धमतरी और महासमुंद में आंगनवाड़ी दीदियों का हल्लाबोल: ‘मुसवा होंगे बदनाम’ गीत गाकर सरकार को दिखाया आईना!, कहा - हमारे साथ धोखा
Anganwadi sisters in Dhamtari and Mahasamund protested: They sang the song "Muswa Honge Badnaam" and held up the government to the mirror, claiming they were deceived.
आंगनवाड़ी दीदियों का हल्लाबोल: ‘मुसवा होंगे बदनाम’ गीत गाकर सरकार को दिखाया आईना!
धमतरी: धमतरी के गांधी मैदान में पिछले दो दिनों से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं का आंदोलन उग्र होता जा रहा है. ‘छत्तीसगढ़ जुझारु आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ’ के नेतृत्व में जिले की करीब 2,200 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरी. इस विरोध को और भी खास बना दिया उनका व्यंग्यात्मक तरीका- वे “मुसवा (चूहा) हो गए बदनाम” गाना गाकर 19 करोड़ रुपये के धान घोटाले पर सरकार को घेरा.
इस आंदोलन की अगुवाई कर रही संघ की जिलाध्यक्ष रेवती वत्सल ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि “सरकार हमसे आंगनवाड़ी के मुख्य काम के साथ-साथ अन्य विभागों के अतिरिक्त काम, जैसे कि ‘SIR’ (सर्वे और अन्य सरकारी काम) भी थोप देती है. हम दिन-रात काम कर त्रस्त हो चुके हैं. लेकिन सरकार हमें महज 5 से 10 हजार रुपये का मानदेय देकर बंधुआ मजदूरों जैसा व्यवहार कर रही है.”
वहीं एक अन्य कार्यकर्ता सुशीला थामले ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि कम वेतन में परिवार चलाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है. उन्होंने कहा, “हममें से कई कार्यकर्ता विधवा हैं और परिवार की पूरी जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है. इतने कम पैसों में न बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल पा रही है और न ही भविष्य सुरक्षित है. हम बस सम्मानजनक जीवन और भविष्य की सुरक्षा चाहते हैं.”
उनकी मुख्य मांगें ये हैं:
शासकीय कर्मचारी का दर्जा: उन्हें शिक्षा और पंचायत कर्मियों की तरह सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए.
सामाजिक सुरक्षा: रिटायरमेंट के बाद सम्मानजनक जीवन के लिए मासिक पेंशन, बीमा और ग्रेच्युटी की सुविधा मिले.
उचित मानदेय: मध्यप्रदेश की तर्ज पर सुविधाएं मिलें और हर साल 1,000 रुपये मानदेय बढ़ाने का समझौता लागू हो.
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि अगर सरकार उनकी तीन सूत्रीय मांगों पर ठोस पहल नहीं करती है तो वे इसे ‘अनिश्चितकालीन आंदोलन’ में बदल देंगी. फिलहाल गांधी मैदान में जमा ये महिलाएं सरकार के जवाब का इंतजार कर रही हैं.
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बजट में मोदी सरकार एवं राज्य की विष्णुदेव साय सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका के साथ किया छल!
महासमुंद : आइसीडीएस के स्थापना को हुये पच्चास वर्ष इन लम्बे अतराल से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओ को केन्द्र सरकार द्वारा सहायिका को महज ही रू 2250 और कार्यकर्ता को रू 4500 ही मानदेय दिया जा रहा. इसके अलावा केन्द्र सरकार से ना कोई पेशन है, ना ग्रेज्युवेटी, ना समूह बीमा, बेटी या बेटा की शादी हो, खुद की लम्बी बिमारी हो या फिर परिवार के किसी सदस्य बीमार हो और अगर उसका देखभाल करनी है तो कोई अवकाश सुविधा नही. मानदेय कटवाकर पारिवारिक दायित्वो का निर्वहन किया जाता है.
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओ की नियुक्ति आंगनबाड़ी केन्द्रो और महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यो के सम्पादन के लिये किया जाता है. लेकिन वर्तमान मे हमसे शासन के लगभग सभी विभागो का काम लिया जाता है. सभाओ मे भीड़ बढ़ाने के लिये भी बुलाया जाता है. काम के बोझ और अफसरो के गुलामी भरी जिन्दगी से त्रस्त होकर छत्तीसगढ़ के एक लाख से भी ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाये एक बार फिर से लाम बंद होकर सड़क पर उतरने की तैय्यारी कर ली गई हैआइसीडीएस के स्थापना को हुये पच्चास वर्ष इन लम्बे अतराल से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओ को केन्द्र सरकार द्वारा सहायिका को महज ही रू 2250 और कार्यकर्ता को रू 4500 ही मानदेय दिया जा रहा .इसके अलावा केन्द्र सरकार से ना कोई पेशन.है ना ग्रेज्युवेटी.ना समूह बीमा.बेटी या बेटा की शादी हो. खुद की लम्बी बिमारी हो या फिर परिवार के किसी सदस्य बीमार हो और अगर उसका देखभाल करनी है तो कोई अवकाश सुविधा नही. मानदेय कटवाकर पारिवारिक दायित्वो का निर्वहन किया जाता है.
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओ की नियुक्ति आंगनबाड़ी केन्द्रो और महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यो के सम्पादन के लिये किया जाता है. लेकिन वर्तमान मे हमसे शासन के तकरीबन सभी विभागो का काम लिया जाता है. सभाओ मे भीड़ बढ़ाने के लिये भी बुलाया जाता है. काम के बोझ और अफसरो के गुलामी भरी जिन्दगी से त्रस्त होकर छत्तीसगढ़ के एक लाख से भी ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाये एक बार फिर से लाम बंद होकर सड़क पर उतरने की तैय्यारी कर ली गई है. राज्य सरकार का 24 फरवरी 2026 का बजट से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका आशान्वित थी कि सरकार आर्थिक स्थिति को देखते हुए मानदेय में बढ़ोतरी करेगी. लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी हमको निराशा मिली है.
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओ के विभिन्न संगठनो का संयुक्त मंच के पदाधिकारियो का कहना है कि जब हमसे काम लेना रहता है तो शासकीय कर्मचारियो से ज्यादा जिम्मेदार हमको सरकार मानती है. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को मुफ्त का एक बहुद्देशिय कार्यकर्ता बना दिया गया है. निवेदन यंत्रण भी हमारे ऊपर सभी विभागो के कार्य को भी थोप दिया जाता है. हम भी इंसान है. एक समय मे कितना काम करें जिसका काम नही होता है वही आंख दिखाता है और कार्यवाही की अनुसंशा कर देता है. हमारे विभागीय अधिकारी भी हमे सपोट नही करते.बात बात मे मानदेय काटना.नौकरी से निकालने की धमकिया दी जाती है. और इन सबकी आवाज उठाई जाती है तो सिधे नौकरी से हटाने की कार्यवाही किया जाता है.
2023 मे अपने हक और अधिकार के लिये संघर्ष का नेतृत्व करने वाले संघ पदाधिकारी प्रान्तीय सचिव सुमन यादव आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को गलत और कुटरचित आरोप लगाकर एकतरफा कार्यवाही करते हुये सेवा से अलग किया गया है और आज उसे दो साल से भी ज्यादा हो गया अपील मे भी इंसाफ मिला है .इसी तरह एक साल पहले सं पदाधिकारी कल्पना चंद को भी सेवा से बर्खास्त किया गया है. मामला अपील मे है लेकिन सुनुवाई पेंडिंग है.
इन्ही सभी बातो के कारण प्रदेश के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओ मे काफी आक्रोश ब्याप्त है. आगामी आंदोलन के बारे में संबंधित अधिकारियों एवं सरकार को भी 12/2/2026 को अवगत कराया जा चुका है..समय रहते मांगे पूरी नही होने पर संयुक्त मंच द्वारा दो चरण मे संघर्ष का शंख नाद कर रही है.
प्रथम चरण मे 26 एवं 27 को सभी 33 जिला मुख्यालयो में कामबंद हड़ताल धरना रैली प्रदर्शन कर कलेक्टर के जरिए मान.प्रधान मंत्री जी और मान.मुख्यमंत्री जी के नाम ज्ञापन सौपा जायेगा. इसके बाद भी म़ागे पूरी नही हुई तो 9 मार्च को राजधानी रायपुर मे विशाल प्रान्तीय धरना रैली और विधान सभा का घेराव करने का फैसला लिया गया है.
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