बिना टेंडर पुलिया निर्माण के मुद्दे पर सदन में हंगामा, विपक्ष ने किया वाकआउट, भाजपा के विधायक ने उठाया जल जीवन मिशन में अनियमितता का मामला

Uproar in the House on the issue of construction of culvert without tender opposition walked out BJP MLA raised the issue of irregularities in Jal Jeevan Mission

बिना टेंडर पुलिया निर्माण के मुद्दे पर सदन में हंगामा, विपक्ष ने किया वाकआउट, भाजपा के विधायक ने उठाया जल जीवन मिशन में अनियमितता का मामला
बिना टेंडर पुलिया निर्माण के मुद्दे पर सदन में हंगामा, विपक्ष ने किया वाकआउट, भाजपा के विधायक ने उठाया जल जीवन मिशन में अनियमितता का मामला

बिना टेंडर पुलिया निर्माण के मुद्दे पर सदन में हंगामा, विपक्ष ने किया वाकआउट
रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने एक के बाद एक कई अहम मुद्दे उठाए जिसमे सुकमा जिला में बिना टेंडर के पुलिया निर्माण के मुद्दें पर सदन में जमकर हंगामा हुआ. मंत्री अरुण साव ने कबूल किया कि सुरक्षा बलों की सुविधा के लिए वहां दो पुलिया का निर्माण मई में शुरु कराया गया था. तब लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगी हुई थी. चूंकि काम बरसात के पहले कराना था. इस वजह से बिना टेंडर के ही काम दे दिया गया.
मंत्री ने बताया कि विरोध के बाद काम बंद कर दिया गया. इसमें राज्‍य सरकार की तरफ से कोई भुगतान नहीं किया गया है. दोनों पुलिया के लिए नया टेंडर जारी किया गया था. आज उसे खोला जा रहा है.
यह मामला विधानसभा में कवासी लखमा ने उठाया था. इस पर पुरक प्रश्‍न करते हुए भूपेश्‍ बघेल ने कहा कि मंत्री कबूल कर रहे हैं कि बिना टेंडर के काम हुआ है. इसमें भ्रष्‍टाचार हुआ है. उन्‍होंने इस पूरे मामले की जांच की मांग की.
इस पर मंत्री ने बताया कि सरकार की तरफ से कोई भुगतान नहीं किया गया. विपक्षी सदस्‍य इस जवाब से संतुष्‍ट नहीं हुए और उन्‍होंने सदन में नारेबाजी शुरु कर दी. विरोध में कांग्रेस के सदस्‍यों ने सदन से वाकआउट किया.
इससे पहले लखमा ने पूरे मामले की जांच कराने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की. कवासी लखमा ने पूछा था कि सुकमा और दंतेवाड़ा के सरहदी गांव परिया, नागलगुण्डा और मुलेर में पुलिया निर्माणाधीन है या पूर्ण निर्मित हो गयी है?
उन्‍होंने जानना चाहा कि इनका प्रशासकीय स्वीकृति कब प्रदान की गयी? इस सवाल के जवाब में पीडब्‍ल्‍यूडी मंत्री अरुण सवा ने बताया कि परिया, नागलगुण्डा और मुलेर में पुलिया निर्माणाधीन था. वर्तमान में काम बंद है और निविदा प्रक्रिया चल रही है.
उन्‍होंने बताया कि वह क्षेत्र घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से जिला प्रशासन कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सुकमा द्वारा निर्देशित किया गया कि यह मार्ग बहुत अहम है. जिसका निर्माण कार्य फौरन शुरु करें. जिला प्रशासन एवं लोक निर्माण विभाग द्वारा संयुक्त रुप से लोकल स्तर पर कार्यरत ठेकेदार विनोद सिंह राठौर और राम नरेश भदौरिया को राजी किया गया है. जिसके परिपालन में वर्तमान स्थिति में परिया नाला में एक स्लेब पूर्ण और मूलेर नाला में सुपरस्ट्रेक्चर का काम पूरा किया गया है. इस काम को पूरा करने के लिय पुलिस विभाग द्वारा पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराया गया. कांग्रेस के सदस्‍यों ने आरोप लगाया कि जिन लोगों को बिना टेंडर के काम दिया गया था. सिर्फ वही दोनों लोगों ने टेंडर भरा है.
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विधानसभा शीतकालीन सत्र के दूसरा दिन सत्ता पक्ष के विधायकों ने रायपुर के प्रसिद्ध बूढ़ा तालाब के सौंदर्यीकरण पर नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव को सदन में घेरा. भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव से सवाल किया कि बूढ़ा तालाब के सौंदर्यीकरण में किस-किस मद से राशि खर्च हुई है?
इसके जवाब में मंत्री अरुण साव ने बताया कि सभी कार्य स्मार्ट सिटी से हुआ है. इस पर अजय चंद्राकर ने कहा कि पर्यटन मंडल, नगर निगम और स्मार्ट की राशि खर्च हुई है. इस मामले की जांच कराई जाए. इस पर मंत्री ने परीक्षण कराने की बात कही. भाजपा विधायक राजेश मूणत ने भी मुद्दे पर मंत्री को घेरते हुए कहा कि तीन-तीन एजेंसियों ने काम किया है. 6 करोड़ का फाउंटेन लगाया. लेकिन बंद पड़ा हुआ है. सौंदर्यीकरण के कार्यों की जांच होनी चाहिए.
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भाजपा के विधायक ने उठाया जल जीवन मिशन में अनियमितता का मामला
विधानसभा में प्रश्नकाल में जल जीवन मिशन का मामला गूंजा. सत्ता पक्ष के विधायक धरमलाल कौशिक ने प्रश्नकाल के दौरान ने पूछा कि जल जीवन मिशन में पिछले दो साल में अनियमितता की कितनी शिकायतें मिली और उन पर क्या कार्रवाई हुई. भाजपा विधायक ने विभागीय मंत्री से जानना चाहा कि फर्जी दस्तावेज से ठेका लेने वाली कंपनी पर एफ आई आर क्यों नहीं कराई गई. इसके बाद भी अधिकारियों ने ठेकेदार को भुगतान क्यों किया? ऐसे अफसरों पर कार्रवाई की मांग भाजपा विधायक ने की.
इसके जवाब में लोक निर्माण मंत्री ने बताया कि 20 ठेकेदारों पर कार्रवाई की गई है. इसकी जांच का जिम्मा उच्च स्तरीय कमेटी कर रही है. इस कमेटी की अनुशंसा के आधार पर जरुरत पड़ी तो अफसरों पर मामला दर्ज कराया जाएगा. मंत्री ने सदन को आश्वस्त कराया कि जल जीवन मिशन में लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी.
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माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की धोखाधड़ी का मुद्दा, विपक्ष ने की स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग
छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की धोखाधड़ी का सवाल खड़ा किया गया. विपक्ष ने आरोप लगाया कि इन कंपनियों द्वारा महिला समूहों से ठगी की जा रही है और लोन वसूली के नाम पर महिलाओं को आधी रात को प्रताड़ित किया जा रहा है. खासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में यह ठगी और शोषण बढ़ रहा है. जहां ग्रामीणों को बुरी तरह से लूटा जा रहा है.
विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार से गंभीर जांच की मांग की. यह आरोप लगाते हुए कि सरकार इस मामले में सिर्फ खानापूर्ति कर रही है और ठोस कार्रवाई से बच रही है. विपक्ष ने विधानसभा में इस विषय पर स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग की. ताकि इस समस्या की गंभीरता को समझा जा सके और प्रभावी समाधान निकल सके. हालांकि आसंदी ने विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिया. जिससे विपक्षी दलों में निराशा व्याप्त हो गई.
बता दें कि छत्तीसगढ़ में इन दिनों महिलाओं से धोखाधड़ी और लोन वसूली के तरीकों ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है. विपक्ष ने राज्य सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है. ताकि इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई की जा सके और पीड़ितों को इंसाफ मिल सके.
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अवैध प्लाटिंग का मामला, विधायक अनुज शर्मा के सवालों से घिरे मंत्री वर्मा, लंबी बहस के बाद कार्रवाई की घोषणा
विधानसभा में अवैध प्लाटिंग का मामला जोर शोर से गूंजा. सत्ता पक्ष की तरफ
से ही उठाए गए सवालों से राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा जमकर घिरते नजर आए. सदन में लंबी बहस के बाद स्पीकर के निर्देश पर मंत्री ने उच्च स्तरीय समिति बनाकर कार्रवाई करने की घोषणा सदन में की. स्पीकर ने इसकी रिपोर्ट भी एक महीने के भीतर सदन में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.
ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए भाजपा विधायक अनुज शर्मा ने यह मामला उठाते हुए अपने विधानसभा क्षेत्र धरसीवां के कुछ गांवों का नाम बताते हुए कहा कि यहां कॉलोनाइजरों द्वारा अवैध प्लाटिंग की जा रही है. ये अवैध प्लाटिंग बिना ग्राम और नगर निवेश विभाग और रेरा की अनुमति से हो रहा है. इसे रोकने सरकार ने क्या योजना बनाई है.
राजस्व मंत्री ने कबूल किया कि प्रदेश के कई जिलों में कालोनाइजरों और भूमाफियाओं द्वारा अवैध प्लाटिंग की जा रही है. इसे रोकने उन्होंने जल्द फैसला लेने की जानकारी सदन में दी. इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए स्पीकर डॉ रमन सिंह ने मंत्री को निर्देश दिया कि नगरीय प्रशासन, आवास एवं पर्यावरण और राजस्व विभाग की उच्च स्तरीय समिति बनाकर इसकी जांच कराएं और एक महीने के भीतर इसकी जानकारी सदन को उपलब्ध कराएं. वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने भी इसका समर्थन करते हुए अवैध प्लाटिंग रोकने सख्ती से कार्रवाई की जरुरत बताई.
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