सुशासन तिहार पोर्टल से किसान के जमीन से जुड़े विवाद का आवेदन गायब, राजस्व व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल, कलेक्टर से जांच की मांग
Application regarding a farmer's land dispute goes missing from the 'Sushasan Tihar' portal; serious questions raised about the revenue administration; demand made to the Collector for an inquiry.
धमतरी : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के ग्राम कण्डेल निवासी 72 साल के रामप्रसाद साहू ने अपनी पैतृक जमीन से जुड़े विवाद और सुशासन तिहार के तहत दिए गए आवेदन की ऑनलाइन स्थिति पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं होने को लेकर जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है. उन्होंने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली, सीमांकन में हुई देरी और विरोधाभासी आदेशों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
आवेदन क्रमांक की स्थिति पोर्टल पर नहीं दिखने का आरोप
रामप्रसाद साहू के अनुसार उन्होंने 21 मई 2026 को सुशासन तिहार के अंतर्गत आवेदन क्रमांक 26144705900050 प्रस्तुत किया था. उनका कहना है कि पोर्टल पर इस आवेदन की स्थिति दिखाई नहीं दे रही है. जबकि इसके आसपास के अन्य आवेदन क्रमांकों की जानकारी सामान्य रूप से उपलब्ध है. उन्होंने आशंका जताई कि आवेदन की प्रविष्टि, पंजीयन अथवा रिकॉर्ड संधारण में किसी तरह की त्रुटि या अनियमितता हुई हो सकती है. इसी वजह से उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है.
खसरा नंबर 1332 की भूमि को लेकर विवाद
शिकायतकर्ता ने बताया कि मामला ग्राम कण्डेल स्थित उनकी भूमि खसरा नंबर 1332 से जुड़ा हुआ है. जिसमें उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है. उन्होंने कहा कि जमीन पर विवाद होने के बाद उन्होंने दिसंबर 2025 में स्थगन आदेश और सीमांकन के लिए आवेदन दिया था. उनका आरोप है कि आवेदन के बावजूद लंबे समय तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई. जिससे विवाद लगातार बढ़ता गया.
सीमांकन के लिए पहुंची टीम, लेकिन नहीं हो सकी कार्रवाई
रामप्रसाद साहू के मुताबिक 30 जनवरी 2026 को राजस्व अमला मौके पर पहुंचा था. लेकिन जमीन पर झाड़ियां और पेड़ होने का हवाला देकर सीमांकन किए बिना वापस लौट गया. इसके बाद कई महीनों तक सीमांकन की प्रक्रिया लंबित रही. शिकायतकर्ता का कहना है कि समय पर सीमांकन हो जाता तो विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता था.
आदेशों में विरोधाभास का आरोप
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि 30 मार्च 2026 को जारी स्थगन आदेश में संबंधित जमीन को आवेदक के स्वामित्व की बताया गया था. लेकिन 16 अप्रैल 2026 को बिना सीमांकन और पर्याप्त सुनवाई के उक्त आदेश खत्म कर दिया गया. रामप्रसाद साहू का आरोप है कि बाद के आदेश में उन्हें भूमि स्वामी प्रमाणित नहीं पाया जाना दर्ज किया गया. जो पूर्व आदेश और उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के खिलाफ है. उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक विसंगति बताया है.
निर्माण कार्य जारी रहने पर जताई आपत्ति
शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रशासनिक विलंब और कार्रवाई में देरी की वजह से विवादित जमीन पर निर्माण कार्य लगातार जारी रहा. उन्होंने आरोप लगाया कि अब वहां छत ढलाई तक का काम पूरा हो चुका है. उनका मानना है कि अगर समय रहते सीमांकन और स्थगन आदेश का प्रभावी पालन कराया जाता तो निर्माण को रोका जा सकता था.
कलेक्टर से की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
रामप्रसाद साहू ने कलेक्टर से पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा करने, विवादित जमीन का निष्पक्ष सीमांकन कराने और निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की भी मांग की है. उनका कहना है कि वे कई महीनों सेइंसाफ की उम्मीद में कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं और अब जिला प्रशासन के हस्तक्षेप की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
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