सरकारी नौकरी लगाने के नाम पर 45 लाख की ठगी, 3 साल से कांकेर में छिपा मास्टरमाइंड गिरफ्तार होकर पहुंचा सलाखों के पीछे

45 lakh rupees defrauded in the name of government job, mastermind hidden in Kanker for 3 years arrested and sent behind bars

सरकारी नौकरी लगाने के नाम पर 45 लाख की ठगी, 3 साल से कांकेर में छिपा मास्टरमाइंड गिरफ्तार होकर पहुंचा सलाखों के पीछे

दुर्ग : सरकारी नौकरी लगाने का झांसा देकर करोड़ों रुपए ठगने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी पिछले तीन सालों से फरार चल रहा था और कांकेर में किराए के मकान में छिपकर रह रहा था. अंजोरा चौकी पुलिस ने 14 अक्टूबर को विशेष टीम बनाकर आरोपी को दबोच लिया.
मिली जानकारी के मुताबिक अरुण मेश्राम उम्र 54 साल दुर्ग जिले के अंजोरा क्षेत्र में दर्ज ठगी के एक बड़े मामले में वांछित था. आरोपी ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर 20 से 25 लोगों से मंत्रालय में नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब 45 लाख रुपए की ठगी की थी.
यह पूरा मामला 2 जुलाई 2022 को ग्राम चिरचार निवासी संतराम देशमुख की शिकायत पर उजागर हुआ था. संतराम ने पुलिस को बताया था कि भेषराम देशमुख और रविकांत देशमुख नामक दो लोगों ने अपने साथी अरुण मेश्राम के साथ मिलकर खुद को मंत्रालय में बड़े अधिकारी के रूप में पेश किया। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे 5 लाख रुपए लिए गए थे. लेकिन वादा पूरा नहीं किया गया.
इसके बाद जब अन्य पीड़ितों ने भी इसी तरह की शिकायतें कीं. तो पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु की. शुरुआती कार्रवाई में भेषराम देशमुख और उसके बेटे रविकांत देशमुख को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. जबकि मुख्य साजिशकर्ता अरुण मेश्राम फरार हो गया था.
चौकी प्रभारी खेलन सिंह साहू को गुप्त खबर मिली कि फरार आरोपी अरुण मेश्राम कांकेर में रह रहा है. खबर के आधार पर पुलिस टीम ने 14 अक्टूबर को दबिश दी और आरोपी को घेराबंदी कर पकड़ लिया।
पूछताछ में अरूण ने कबूल किया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर 20 से 25 लोगों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपए ऐंठे। आरोपी ने पुलिस को यह भी बताया कि ठगी की रकम तीनों ने आपस में बांट ली थी. उसने अपने हिस्से से कांकेर में करीब 15 लाख रुपए का प्लॉट खरीदा था और पिछले तीन सालों से इसी रकम से घर खर्च चला रहा था.
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से प्लॉट खरीदी से जुड़ा एग्रीमेंट और 4,000 रुपए नकद बरामद किए। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है.
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी अरूण मेश्राम खुद को मंत्रालय में बड़ा अफसर बताकर लोगों को विश्वास में लेता था. अंजोरा निवासी भेषराम देशमुख और उसका बेटा रविकांत देशमुख 6 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किए जा चुके हैं. दोनों ने कबूल किया था कि उन्होंने अरुण मेश्राम की मंत्रालय में अधिकारियों से जान-पहचान होने की बात कहकर लोगों को ठगा.
पुलिस अब इस ठगी के शिकार अन्य पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है. साथ ही ठगी की रकम से खरीदी गई अन्य संपत्तियों और निवेशों की भी जांच की जा रही है. पुलिस का मानना है कि इस गिरोह ने कई जिलों में लोगों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगी की है.
इस मामले ने एक बार फिर दिखाया है कि फर्जी अधिकारियों और नौकरी के झांसे में आने से पहले सतर्क रहना कितना जरुरी है. पुलिस ने लोगों से अपील किया कि किसी भी सरकारी नौकरी के लिए केवल वैध प्रक्रिया और अधिकृत माध्यमों का ही सहारा लें.
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