निमोनिया से जूझ रहे 10वीं के छात्र की मौत, नवोदय विद्यालय के प्रबंधन की लापरवाही से गई जान, इलाज में देरी और बदइंतजामी बनी जानलेवा

A 10th-grade student suffering from pneumonia died due to negligence on the part of the Navodaya Vidyalaya management, resulting in delayed treatment and poor management.

निमोनिया से जूझ रहे 10वीं के छात्र की मौत, नवोदय विद्यालय के प्रबंधन की लापरवाही से गई जान, इलाज में देरी और बदइंतजामी बनी जानलेवा

बिलासपुर : बिलासपुर जिले की मल्हार नवोदय विद्यालय के एक छात्र की निमोनिया से मौत हो गई. तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान छात्र की मौत हो गई. परिजनों ने छात्र की मौत को लेकर प्रबंधन पर अनदेखी और लापरवाही का आरोप लगाया है. साथ ही हॉस्टल के अव्यवस्था पर सवाल खड़े किया है.
मिली जानकारी के मुताबिक बेलगहना निवासी हर्षित यादव, पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा दसवीं का छात्र था. हर्षित कक्षा छठवीं से ही यहीं पढ़ रहा था और हॉस्टल में रह रहा था. बताया जा रहा है. नवोदय स्कूल से बेलगहना निवासी हर्षित यादव (कक्षा 10वीं) के पिता को फोन आया कि बेटे की तबीयत खराब है.
वे फौरन करीब 90 किलोमीटर दूर स्थित नवोदय विद्यालय पहुंचे. 
जब बच्चे को देखा तो वह नाजुक हालत में था और प्रबंधन से देर से जानकारी देने की बात कही जिसे मोटरसाइकिल से ले जाना संभव नहीं था. लेकिन गरीब मजबूर की कौन सुनता है फिर भी पिता ने वहाँ के प्रबंधन से चार पहिया वाहन उपलब्ध कराने की गुहार लगायी थी लेकिन प्रबंधन ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि चार पहिया वाहन को प्राचार्य लेकर गए हैं.
हड़बड़ाए हुए पिता मोटरसाइकिल से ही बच्चे को लेकर बिलासपुर के एक प्राइवेट अस्पताल गए. जहां से चार-पांच दिन की दवा देकर छुट्टी दे दी गई. लेकिन छात्र की हालत में सुधार नहीं हुआ. जिससे परिजन उसे 24 नवम्बर को बिलासपुर के वासुदेव क्लिनिक ले कर गए. जहां चिकित्सक ने बताया कि बच्चे को निमोनिया से पीड़ित है और हृदय की धड़कन सामान्य नहीं है और उसका रक्तचाप ज्ञात नहीं हो पा रहा है. चिकित्सक द्वारा बीमार छात्र का इलाज किया जा रहा था. लेकिन दोपहर करीब 2 बजे उसकी मौत हो गई.
छात्र के पिता ने बताया कि विद्यालय के छात्रावास में गंदगी का अंबार व बदइंतजामी को लेकर कई बार प्रबंधन से शिकायत की गई थी. जिसमें कहा गया था कि भवन में सीलन है दरवाज़े खिड़की टूटे हुए हैं संक्रमण का ख़तरा है. लेकिन प्रबंधन ने कोई ध्यान नहीं दिया. इस बारे में पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय मल्हार के प्राचार्य मनोज श्रीवास्तव से फोन पर चर्चा की गई तो उन्होंने छात्र की मौत की जानकारी होने की बात कही लेकिन जब उनसे परिजनों के द्वारा लगाये गए आरोप के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि तथ्य को जाने बिना कुछ नहीं बता सकते.
यहां जांच के बाद पता चला कि हर्षित को निमोनिया हो गया है. दवा देकर हर्षित को घर भेज दिया गया. अगले दिन फिर उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया. परिजन फिर से हर्षित को अस्पताल लेकर पहुंचे. जहां उसे आईसीयू में भर्ती किया गया. लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
बिलासपुर जिले के मल्हार में स्थित पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय जिले का एकमात्र स्कूल है. जिसमें मेधावी छात्र कॉम्पिटेटिव एक्जाम दिलाकर वहां प्रवेश मिलता है. जिसमें एस टी एससी पिछड़ा वर्ग व जनरल कोटे के ग्रामीण अंचल के लोग सीबीएसई पैटर्न से अध्ययन करने जाते हैं. वही बेलगहना के होनहार छात्र हर्षित यादव पिता जयप्रकाश यादव का चयन भी पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय मल्हार में हुआ था. पारिवारिक विषम परिस्थितियों में होने के बावजूद छात्र की लगन और मेहनत से नवोदय विद्यालय मल्हार में प्रवेश दिलाए. लेकिन क्या पता था की घर का चिराग स्कूल प्रबंधन की भेंट चढ़ जाएगा.
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि “मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है. फंड स्वीकृति का इंतजार है. हर्षित यादव की मौत ने सिस्टम की वह क्रूर तस्वीर उजागर कर दी है. जिसमें सुविधाओं के अभाव, प्रबंधन की अनदेखी और जिम्मेदारियों से भागने की संस्कृति ने एक मासूम की जिंदगी छीन ली. परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं और पूरे मामले की जांच की मांग जोर पकड़ रही है.
हर्षित के पिता ने रोते हुए कहा
“समय पर वाहन और इलाज मिलता तो बेटा बच जाता।”
“प्रबंधन ने मुंह मोड़ लिया, कोई साथ देने नहीं आया।”
“एक ही बेटा था… हमारा सबकुछ छिन गया।”
पिता ने बताया-
कमरे में सीलन
टूटी खिड़कियां-दरवाजे
बाथरूम की गंदगी व लगातार पानी का बहाव
नाली का पानी खाने की जगह तक
सांप-बिच्छू तक नजर आते हैं
ठंड में सुबह 5 बजे छात्रों को नहलाया जाता है
जांच में सामने आई गंभीर कमियां:
सीलन भरे कमरे, टूटी दीवारें
बाथरूम में रिसाव, बदबू, गंदगी
नाली का पानी कैंटीन तक
सुरक्षा लचर—सांप-बिच्छू दिखते हैं
नाममात्र की मेडिकल सुविधा
सुबह 5 बजे ठंड में नहलाने की मजबूरी
फंड के नाम पर उदासी, छात्र भुगत रहे कीमत
विद्यालय प्रबंधन ने 2022 से अब तक 6.60 करोड़ रुपये के 4 मरम्मत प्रस्ताव भेजे, लेकिन कोई मंजूर नहीं हुआ. जबकि नियम मुताबिक हर नवोदय विद्यालय को 90 लाख – 1 करोड़ रुपये सालाना का बजट मिलता है.
सवाल बड़ा है कि फिर छात्र बुनियादी सुविधाओं से क्यों वंचित हैं?
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि “मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। फंड स्वीकृति का इंतजार है.
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