छत्तीसगढ़ में बीजेपी नेता ने की पत्रकार से मारपीट, पत्रकारों के आक्रोश बाद तीन आरोपियों पर FIR दर्ज, प्रदेश स्तरीय आंदोलन की चेतावनी
BJP leader assaults journalist in Chhattisgarh; FIR filed against three accused after journalists' outrage, warning of state-level agitation
अंबिकापुर : अंबिकापुर जिले में न्यूज़ कवरेज के दौरान एक पत्रकार के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। निजी चैनल के पत्रकार सुशील बखला जब अवैध निर्माण को लेकर संचालित लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल का विरोध स्थानीय लोगों के द्वारा किया जा रहा था. जिसका कवरेज कर रहे थे. तभी यह विवाद बढ़ गया. हॉस्पिटल प्रबंधन और स्थानीय नागरिकों के बीच पहले से तनाव की स्थिति बनी हुई थी. इसी दौरान कवरेज कर रहे पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की घटना हो गई. घटना के बाद कोतवाली थाने में देर शाम तक गहमा-गहमी का माहौल बना रहा. मामले में पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. वहीं स्थानीय नागरिक अवैध बिल्डिंग में संचालित हॉस्पिटल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है. फिलहाल मारपीट के आरोपीयो की गिरफ्तारी नहीं हुई है.
आरोप है कि निगम और बिजली विभाग द्वारा की जा रही कार्यवाही के दौरान सुरक्षा मद्देनजर पुलिस बल भी तैनात था. उसके बाद भी पुलिस की मौजूदगी में आरोपियों ने पत्रकार के साथ मारपीट की और पूरे मामले में पुलिस मूकदर्शक बन तमाशा देखती रही. मारपीट की घटना का वीडियो भी समाचार कवरेज करने आए पत्रकार साथियों ने अपने मोबाइल में कैद भी किया है. जिसके आरोपी बेखौफ होकर मारपीट करते नजर भी आ रहे है.
बताया जा रहा है कि शहर स्थित लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल का संचालन कमर्शियल अनुमति के आधार पर किया जा रहा था. लेकिन भवन निर्माण अनुमति से अधिक निर्माण किए जाने की शिकायत पर नगर निगम द्वारा कार्रवाई की जा रही थी. इसी कार्रवाई को कवर करने पत्रकार सुशील बखला मौके पर पहुंचे थे. बताया जा रहा है कि हॉस्पिटल परिसर में ट्रांसफार्मर लगाए जाने को लेकर अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय नागरिकों के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी. इसी दौरान विवाद बढ़ा और कवरेज कर रहे पत्रकार के साथ कुछ लोगों ने जमकर मारपीट कर दी. घटना उस समय हुई जब मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात था.
घटना के बाद पत्रकार संगठनों में नाराजगी फैल गई और पत्रकार समूह कार्रवाई की मांग को लेकर कोतवाली थाने के बाहर धरने पर बैठ गए. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है.
कोतवाली थाना पुलिस के अनुसार, पत्रकार सुशील बखला के साथ हुई मारपीट की घटना को लेकर आरोपियों की पहचान कर केस दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है. घटना के बाद देर शाम तक थाने में गहमागहमी का माहौल बना रहा. पत्रकार संगठनों ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. वहीं प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
मामले में गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज होने के बावजूद अब तक गिरफ्तारी नहीं होने से पत्रकार संगठनों और सामाजिक संगठनों में रोष है. पत्रकार प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र गिरफ्तारी नहीं हुई, तो प्रदेश स्तर पर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा. इसमें धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और व्यापक विरोध कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं.
बड़ा सवाल?
छत्तीसगढ़ के इस आदिवासी अंचल में हुई यह घटना केवल स्थानीय विवाद नहीं है। यह उस व्यापक प्रश्न की याद दिलाती है. क्या कानून सर्वोपरि है, या सत्ता की छाया में उसकी परिभाषा बदलने लगी है?
अगर सार्वजनिक स्थान पर पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक की सुरक्षा का प्रश्न और भी बड़ा हो जाता है। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि असहमति, सवाल और रिकॉर्डिंग से डर न हो—बल्कि उन्हें जवाबदेही के अवसर के रूप में देखा जाए। अब निगाहें प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.
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