संतोष वर्मा के आपत्तिजनक बयान के बाद ब्राह्मण समाज में उबाल, FIR की मांग, रखा 1 लाख का ईनाम, कहा- गधे पर बैठाकर पूरा शहर घुमाएंगे
After Santosh Verma's objectionable statement, the Brahmin community is in turmoil, demanding an FIR, offering a reward of Rs 1 lakh, and saying he will be taken around the city on a donkey.
दुर्ग : मध्यप्रदेश के आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के ब्राह्मण समाज पर दिए गए विवादित बयान को लेकर दुर्ग के सर्व ब्राह्मण समाज में काफी नाराजगी है. गुरुवार को दुर्ग कलेक्टोरेट के सामने सर्व ब्राह्मण समाज के पदाधिकारियों ने आईएएस अधिकारी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
समाज के पदाधिकारियों ने संतोष वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सख्त कार्रवाई की मांग की. उन्होंने संतोष वर्मा को पकड़कर दुर्ग लाने पर एक लाख रुपए का ईनाम भी घोषित किया है.
एमपी के आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा ने 23 नवंबर को भोपाल के अंबेडकर मैदान में आयोजित सम्मेलन में आरक्षण के मुद्दे पर बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान न कर दे. तब तक आरक्षण मिलना चाहिए. ब्राह्मण समाज ने इस बयान को महिलाओं का अपमान और जातीय द्वेष फैलाने वाला बताया है.
समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि यह टिप्पणी किसी भी सरकारी अधिकारी के गरिमामय व्यवहार के खिलाफ है. आईएएस अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.
दुर्ग कलेक्टोरेट में कार्रवाई की मांग को लेकर पहुंचे सर्व ब्राह्मण समाज के दुर्ग संभाग अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश के उस आईएएस अधिकारी के बयान की कड़ी निंदा करते हैं. उन्होंने शासन के नाम एसडीएम और एडिशनल एसपी अभिषेक झा को ज्ञापन सौंपा. उन्होंने मांग किया कि जांच कर उस अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए. आईएएस अफसर को दुर्ग बुलाया जाए. समाज ने घोषणा किया कि अधिकारी को लाने वाले को 1 लाख रुपए का ईनाम मिलेगा और उसे शहर में लाकर गधे पर घुमाया जाएगा.
ब्राह्मण समाज पर अभद्र टिप्पणी करने वाले मध्यप्रदेश के आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा, मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) के अध्यक्ष भी हैं. उनकी टिप्पणी के बाद से लोगों में आक्रोश है.
एमपी में सामान्य प्रशासन विभाग ने उन्हें सिविल सेवा आचरण नियमावली का उल्लंघन करने के आरोप में नोटिस जारी किया है और सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है. वर्मा के बयान के बाद पूरे देश में विरोध शुरु हो गया है.
ज्ञापन देने वालों में ब्राम्हण समाज के राष्ट्रीय महासचिव शशि कांत तिवारी, सुरेंद्र शर्मा, अजय शर्मा, ऋषभ तिवारी, युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष, प्रदीप पाण्डे, ब्रजमोहन तिवारी, जितेंद्र तिवारी, नंदू शर्मा, गणेश शुक्ला, दीपक मिश्रा, हेमंत तिवारी, राजेश पांडे, दिनेश मिश्र, डॉ विश्वनाथ पाणिग्रही, रमेश शर्मा, आनंद महाराज, मुकेश तिवारी, ज्ञानेश्वर मिश्रा, विभा मिश्रा, शैल किरण शुक्ला, लीना दुबे, ऋषिकांत तिवारी, अरविन्द शुक्ला, अनिल बाजपेई, डॉ गोविन्द दीक्षित, राजेश पांडे, ब्रह्म तिवारी, संतोष अवस्थी, कान्हा मिश्रा, विक्की मिश्र, राकेश दुबे, संजय दुबे, आशुतोष शर्मा, राजेंद्र दुबे, लक्ष्मी नारायण विश्वा, केडी त्रिपाठी, अखिलेश मिश्र, जितेंद्र पांडे, रितेश शर्मा, शत्रु जय तिवारी, अनिल शुक्ला, मोहित शर्मा, बाल गोविंद मिश्रा, रानी उपाध्याय, राजेंद्र दुबे, संतोष शर्मा, मनोज तिवारी,राहुल पंडित, लकी दुबे मौजूद थे.
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बिलासपुर : बिलासपुर में मंगलवार को विश्व ब्राह्मण एकता महासंघ (छत्तीसगढ़) का प्रतिनिधिमंडल प्रदेश अध्यक्ष पंडित मणि शंकर पांडे और सुदेश दुबे के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा. प्रतिनिधिमंडल ने एसपी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि एक वरिष्ठ पद पर बैठे अधिकारी का इस तरह का बयान अस्वीकार्य है. संगठन ने इसे समाज की बेटियों के सम्मान का सवाल बताया और तत्काल कार्रवाई की मांग रखी. ज्ञापन में साफ कहा गया कि ब्राह्मण समाज किसी भी कीमत पर ऐसे अमर्यादित कथनों को सहन नहीं करेगा.
संगठन का यह भी कहना है कि यह महज़ एक बयान का मामला नहीं. बल्कि समुदाय की प्रतिष्ठा से जुड़ा संवेदनशील विषय है. इसलिए मामले की जांच निष्पक्ष रुप से हो और जरुरत पड़े तो एसआईटी बनाई जाए. यह मांग भी उठी कि सरकार इस तरह की घटनाओं पर स्पष्ट नीति लाए. ताकि आने वाले समय में कोई अधिकारी या सार्वजनिक पदाधिकारी इस तरह किसी भी समुदाय पर टिप्पणी करने का दुस्साहस ना कर सके.
मामला अगर तत्काल और संवेदनशील तरीके से नहीं संभाला गया तो सामाजिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस विवाद को सिर्फ कागज़ी कार्रवाई में सीमित न रखे. बल्कि स्पष्ट संदेश दे कि किसी भी वर्ग की गरिमा पर चोट बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसी आधार पर समाज ने शासन को चेताया कि अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो राज्यव्यापी आंदोलन की रुप-रेखा तैयार की जाएगी.
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रायपुर : राष्ट्रीय सर्व ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललित मिश्रा ने कहा कि “किसी जिम्मेदार प्रशासनिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस प्रकार की टिप्पणी समाज की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली है. ब्राह्मण समाज की बहन-बेटियों का अपमान किसी भी रुप में स्वीकार नहीं किया जा सकता.
मिश्रा ने कहा कि ऐसा व्यवहार सामाजिक सौहार्द के लिए घातक है. दुसरे हाथ शस्त्र है. प्रलय और निर्माण गोद में पलते हैं कही नारीशक्ति श्री दुर्गा रणचंडी काली और वीरांगना लक्ष्मी बाई बनकर रणक्षेत्र में कूद पड़ी तो भूचाल आ जाएगा. आज भारत एक प्रजातांत्रिक देश है. इसलिए सरकार को मामले का संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि “नारी शक्ति को अपमानित करने का प्रयास इतिहास में कभी सहन नहीं किया गया. समाज को उकसाने वाली भाषा से बचना चाहिए.”
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लेख मणि पांडे, राष्ट्रीय महामंत्री शशिकांत तिवारी, और प्रदेश प्रचार सचिव दीपक पांडे ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि “संतोष वर्मा द्वारा की गई कथित टिप्पणी न केवल महिलाओं का, बल्कि समाज की सांस्कृतिक मर्यादा का भी अपमान है। इस प्रकार का वक्तव्य एक संवैधानिक पद की मर्यादा से परे है और इसकी निष्पक्ष जाँच आवश्यक है.”
छत्तीसगढ़ इकाई तथा बेमेतरा जिला अध्यक्ष जितेंद्र शुक्ला ने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री तथा राज्य शासन से आग्रह करते हुए कहा कि “यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि संतोष वर्मा ने समाज विरोधी भाषा का प्रयोग किया है. तो उन्हें उनके पद से हटाकर उचित वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए, क्योंकि भारतीय प्रशासनिक सेवा की गरिमा सर्वोपरि है.”
समाज ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा ऐसी टिप्पणी जो जनता में असहिष्णुता, तनाव या सांप्रदायिक विभाजन बढ़ाए, उसे सरकार गंभीरता से ले और कानून के तहत उचित कदम उठाए.
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