धान खरीदी केंद्र में मोबाइल आईडी लूटकर पत्रकारों पर जानलेवा हमला, लाठी-डंडों से लैस 20-25 नकाबपोशों ने दिया वारदात को अंजाम

At a paddy procurement center, 20-25 masked men, armed with sticks and rods, looted mobile phones and launched a deadly attack on journalists.

धान खरीदी केंद्र में मोबाइल आईडी लूटकर पत्रकारों पर जानलेवा हमला, लाठी-डंडों से लैस 20-25 नकाबपोशों ने दिया वारदात को अंजाम

सारंगढ़ : सारंगढ़ जिले के धान खरीदी केंद्र लेंधरा (छोटे) में पत्रकारों पर जानलेवा हमले और लूटपाट की घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है. किसानों की शिकायत पर अव्यवस्थाओं की पड़ताल करने पहुंचे दो पत्रकारों के साथ मारपीट किए जाने, मोबाइल-आईडी-पर्स लूटने और कथित रुप से सबूत मिटाने के लिए केंद्र की लाइट व सीसीटीवी बंद करने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं. घटना के बाद जिले में दहशत और आक्रोश का माहौल है. पीड़ित पत्रकारों ने कोसीर थाने में शिकायत दर्ज कराकर आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
पीड़ित पत्रकारों में केशव वैष्णव (नेशनल न्यूज चैनल IND 24) और कमल सिंह यादव (जनसंपर्क भारत अखबार) शामिल बताए गए हैं. दोनों पत्रकारों का कहना है कि वे किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि और वस्तुस्थिति सामने लाने के लिए धान खरीदी केंद्र पहुंचे थे. किसानों ने केंद्र प्रबंधन पर अनियमितता, भेदभाव और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे. जिनमें खरीदी सीमा से ज्यादा धान लेने और प्रभावशाली लोगों को विशेष सुविधा देने जैसी बातें शामिल थीं.
किसानों की शिकायत: सीमा से ज्यादा खरीदी और “विशेष छूट” का आरोप
ग्रामीणों के मुताबिक लेंधरा (छोटे) धान खरीदी केंद्र में व्यवस्थाएं लंबे समय से सवालों के घेरे में हैं. किसानों का दावा है कि शासन द्वारा तय [40,600] क्विंटल की सीमा के खिलाफ केंद्र में [41,500] क्विंटल तक धान खरीदी किए जाने की शिकायत सामने आई है. अगर यह दावा सही है तो यह खरीदी प्रक्रिया की पारदर्शिता, रिकॉर्ड मिलान और प्रशासनिक निगरानी पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि सामान्य किसानों को घंटों लाइन में लगकर तौल कराने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. जबकि राजनीतिक प्रभाव रखने वाले या दबंग माने जाने वाले लोगों को घर से धान तौलकर लाने की छूट दी जा रही है. किसानों के मुताबिक इस कथित भेदभाव से आम किसानों में नाराजगी बढ़ती गई. ग्रामीणों का कहना है कि जब किसानों ने केंद्र में चल रही व्यवस्था और कथित अनियमितताओं पर विरोध जताया, तो जिम्मेदार कर्मचारियों द्वारा गाली-गलौच और दुर्व्यवहार किया गया.
लाठी-डंडों से हमला, 20–25 नकाबपोशों के शामिल होने का दावा
पीड़ित पत्रकारों के बयान के मुताबिक करीब रात 7 बजे के आसपास फड़ प्रभारी मोहर लाल साहू, कंप्यूटर ऑपरेटर लखन खूंटे और खिलेश्वर साहू ने अपने साथ 20-25 नकाबपोश युवकों को बुलाया और पत्रकारों पर लाठी-डंडों से हमला करवाया. पत्रकारों का कहना है कि हमलावरों ने न सिर्फ मारपीट की. बल्कि कवरेज से जुड़े उपकरणों और निजी सामान को भी निशाना बनाया. आरोप है कि हमले के दौरान पत्रकारों के कीमती मोबाइल फोन, आईडी कार्ड और पर्स लूट लिए गए. पीड़ितों ने मारपीट में चोटें आने की बात भी कही है. घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और हमलावर फरार हो गए.
थाने में शिकायत, पुलिस जांच की बात
घटना की जानकारी मिलते ही अन्य पत्रकार साथी और परिचित कोसीर थाना पहुंचे. पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है. पुलिस का कहना है कि आरोपियों की पहचान कर सबूतों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी. मामले में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल, चश्मदीदों के बयान और अन्य सबूत जुटाने की प्रक्रिया की बात कही जा रही है.
हालांकि पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना के समय सीसीटीवी बंद कर दिए गए थे, जिससे सबूत जुटाने में बाधा आ सकती है. ऐसे में पुलिस जांच में यह बिंदु भी अहम माना जा रहा है कि सीसीटीवी किसने और किस समय बंद किया. और अन्य वैकल्पिक सबूत (आसपास के कैमरे, मोबाइल वीडियो, गवाह) क्या उपलब्ध हैं.
पहले भी हो चुके हमले, पत्रकार सुरक्षा पर सवाल
स्थानीय पत्रकारों के अनुसार सारंगढ़ क्षेत्र में पत्रकारों पर हमले की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं. कुछ समय पहले एक वरिष्ठ पत्रकार पर दुकान में घुसकर जानलेवा हमला होने की घटना ने जिले समेत प्रदेश में नाराजगी पैदा की थी. अब लेंधरा (छोटे) धान खरीदी केंद्र में हुई. ताजा घटना ने एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा और अपराधियों के हौसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
घटना के बाद पत्रकार संगठनों और मीडिया जगत में रोष है. मांग की जा रही है कि आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की जाए. पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और धान खरीदी केंद्र में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हो. प्रशासन से उम्मीद जताई जा रही है कि मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी. ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके.
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