मनरेगा मजदूरी में भ्रष्टाचार, हितग्राहियों के मेहनत की रकम दूसरों के अकाउंट में किये गए ट्रांसफर, ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई इंसाफ की गुहार

Corruption in MNREGA wages, beneficiaries' hard-earned money transferred to other people's accounts; villagers appeal to the Collector for justice.

मनरेगा मजदूरी में भ्रष्टाचार, हितग्राहियों के मेहनत की रकम दूसरों के अकाउंट में किये गए ट्रांसफर, ग्रामीणों ने कलेक्टर से लगाई इंसाफ की गुहार

बिलासपुर/मस्तूरी : बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भिलाई से प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत मजदूरी भुगतान में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. इस बारे में कई हितग्राहियों द्वारा जिला कलेक्टर बिलासपुर को लिखित शिकायतें सौंपकर त्वरित जांच और कार्रवाई की मांग की गई है.
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि योजना के तहत स्वीकृत आवासों की मजदूरी राशि उन्हें न मिलकर अन्य व्यक्तियों के खातों में डाल दी गई. जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ है. शिकायत के मुताबिक ग्राम मिलाई के कई लाभार्थियों के प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए थे. इनमें समारू मानिकपुरी, जयन्ती लाल निर्मलकर, आशा देवांगन, प्रीतम लाल निर्मलकर सहित अन्य हितग्राही शामिल हैं. हितग्राहियों ने बताया कि उनके आवास निर्माण की विभिन्न किस्तों की राशि तो जारी हुई. लेकिन मनरेगा के तहत मिलने वाली मजदूरी की रकम रोजगार सहायक द्वारा कथित रुप से अन्य व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई. हर हितग्राही को करीब 23,490 रुपये मजदूरी मिलनी थी. जो आज तक नहीं मिली है.
आरोप है कि यह राशि गांव के ही अन्य लोगों जैसे योगेश, अन्नपूर्णा, गणेश बाई, माधव कुमार, भगवती सहित कई नामों के खातों में डाली गई. जिनका संबंधित आवास से कोई लेना-देना नहीं है. इसकी  वजह से कई हितग्राहियों का आवास निर्माण कार्य बाधित हो गया है और आर्थिक संकट की स्थिति बन गई है. शिकायतकर्ताओं ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार मौखिक शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ. जिसके बाद उन्हें जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाना पड़ा. ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मांग किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए. दोषी रोजगार सहायक और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा जिन हितग्राहियों की मजदूरी राशि गलत तरीके से अन्य खातों में डाली गई है. उन्हें फौरन उनकी बकाया मजदूरी का भुगतान कराया जाए. साथ ही भविष्य में इस तरह की अनियमितता न हो, इसके लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की भी मांग की गई है.
पीड़ित हितग्राहियों ने इस दौरान बताया कि इस भ्रष्टाचार में रोजगार सहायक की भूमिका मुख्य है. जिसके द्वारा ही उनकी मजदूरी की राशि अपने लोगों के बैंक खातों में डलवाई गई है. जिसमें कई हितग्राहियों की रकम मिलाकर लाखों का भ्रष्टाचार किया गया है. जिसकी जांच कर कड़ी कार्रवाई दोषियों पर होनी चाहिए.
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