लालची भांजे रामकृष्ण पाण्डेय ने बुजुर्ग मामा-मामी हड़पी करोड़ों की संपत्ति, अंधेरे कमरे में रखा 6 महीने 25 दिनों तक बंद, अदालत से मिला इंसाफ
Greedy nephew Ramkrishna Pandey grabbed property worth crores from elderly uncle and aunt kept it locked in a dark room for 6 months and 25 days got justice from the court
बिलासपुर : बिलासपुर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. जहां एक बुजुर्ग दंपत्ति ने अपने भांजे को बेटे की तरह पाला-पोसा और उसे अपनी सारी संपत्ति सौंप दी. उन्हें उम्मीद थी कि वह बुढ़ापे का सहारा बनेगा. लेकिन भांजे ने उन्हीं बुजुर्ग मामा-मामी को घर से निकालकर दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर कर दिया.
मामा-मामी की करोड़ों की संपत्ति हड़पी.
बिलासपुर के कोनी थाना क्षेत्र के कंचन विहार निवासी 83 साल के सुरेश मणि तिवारी और उनकी 80 साल की पत्नी ललिता देवी की तीन बेटियां थीं. लेकिन बेटे की चाहत में उन्होंने अपनी सारी संपत्ति भांजे रामकृष्ण पाण्डेय के नाम कर दी. यह सोचकर कि भांजा बुढ़ापे में सहारा बनेगा. उन्होंने उसकी शादी से पहले ही सब कुछ उसे सौंप दिया. मगर कुछ ही महीनों में भांजे का असली चेहरा सामने आ गया.
अत्याचार और यातनाएं
संपत्ति नाम होते ही रामकृष्ण ने मामा-मामी के साथ दुर्व्यवहार शुरु कर दिया. उन्हें एक अंधेरे कमरे में 6 महीने 25 दिनों तक बंद रखा. जहां न तो पंखे की सुविधा थी और न ही बाथरुम की. इस दौरान बुजुर्ग दंपत्ति पर मानसिक और शारीरिक यातनाएं की गई. भांजे ने अपनी मामा की बेटियों के साथ भी मारपीट की. जिससे उनकी मझली बेटी राजनांदगांव चली गई और 14 साल से वापस नहीं आई. छोटी बेटी को धमकाकर अपने पास रखा और परिवार या आसपास के लोगों से मिलने पर पाबंदी लगा दी.
लालच का अंत नहीं
भांजे का लालच यहीं खत्म नहीं हुआ. उसने तिवारी परिवार की पांच कमरों की बड़ी हवेली, एक कार और दो मोटरसाइकिलें भी अपने नाम कर ली. यहां तक कि जब तिवारी की बड़ी बेटी, जो हाईकोर्ट में काम करती थी, उसका जब निधन हुआ. तो उसने उनके पेंशन की रकम पर भी कब्जा कर लिया. धीरे-धीरे भांजे ने कुल 30 लाख 19 हजार रुपये अपने नाम कर लिए.
यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि किस तरह अंधविश्वास और लालच का शिकार बनने से जीवन बर्बाद हो सकता है. इससे सबक मिलता है कि किसी तरह से किसी पर अंधा विश्वास नहीं करना चाहिए.
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न्याय की जीत: कानून का सहारा
इस भयावह स्थिति के बाद, बुजुर्ग दंपत्ति न्याय की गुहार लेकर अदालत पहुंचे. बिलासपुर जिला विधिक प्राधिकरण ने इस मामले को संज्ञान में लिया और पीएलव्ही (पैरा लीगल वालंटियर्स) हरीश कुमार बरगाह को जांच के लिए भेजा. जांच में सारे तथ्य सामने आए और अदालत ने बुजुर्ग दंपत्ति के पक्ष में फैसला सुनाया.
2007 में बनाए गए माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के भरण पोषण और कल्याण अधिनियम की धारा 23 के तहत, अदालत ने रामकृष्ण पाण्डेय को दान में दी गई संपत्ति की रजिस्ट्री को शून्य घोषित कर दिया. इसके परिणामस्वरूप, बुजुर्ग मामा-मामी को उनकी संपत्ति वापस मिली.



