डेढ़ साल में चौथी बार बढ़े बिजली के दाम, गरीबों पर बढ़ा बिल का बोझ, डिजिटल मीटर ग्रामीणों के लिए बनी मुसीबत, होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन
Electricity prices increased for the fourth time in one and a half years, the burden of bills increased on the poor, digital meters became a problem for the villagers, there will be a state-wide movement
बिलासपुर : डिजिटल तकनीक जहां एक तरफ सुविधाओं को बढ़ाने का दावा करती है. वहीं दूसरी तरफ इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं. खासकर ग्रामीण इलाकों में हाल ही में गांव से यह शिकायतें आ रही हैं कि डिजिटल बिजली मीटरों के कारण ग्रामीणों को तरह-तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. जिसमें सबसे बड़ी परेशानी बढ़ते बिल की है.
बता दें कि मल्हार के ग्रामीणों के लिए डिजिटल बिजली मीटर ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन चुका है. सभी ग्रामीणों के घरों में डिजिटल बिजली मीटर लगे होने के कारण बिजली बिल हजारों में आने लगा है. ग्रामीणों का कहना है कि पहले बिजली बिल 500 तक आता था. लेकिन जब से डिजिटल बिजली मीटर लगा है. तब से बिजली बिल 5 से 8 हज़ार तक में आने लगा है. जिससे ग्रामीण परेशान है. इस समस्या को लेकर ग्रामीण जनदर्शन में पहुंचे. जहां उन्हें ने अपने समस्याएं रखी. साथ ही मांग किया कि डिजिटल बिजली मीटर को हटाया जाए और एकल बत्ती लगाने लगाया जाए है.
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महासमुंद : छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार द्वारा बिजली दरों में लगातार की जा रही बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया. जिला कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. रश्मि चंद्राकर ने प्रेस वार्ता में कहा कि साय सरकार ने डेढ़ साल के भीतर चौथी बार बिजली की कीमतें बढ़ाकर जनता की जेब पर सीधा हमला किया. कांग्रेस अब इस फैसले के खिलाफ प्रदेशभर में ज़िला और ब्लॉक स्तर पर आंदोलन करेगी.
डॉ. रश्मि ने बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं पर 10 से 20 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है. गैर-घरेलू खपत पर 25 पैसे प्रति यूनिट का इजाफा किया गया है. कृषि पंपों पर सर्वाधिक 50 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाकर किसानों की कमर तोड़ दी गई है.
???? किसान पहले से ही परेशान, अब बिजली भी महंगी
डॉ. रश्मि का कहना है कि छत्तीसगढ़ के किसान पहले ही खाद, बीज और बिजली कटौती जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, अब कृषि पंपों की बिजली दरों में बढ़ोतरी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.
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डॉ. रश्मि ने सरकार की तुलना करते हुए बताया:
| वर्ष | बिजली दर (₹ प्रति यूनिट) | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 2003 | ₹3.30 | रमन सरकार की शुरुआत |
| 2017-18 | ₹6.40 | कुल वृद्धि ₹3.10 (94%) |
| 2018-19 | ₹6.20 | चुनावी वर्ष में थोड़ी राहत |
| 2023 | ₹6.22 | कांग्रेस सरकार में सिर्फ ₹0.02 की वृद्धि (0.32%) |
| 2024 | ₹7.02 | साय सरकार में अब तक ₹0.80 की वृद्धि (13%) |
???? बिजली के निजीकरण की तैयारी?
डॉ. रश्मि ने आरोप लगाया कि सरकार स्मार्ट मीटर और अडानी की कंपनी के प्रीपेड मीटर के जरिए उपभोक्ताओं से ज्यादा बिल वसूलने की योजना पर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि राज्य में बिजली की अघोषित कटौती रोज़मर्रा की बात बन चुकी है. लेकिन फिर भी दाम लगातार बढ़ाए जा रहे हैं.
???? सरकारी विभागों का बकाया, आम जनता से वसूली?
डॉ. रश्मि का आरोप है कि सरकार बड़े अधिकारियों, मंत्रियों और सरकारी उपक्रमों के बकाया बिजली बिल वसूल नहीं कर रही. लेकिन आम जनता से वसूली कर रही है. लाइन लॉस और बिजली चोरी का भार भी आम लोगों पर डाला जा रहा है.
???? पूरे प्रदेश में होगा कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
डॉ. रश्मि ने बताया कि कांग्रेस पार्टी महासमुंद जिले के हर ब्लॉक और शहर में आंदोलन चलाएगी. इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों में जिम्मेदारियों का वितरण कर दिया गया है.
???? आंदोलन प्रभारी सूची (चयनित):
महासमुंद शहर: अध्यक्ष – खिलावन बघेल | प्रभारी – अमृत पटेल
झलप-पटेवा: अध्यक्ष – श्खिलावन साहू | प्रभारी – अनंत वर्मा
बागबाहरा ग्रामीण: अध्यक्ष – रवि निषाद | प्रभारी – गौरव चंद्राकर
बसना: अध्यक्ष – श्री विजय साहू | प्रभारी – फिरोज मेमन
सरायपाली शहर: अध्यक्ष – आर.एन. आदित्य | प्रभारी – श्कश यादव
छुईपाली: अध्यक्ष – बलराम भोई | प्रभारी – नरेन्द्र सेन
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छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में लगातार हो रही वृद्धि को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला. बलौदाबाजार जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि “साय सरकार जनता को लगातार आर्थिक बोझ तले दबा रही है. पिछले डेढ़ साल में चौथी बार बिजली दरों में इजाफा कर जनता की जेब काटी गई है.”
???? किसान पहले ही संकट में, अब बिजली से और बढ़ेगी मुसीबत
सुरेंद्र शर्मा ने कहा, “खाद, बीज और बिजली कटौती जैसी समस्याओं से जूझ रहे किसानों पर अब बिजली बिल का नया बोझ डाल दिया गया है. घरेलू बिजली दर में 10 से 20 पैसे, गैर-घरेलू में 25 पैसे और कृषि पंपों पर 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है.”
???? बिजली व्यवस्था बन चुकी है ‘मुनाफा मशीन’
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार ने बिजली को लाभ कमाने का जरिया बना दिया है. उन्होंने बताया कि 2003 में बिजली दर ₹3.30 प्रति यूनिट थी. 2018 तक यह दर ₹6.40 प्रति यूनिट हो गई. चुनाव से ठीक पहले केवल 20 पैसे की कटौती दिखावे के लिए की गई.
इसके उलट भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में सिर्फ 2 पैसे प्रति यूनिट की मामूली वृद्धि हुई, जो अब तक की सबसे कम है.
???? कांग्रेस का अल्टीमेटम: सड़क पर उतरेगी जनता की लड़ाई लड़ने
सुरेंद्र शर्मा ने कहा, “अगर भाजपा सरकार ने बिजली दरों की वृद्धि वापस नहीं ली. तो कांग्रेस पूरे छत्तीसगढ़ में चरणबद्ध आंदोलन करेगी. हम सड़कों पर उतरकर आमजन और किसानों की लड़ाई लड़ेंगे.”
इस दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे, जिनमें जिला अध्यक्ष सुमित्रा ध्रुतलहरे, विद्याभूषण शुक्ला और अन्य पदाधिकारी शामिल रहे. बिजली दरों को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में गर्मी बढ़ गई है. कांग्रेस के तेवर और भाजपा की नीतियों के बीच आम जनता फिर से महंगाई के सवालों पर उलझती दिख रही है. अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है.
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बिलासपुर : प्रदेश में बिजली दरों में वृद्धि को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. शहर जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष विजय केसरवानी अध्यक्ष विजय पांडेय ने बुधवार को जिला कांग्रेस कार्यालय में संयुक्त प्रेस वार्ता कर 18 जुलाई को तिफरा स्थित बिजली कार्यालय घेराव का ऐलान किया.
दोनो नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की बिजली नीति आम जनता, किसानों और छोटे उपभोक्ताओं के खिलाफ है. बिजली की दरों में बेतहाशा वृद्धि कर सरकार ने छत्तीसगढ़ की जनता की जेब पर सीधा प्रहार किया है.
दरों में भारी वृद्धि, जनता बेहाल
जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष विजय केशवानी ने बताया कि प्रदेश सरकार ने बिजली दर में वृद्धि कर एक बार फिर जनता के साथ विश्वासघात किया है. घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 10 से 20 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि किया गया है. गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 25 पैसे प्रति यूनिटबढ़ाया गया है. कृषि पंपों के लिए सर्वाधिक 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि हुई है.
रमन सरकार बनाम कांग्रेस सरकार: आंकड़ों की जंग
विजय केशरवानी ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 2003 में बिजली 1.30 प्रति यूनिट थी, जिसे रमन सिंह की सरकार ने 2018 तक बढ़ाकर 6.40 कर दिया. वहीं कांग्रेस सरकार 2018–2023 के कार्यकाल में मात्र 2 पैसे प्रति यूनिट की औसत वृद्धि हुई थी.
उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार ने ‘बिजली बिल हाफ’ योजना के तहत 65 लाख उपभोक्ताओं को 3,214 करोड़ की सब्सिडी दी थी. किसानों को 5 हॉर्स पावर तक मुफ्त बिजली, बीपीएल उपभोक्ताओं को 40 यूनिट तक राहत, और अस्पतालों एवं उद्योगों को सब्सिडाइज्ड दर पर बिजली प्रदान की गई थी.
भ्रष्टाचार, चोरी और राजनीतिक संरक्षण
कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिजली कटौती व्यापक स्तर पर हो रही है. सरकारी विभागों के करोड़ों रुपये के बिजली बिल बकाया हैं. सत्ता के संरक्षण में बिजली चोरी और लाइन लॉस बढ़े हैं. जनता से अनाप-शनाप बिल वसूले जा रहे हैं. स्मार्ट मीटर के नाम पर अत्यधिक बिल भेजे जा रहे हैं. अब अडानी की कंपनी के प्रीपेड मीटर लगाए जाने की योजना है. जिससे जनता को और अधिक आर्थिक बोझ झेलना पड़ेगा.
बढ़ती लागत के पीछे केंद्र की नीतियां जिम्मेदार
जिला कांग्रेस शहर अध्यक्ष विजय पांडे ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण बिजली उत्पादन महंगा हो गया है. कोयले पर ग्रीन टैक्स चार गुना बढ़ा दिया गया है। , रेलवे माल भाड़ा अधिक वसूला जा रहा है. थर्मल प्लांटों को अडानी से महंगे दाम पर कोयला खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है. डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क यानि सेंट्रल एक्साइज बढ़ने से परिवहन लागत में भारी इजाफा हुआ है.
18 जुलाई को होगा जोरदार विरोध प्रदर्शन
दोनों अध्यक्षों ने बताया कि कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर 18 जुलाई को तिफरा स्थित बिजली कार्यालय का घेराव किया जाएगा. इस दौरान मांग करेंगे कि बढ़ी हुई बिजली दरें तत्काल वापस ली जाएं. अनियमित और मनमाने बिलों की जांच हो. बिजली कटौती पर नियंत्रण लगाया जाए. स्मार्ट और प्रीपेड मीटर लगाने की योजना वापस हो.
कांग्रेस नेताओं का सवाल:
“जब कोयला, पानी और ज़मीन हमारी है, तो हमें ही क्यों महंगी बिजली बेची जा रही है?”
दोनों नेताओं ने चेतावनी दी हैं अगर सरकार ने बिजली दरों में बढ़ोतरी वापस नहीं लिया, तो कांग्रेस जन आंदोलन को और व्यापक रुप देगी.
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