरु हुए. राजिम के राजीव लोचन मंदिर, त्रिवेणी संगम (महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के पावन संगम) और मेला स्थल की दर्जनों खूबसूरत तस्वीरें शासन की वेबसाइट, सोशल मीडिया और पर्यटन विभाग के प्रचार सामग्री में उपलब्ध होने के बावजूद, आमंत्रण कार्ड में गलत फोटो का इस्तेमाल कर आस्था के साथ छेड़छाड़ जैसी भावना पैदा हो गई है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि राजिम कुंभ कल्प छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है. जहां लाखों श्रद्धालु स्नान, शाही स्नान, गंगा आरती और संत समागम के लिए आते हैं. ऐसे में आमंत्रण कार्ड जैसी महत्वपूर्ण दस्तावेज में यह घोर लापरवाही न सिर्फ आयोजन की गरिमा को ठेस पहुंचाती है. बल्कि राजिम की विशिष्टता को भी कमजोर करती है.
एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हमारे मंदिर और संगम, मेले की फोटो बहुत से सोशल मीडिया साइट पर उपलब्ध हैं. फिर भी ठेकेदार ने लापरवाही बरती. यह सिर्फ प्रिंटिंग की गलती नहीं, बल्कि हमारी आस्था का अपमान है."
प्रशासन की भी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. शासन-प्रशासन ने कार्ड छपवाने से पहले क्वालिटी चेक तक नहीं किया? पर्यटन एवं संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन गरियाबंद और संबंधित ठेकेदार की निगरानी में यह चूक कैसे हो गई? अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान या कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है.
यह घटना पहले से ही टेंडर विवाद और तैयारी में देरी जैसे मुद्दों से जूझ रहे कुंभ कल्प मेला के लिए और विवादास्पद साबित हो रही है. अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस बड़ी लापरवाही पर क्या सख्त कार्रवाई करता है. क्या ठेकेदार पर जुर्माना लगेगा, कार्ड वापस बुलाए जाएंगे या सिर्फ माफी मांगकर मामला दबा दिया जाएगा?
राजिम कुंभ कल्प 2026 में इस बार नए 52 एकड़ मेला स्थल पर भव्य आयोजन प्रस्तावित है. जिसमें महाशिवरात्रि पर विशेष स्नान शामिल है. लेकिन अगर ऐसी लापरवाहियां जारी रहीं. तो आयोजन की सफलता पर सवाल खड़े हो सकते हैं. स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई हो और सही फोटो वाले सुधारे हुए कार्ड जारी किए जाएं.
स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं की मांग है कि-
दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई हो
गलत कार्ड वापस मंगाए जाएं
राजिम की सही पहचान वाली फोटो के साथ नए आमंत्रण कार्ड जारी किए जाएं
अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर लापरवाही को कितनी गंभीरता से लेता है या यह मामला सिर्फ औपचारिक माफी तक ही सीमित रह जाएगा.
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