हाइवा ने कुचला मोटरसाइकिल सवार को, रेत खदान में हुआ दर्दनाक हादसा खनन की भूख पारागांव के पूर्व उपसरपंच की ले गई जान!, कब जागेगा प्रशासन?
A truck crushed a motorcyclist, a tragic accident took place in a sand mine. The hunger for mining took the life of the former deputy sarpanch of Paragaon, when will the administration wake up?
रायपुर/ महासमुंद : पढ़ने को थोड़ा अजीब लगेगा कि महासमुंद जिले के बरबसपुर रेत खदान में रेत से भरे हाइवा में दबने से आरंग के ग्राम पारागांव के पूर्व उपसरपंच की मौत हो गई और इसकी जांच रायपुर जिले की पुलिस कर रही है.
मिली जानकारी के मुताबिक रेत से भरे हाइवा वाहन का चालक गाड़ी को रिवर्स ले रहा था. इसी दौरान मोटरसाइकिल में बैठे संतु पाल को अपनी चपेट में ले लिया. संतु पाल पहिए के नीचे दब गया. जिससे उसकी मौत हो गई. घटना की जानकारी पहले महासमुंद पुलिस को दी गई. जिस जगह हादसा हुआ. वह महानदी के बीच में है.
पूर्व में महासमुंद जिले का बरबसपुर और पश्चिम में रायपुर जिले के आरंग विकासखंड अंतर्गत ग्राम राटकाट है. इसके बाद सीमाओं को लेकर आरंग पुलिस और महासमुंद पुलिस के बीच चर्चा हुई. फिर आखिर में मामले की जांच आरंग पुलिस द्वारा की जा रही है.
अब आरंग पुलिस के जांच करने से यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर घटना आरंग क्षेत्र के राटकाट में हुई है. तो महासमुंद के बरबसपुर रेत खदान वाले रायपुर जिले से रेत खदान का अवैध उत्खनन कर रहे हैं.
जानकारी मिली है कि कुछ दिन पहले ही राटकाट के ग्रामीणों द्वारा बरबसपुर रेत खदान से राटकाट क्षेत्र की रेत का अवैध उत्खनन करने की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई है. अब देखने वाली बात है कि खनिज विभाग अपनी तरफ से क्या कार्रवाई करता है. फिलहाल मृतक संतु पाल के शव का आरंग पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है.
बताया जा रहा है कि जिस रेत घाट से रेत निकला जा रहा है वह पूरी तरह से अवैध है. मृतक संतुपाल को पारागांव आरंग रायपुर निवासी होना बताया जा रहा है. संतु पाल पूर्व उपसरपंच पारागांव रह चुका है. बताया जा रहा है कि घटना बरबसपुर क्षेत्र में हुआ है. लेकिन सीमा विवाद का मामला बताते हुए मामले को महासमुंद जिले से हटाकर कर रायपुर स्थानांतरित किया जा रहा है. इसके पीछे गहरी राजनीति होना माना जा रहा है.
गौरतलब है कि एक दिन पूर्व ही महासमुंद जिला कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने बरबसपुर सहित 11 सरपंचों और पंचों को नोटिस थमाया था और पंचायत अधिनियम के तहत पूरी जवाबदेही सरपंचों की मानी गई है. नोटिस को 24 घंटा बीता नहीं और अवैध तरीके से संचालित हो रहे रेत घाट पर संतु पाल की मौत हो गई है.
महासमुंद जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में सालों से अवैध रेत का गोरखधंधा अपने चरम सीमा पर पहुंच चुका है. रेत माफिया महानदी का सीना छलनी कर करोड़ों की काली कमाई कर रहे हैं और शासन प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है. इस गंभीर स्थिति पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासन को कड़ी फटकार भी लगाई है. बावजूद इसके माफियाओं के हौसले इतने बुलंद है कि उनको ना तो शासन का डर है और ना प्रशासन का भय है. अदालत नेसाफ शब्दों में पूछा था कि जब माइनिंग एक्ट में कठोर दंड का प्रावधान हैं तो अवैध खनन में शामिल लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? आखिर कब तक सिर्फ जुर्माना लगाकर रेत माफियाओं को बचाने का प्रयास किया जा रहा है.
बता दें कि आज से कुछ हफ्ते पहले महासमुंद जिले के गाड़सिवनी में अवैध रेत का उत्खनन किया जा रहा था. जहां रेत माफियाओं ने ग्रामीणों को आपस में लड़वा कर पूरे गांव में अशांति फैला दी थी. बरबसपुर क्षेत्र के जिस इलाके में आज संतु पाल की मौत हुई है. यह अवैध रेत खदान का क्षेत्र है वह व्यक्ति है जो से रेत का अवैध गुरखधधा करते आ रहे हैं.
बताया जा रहा है कि यह रेत माफिया महासमुंद जिले में कई सालों से सक्रिय रहा है. जिसकी पहुंच यहां के राजनेताओं और अधिकारियों से बड़ा गहरा संबंध रहा है. यह रेत माफिया किसी संघ का अध्यक्ष भी बताया जा रहा है. जिसने इस संघ की आड़ में राजधानी में भी अपनी गहरी पकड़ बना रखी है.
माइनिंग एक्ट का पालन आखिर क्यों नहीं हो रहा पालन?
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अवैध रेत खनन की समस्या तब तक खत्म नहीं होगी. जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती. सिर्फ आर्थिक दंड लगाकर उन्हें छोड़ना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि अगर अवैध खनन को रोकना है. तो दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करनी होगी.
राज्य सरकार की कार्रवाई सिर्फ कागजी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि चार सदस्यीय टीम गठित की गई है. जो अन्य राज्यों का दौरा कर रेत खनन रोकने के उपायों पर रिपोर्ट तैयार करेगी. हालांकि हाईकोर्ट ने इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि सिर्फ जांच कमेटी बनाने और रिपोर्ट तैयार करने से अवैध खनन नहीं रुकेगा. जब तक प्रशासनिक स्तर पर ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी. तब तक माफिया नदियों को बर्बाद करते रहेंगे.
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अब FIR दर्ज करने का आदेश, रेत तस्करी को संज्ञेय अपराध घोषित करने की मांग
सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि अब अवैध रेत खनन और परिवहन करने वालों पर FIR दर्ज की जा रही है. और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है. हाईकोर्ट ने इस पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि रेत तस्करी को संज्ञेय अपराध घोषित किया जाना चाहिए. ताकि दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो सके और वे आसानी से बच न पाएं.
पूरे प्रदेश में सख्त निगरानी के आदेश- निर्दोषों की जान पर बन रही है
हाईकोर्ट ने कहा कि अवैध रेत खनन के कारण कई निर्दोषों की जान जा चुकी है. रेत खनन मासूम की मौत की नदियां बनी है इस समस्या की भयावहता को दर्शाती है. अदालत ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दियें हैं कि महानदी नदी सहित पूरे प्रदेश में अवैध खनन पर सख्ती से निगरानी रखी जाए और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए.
22 अप्रैल तक ठोस कार्रवाई करना था नहीं तो सरकार पर गिरेगी गाज
हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि अब सिर्फ औपचारिक कार्रवाई से काम नहीं चलेगा. अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी, तब तक सरकार को ठोस रिपोर्ट पेश करनी होगी. अगर सरकार और प्रशासन इस मामले में ढील बरतते हैं. तो अदालत कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी. क्या 22 अप्रैल को शासन प्रशासन ने कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की? पारागांव के पूर्व उपसरपंच की हादसे में मौत का मृतक के परिवार को क्या इंसाफ मिलेगा या मामला कफ़न दफन हो जायेगा?
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