गुरु घासीदास सेवादार संघ की जनसंघर्षों की स्मृति में डोला यात्रा का बेमेतरा में किया स्वागत, सम्मान सभा समारोह का आयोजन
Dola Yatra was welcomed in Bemetara in memory of the people's struggles of Guru Ghasidas Sevadar Sangh, felicitation ceremony was organized
बेमेतरा : गुरु घासीदास सेवादार संघ द्वारा मानवाधिकार स्वाभिमान डोला-यात्रा एवं डोला सम्मान सभा नवलपुर [ढारा], जिला बेमेतरा से "डोला -यात्रा" पथ प्रदर्शन-रोड शो शुरु हुआ.
जब घोड़ा में बैठने, डोला में बहू ले जाने, मूंछ रखने, पगड़ी पहनने, कथित उच्च वर्ग के घर के सामने जूता/चप्पल पहनने आदि पर कथित हिंदू धार्मिक आदेशों द्वारा शास्त्र सम्मत अनुमति नही था। इनके फरमान के विपरीत जाने पर हत्या कर दिया जाता और आज भी वर्तमान में प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से हो रहा है.
तब इन सामंती राजकीय कानून सिध्दांतो के प्रतिरोध में ई.1883 में भुजबल महंत साहब के नेतृत्व में क्रांतिकारी सतनाम आंदोलनकारियों ने बहु-बेटी के इज्जत-सम्मान के लिये डोला प्रथा का ऐतिहासिक जनसंघर्ष कर जीत हासिल किया था.
जिसकी याद में हर साल की तरह इस साल भी 28 अप्रैल 2025 सोमवार को इस ऐतिहासिक जनसंघर्षों की स्मृति में गुरुघासीदास सेवादार संघ [GSS] द्वारा 18वें वर्ष में "मानवाधिकार स्वाभिमान डोला-यात्रा " एवं डोला सम्मान सभा का कार्यक्रम किया गया.
इस डोला यात्रा के दौरान नवलपुर से ही बहुत जोरों से भारी हवा, तूफान आंधी और बारिश के साथ ओले पड़ना शुरु हो गया. जबरदस्त मौसम के प्रकोप के साथ रोड शो करते हुए डोला यात्रा का काफिला बेमेतरा में रोड शो करते हुए निकला. फिर डोला यात्रा का काफिला क्रांतिकारी नारा, फौज फटाके के साथ बेमेतरा-मुंगेली मुख्य सड़क मार्ग होते हुए, नवागढ़ के लिए रवाना हुआ. नवागढ़ (मेन रोड चौक) में राजेश जाँगड़े की अगुवाई में सुबोध साहब द्वारा सभा को संबोधित किया गया और कलादास डेहरिया द्वारा क्रांतिकारी गीत के साथ सभा को संबोधित किया गया.
मुंगेली (रायपुर गेट) के पास से रोड शो करते हुए रैली के साथ डोला मुंगेली एवं छत्तीसगढ़ के तमाम जिलों से डोला यात्रा में शामिल सैकड़ों लोगो द्वारा लंबी कतारबद्ध लाइन बनाकर दूर-दूर से आए कई क्रांतिकारी साथियों की डोला- यात्रा में जोरदार रोड शो के साथ आतिशबाजी नारा लगाते हुए सभी लोग अपने उस महान जननायक भुजबल महंत साहब को याद कर रहे थे. जिनकी अगुवानी में [इस डोला यात्रा में सतनामियों एवं सामंतवादी ताकतों के बीच बहुचर्चित संघर्ष हुआ था.
यह घटना इतनि ज्यादा प्रसिध्द हुई कि लोकगीतों में भी इसकी गूंज सुनाई देती है. लोकनाचा में ‘ रन खेत माड़गे संगी रे चिरहुला के लड़ाई में रन खेत माड़गे' (अर्थात् सुनो संगी चिरहुला में एक जबरदस्त रन लड़ाई हुआ)
यह घटना करीब 1883 ई. के आसपास की है. विशेषकर नवगढ़िया क्षेत्रों में नवागढ़ राज (वर्तमान बेमेतरा-मुंगेली जिला इलाका) के ग्राम नवलपुर (ढारा) सतनाम आंदोलन का एक महत्वपूर्ण गढ़ रहा है. सतनाम आंदोलन के प्रमुखों में से एक साहेब श्री भुजबल महंत यहीं के निवासी थे. रोड शो एवं नगर भ्रमण करते हुए डोला-यात्रा मुंगेली (सतनाम जैतखाम- करही) पहुंचा.
गुरुघासीदास सेवादार संघ [GSS ] की 18 वें वर्ष में मानवाधिकार स्वाभिमान डोला - यात्रा एवं इस डोला संम्मान सभा मे आए हुए मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथियों ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में भारतीय संविधान (आंबेडकरी संविधान) को ख़त्म कर कुछ लोगों द्वारा मनुस्मृति लागू करने का नाकाम कोशिश किया जा रहा है. ऐसे संविधान विरोधियों को सबक सिखाने की जरुरत है. जिससे लोकतंत्र को बचाया जा सके.
इस कार्यक्रम का अध्यक्षता कर रहे साहेब श्री लखन सुबोध ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी संगठन [GSS] गुरुघासीदास व सतनाम आंदोलन के इतिहास का शोध - खोज किया और यह काम 25 साल से जारी है. हम नदी में बहने वाले धार के उलट चलने का काम करते हैं. नदी के धार में बहुत लोग चलते हैं. लेकिन उसके विपरीत कुछ ही लोग चल पाते हैं और यह काम सिर्फ हमारी संगठन GSS कर रहा है. इसका साफ उदाहरण समाज के बीच गुरुघासीदास, गुरुबालकदास, भुजबल महन्त साहब का डोला प्रथा इतिहास सामने है.
डोला यात्रा के सम्माननीय विशिष्ट अतिथि -वक्तागण- का.तुहीन (केंद्रीय संयोजक जाति उन्मूलन आंदोलन रायपुर), श्री वीरेंद्र बोरकर (यूनाइटेड बुद्धिस्ट सोसाइटी राजनंदगांव), एम डी सतनाम (केन्द्रीय संगठक GSS), मिश्रीलाल खांडे ( अध्यक्ष SDPS), नरेन्द्र कुर्रे (सोशल एक्टिविस्ट बिलाईगढ़), पास्टर अनिश्चरण (माइनॉरिटी सोशल एक्टिविस्ट) पास्टर सुधीशचरण (सोशल वर्कर बिलासपुर), रविदास कुर्रे एवं लंबरदार जांगड़े (सतनाम अमर ज्योति बेलपान तखतपुर), सुश्री आशा सुबोध (वरिष्ठ कवित्री वह गीतकार) एवं कलादास डेहरिया (रेला सांस्कृतिक टीम लीडर भिलाई) द्वारा क्रांति गीत प्रस्तुत किया गया.
इस कार्यक्रम का संचालन- तामेश्वर अनंत, सुशील अनंत, गजेंद्र सांडे द्वारा किया गया. आभार प्रदर्शन रुपदास टंडन (GSS जिला संयोजक मुंगेली) द्वारा किया गया.
डोला यात्रा अनुशासन - नियंत्रण पायलेटिंग ब्यवस्था में वीरेन्द्र भारद्वाज, मनमोहन बांधे, महेश आर्य, किशोर सोनवानी, केशव सतनाम, रामनारायण भारती, सुकालु कोठारी, भावसिंह चतुर्वेदी, नेतराम खांडे, श्यामचंद मिरी, गुलशन बंजारे, संतोष सोल्डे,नीलेश खांडे, दुष्यंत आर्य, रुद्र आर्य, अविनाश आर्य, मुस्कान आर्य, संगीता मेरी अंकिता आर्य, ईनु खाण्डे, नीतू आदि शामिल रहे.
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