सरपंच, सचिव और रोजगार सहायकके खिलाफ लगा फर्जी बिल लगा लाखों रुपए की बंदरबाट का आरोप, कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत करने पहुंचे ग्रामीण
Fake bill filed against Sarpanch Secretary and Employment Assistant Allegation of embezzlement worth lakhs of rupees Villagers came to Collector Jandarshan to complain
गरियाबंद/देवभोग : भ्रष्टाचार को लेकर सरकार सख्त रुख अख्तियार किया हुआ हैं। इधर सरकारी नुमाइंदे और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से लगातार भ्रष्टाचार की खबर एवं शिकायत करने के बावजूद भी स्थानीय अधिकारियों इन पर कार्यवाही न करना सवालों के घेरे में आ गया है.
देवभोग विकासखंड के धौराकोट ग्राम पंचायत में सरपंच सचिव की मिलीभगत से लाखों का लूट मची हुई है. ऐसा आरोप शिकायतकर्ताओं ने एसडीएम, कलेक्टर को दिए लिखित आवेदन दिया है. लेकिन स्थानीय अधिकारियों को शिकायत करने के बावजूद भी कार्यवाही नहीं होती देख शिकायतकर्ताओं ने अब कलेक्टर दीपक अग्रवाल का दरवाजा खटखटाया.
आवेदकों ने ग्राम पंचायत धौराकोट सरपंच ओंकारलाल सिन्हा और सचिव वरुण मांझी एवं रोजगार सहायक तुलाराम नागेश के खिलाफ अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सरपंच खुद के परिवार के फार्म शिवम नागेश के नाम से कई फर्जी बिल लगाकर इन तीनों ने सरकारी राशि का दुरुपयोग किया है और खुद को फायदा पहुँचाया है. रोजगार सहायक ने उपसरपंच ऊवासु नागेश पिता अभिमन्यु नागेश के नाम से मनरेगा योजना के अंतर्गत कई कार्यों में 72 दिवस का रोजी चढ़ाया है. जिसका जॉब कार्ड नं. 426 है. और गांव के ही अन्य हितग्राहीयों के नाम से फर्जी मास्टर रोल बनाकर पेश किया गया है. जिनका जॉब कार्ड नं. 416, 366, 94, 538, 161, 299, 399, 406, 215, 433 है.
शिकायतकर्ताओ का आरोप है कि सरकारी रकम का दुरुपयोग कर अपने निजी लोगों को फायदा पहुंचाया गया है. जो कि जांच का विषय है. पंचायत राज अधिनियम कि धारा 40 के अंतर्गत कोई भी जनप्रतिनिधि खुद या अपने परिवार के सदस्यो को फायदा नहीं पहुंचा सकता लेकिन यहां मामला कुछ अलग नजर आ रहा है.
सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक ने अपने पद का दुरुपयोग कर अपने ही घरेलू लोगों को लगातार अपने कार्यकाल में फायदा देते आ रहे हैं. और मिलीभगत कर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है. मामले की बारीकी से जांच किया जाए तो वर्ष 2015 से अब तक शिवम ट्रेडर्स के नाम से करोड़ो रुपये का लेनदेन किया गया है. शिकायतकर्ताओं ने जिलाधीश दीपक अग्रवाल से मांग किया कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के अंतर्गत कार्यवाही करते हुए सरपंच को तत्काल पद से बर्खास्त करने और सचिव एवं रोजगार सहायक पर उचित कार्यवाही करने की मांग की.
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अम्बिकापुर/सीतापुर: सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत सोनतराई में 15वें वित्त योजना के तहत आवंटित लाखों रुपये का सरपंच और सचिव द्वारा गबन करने का मामला सामने आया है. इस वित्तीय अनियमितता के खिलाफ ग्राम पंचायत के उपसरपंच नरेश बघेल और अन्य पंचों ने मोर्चा खोलते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा. जिसमें उन्होंने आय-व्यय की विस्तृत जांच की मांग की.
ज्ञापन में उपसरपंच और पंचों ने आरोप लगाया है कि सरपंच ने सुनियोजित तरीके से अपने पति को गोठान समिति का अध्यक्ष बनाकर बिना किसी काम को अंजाम दिए फर्जी बिल और दस्तावेजों के जरिये वित्तीय राशि का गबन किया है. उन्होंने सरकार से वर्ष 2021 से 2024 तक ग्राम पंचायत को आवंटित की गई राशि और कराए गए विकास कार्यों की जांच की मांग की है. ताकि भ्रष्टाचार का खुलासा हो सके.
सरपंच-सचिव द्वारा विकास राशि का दुरुपयोग
सरकार द्वारा ग्रामीण विकास के लिए आवंटित राशि का सही तरीके से उपयोग ना कर, सरपंच और सचिव ने गांव के विकास के लिए मिलने वाले लाखों रुपये का दुरुपयोग किया है. आरोप है कि सरपंच ने अपने पति को गोठान समिति का अध्यक्ष बना दिया. जिसके बाद बिना काम कराए ही फर्जी बिलों के माध्यम से राशि का गबन किया गया.
पंचों का कहना है कि यदि निष्पक्षता से 15वें वित्त योजना के अंतर्गत कराए गए कार्यों की जांच की जाए. तो बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है. ज्ञापन में विशेष रुप से 2021 से 2024 तक की राशि और उससे किए गए कार्यों की पूरी जांच की मांग की गई है.
सीईओ की जांच के बिना वापसी
जनदर्शन के माध्यम से शिकायत किए जाने के बाद सीईओ एस.के. मरकाम जांच के लिए ग्राम पंचायत सोनतराई पहुंचे, लेकिन सरपंच की गैरहाजिरी की वजह से जांच पूरी नहीं हो सकी. सरपंच अपने पारिवारिक सदस्य के इलाज के लिए बाहर गई हुई थी. और सभी जरूरी दस्तावेज उनके पास थे. जिसके चलते जांच को स्थगित करना पड़ा.
ज्ञापन सौंपने के दौरान उपसरपंच नरेश बघेल, पंच देवनारायण यादव, प्रभावती अनामिका, रामपाल, नागेंद्र कुमार और अन्य पंचगण उपस्थित थे। सभी ने इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि भ्रष्टाचारियों को सजा दी जा सके .और गांव का विकास सही तरीके से हो सके.
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