गरियाबंद में रसूखदारों ने गरीब की जमीन पर दोबारा किया कब्जा, भूख हड़ताल पर बैठा परेशान पूरा नागेश परिवार, आखिरकार मिला आश्वासन
In Gariaband, influential people once again occupied the land of the poor, the entire Nagesh family went on hunger strike, finally got assurance
गरियाबंद : जिला कलेक्ट्रेट के सामने आज उस समय गहमा गहमी की हालत पैदा हो गई जब अमलीपदर तहसील क्षेत्र के ख़रीपथरा गांव का एक किसान रोते बिलखते परिवार सहित भूख हड़ताल पर बैठ गया. 7.50 एकड़ पुश्तैनी जमीन, जिस पर कब्जा भी हुआ, आदेश भी हुआ, और फिर… कब्जा फिर से हो गया. पिछले महीने 5 जून को प्रशासन ने खुद लिखित आदेश के साथ नागेश परिवार को उनकी जमीन लौटाई थी. लेकिन इंसाफ की ये डिलीवरी सिर्फ 15 दिन चली. जिससे परेशान होकर खरीपदरा के मुरहा नागेश, उनकी पत्नी और तीन मासूम बच्चे भूख हड़ताल पर बैठ
गए. करीब 12 घंटे की भूख, पसीना, और गर्मी के बाद आखिरकार शाम 8 बजे गरियाबंद प्रशासन ने लिखित आश्वासन दे दिया.
बताया जा रहा है कि ख़रीपथरा गांव का गरीब किसान मुरहा पिता रुपधर माली पिछले 35 साल से अपनी जमीन खसरा नम्बर 1/ 83 रकबा 2.833 हेक्टेयर पर काश्तकारी करते आ रहा था. बंदोबस्त के बाद उक्त जमीन पर मोतीराम पिता चमरू यादव और आलाराम पिता गंगाराम यादव का नाम दर्ज हो गया. जिसके बाद इन दोनों रसूखदारों ने मुरहा को काश्त कब्जा से बेदखल कर दिया.
जिसके बाद आवेदक मुरहा के द्वारा बंदोबस्त त्रुटि सुधार के लिये तहसील अमलीपदर के सामने आवेदन पेश किया गया. इस मामले में बयान में ग्रामीणों के द्वारा उक्त भूमि पर 35 साल से रुपधर का काश्त कब्जा होना बताया. ग्राम पंचायत द्वारा भी मुरहा पिता रुपधर के समर्थन में लिखित प्रस्ताव पारित किया गया.
न्यायालय तहसीलदार अमलीपदर द्वारा मोतीराम और आला राम यादव को उक्त भूमि से बेदखल कर बंदोबस्त पूर्व कब्जा काश्त के मुताबिक मुरहा पिता रुपधर का कब्जा काश्त यथावत रखने आदेश पारित किया गया. लेकिन मैनपुर अनुविभागीय अधिकारी द्वारा कुछ ही दिनों बाद स्टे आर्डर जारी कर दिया गया.
पीड़ित मुरहा और उसका परिवार पिछले चार साल से इस बंदोबस्त त्रुटि से परेशान है. अपनी जमीन पर काश्तकारी नही कर पा रहे हैं. उनकी आजीविका इसी जमीन पर किसानी से चल रही थी. अब आर्थिक हालत बहुत बिगड़ चुकी है.
अनावेदक गांव के रसूखदार बताये जा रहे हैं. पीड़ित परिवार राजस्व अधिकारियों पर पैसे के लेनदेन का आरोप लगा रहे हैं. सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से परेशान आज परिवार सहित अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल पर बैठ गये. और इंसाफ की मांग की.
इस मामले में मौके पर पहुंचे जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि गरीब किसान के साथ इंसाफ होना चाहिए. तहसीलदार द्वारा इनके पक्ष में आदेश जारी किया था. लेकिन पैसे के दम पर बाहुबलियों के द्वारा एसडीएम मैनपुर से स्थगन आदेश जारी करवा लिया गया. अब सुनने में आ रहा है कि मेंपुर एस डी एम् अपने ही आदेश को निरस्त कर रहे हैं. मैं इस मामले उचित जांच और इंसाफ की मांग करता हूँ.
तहसीलदार सुशील कुमार भोई ने कहा कि बंदोबस्त त्रुटि हुई है. जिसका सर्वे के द्वारा निदान किया जा सकता है. जो सर्वे टीम के गठन के बाद ही संभव है. मैंने इनके पक्ष में कब्जा दिलाने का आदेश जारी किया था. लेकिन अनावेदक अपील में चले गये और स्थगन ले आये. जिसके बाद अनावेदकों ने फिर से उक्त भूमि पर कब्जा कर लिया.
मुरहा नागेश जमीन कब्जा विवाद देवभोग एसडीएम तुलसीदास मरकाम ने कहा मुरहा नागेश को लिखित आश्वासन दिया कि 15 जुलाई को कब्जा दिलाया जाएगा. विपक्षी पर कार्रवाई होगी और त्रुटि सुधार को दो महीने मिलेंगे. गरियाबंद थाना प्रभारी ओपी यादव ने खुद सामने आकर मिठाई खिलाकर नागेश परिवार की भूख हड़ताल खत्म करवाई। वैसे सिस्टम भूख से नहीं, खबर से जागता है. ये अब हर आम आदमी जान गया है.
अब सवाल ये है कि प्रशासन का आदेश क्या सिर्फ ट्रायल वर्जन था? या गरियाबंद में कानून की वैधता की मियाद 15 दिन की होती है? काश, देश की न्याय व्यवस्था को भी भूख लगती. शायद तब वो हर गरीब को वक्त पर उसका हक़ देती. लेकिन यहां तो भूख, चेतावनी और मीडिया कवरेज के बाद ही तंत्र की नींद खुलती है.
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