ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर अधिवक्ता से लाखों की ठगी, इधर फर्जी RTO ई-चालान लिंक भेजकर 3.10 लाख की ठगी के भाजपा पार्षद बने शिकार

Lakhs of rupees were defrauded from an advocate in the name of online trading, while BJP councillor became a victim of a fraud of Rs 3.10 lakh by sending a fake RTO e-challan link

ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर अधिवक्ता से लाखों की ठगी, इधर फर्जी RTO ई-चालान लिंक भेजकर 3.10 लाख की ठगी के भाजपा पार्षद बने शिकार

ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लाखों की ठगी, फर्जी एप और नकली स्क्रीनशॉट का झांसा देकर अधिवक्ता से 25.50 लाख की धोखाधड़ी

बिलासपुर/सकरी : ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर अधिवक्ता से 25.50 लाख की ठगी. ये सुनकर किसी को भी हैरानी हो सकती है. वजह साफ है- जब कोई किसान, मजदूर या भोला-भाला आदमी लालच में आकर फर्जी स्कीम का शिकार बन जाए तो लोग कह देते हैं- ‘अरे बेचारों को क्या पता'. लेकिन जब खुद वकालत करने वाला, अदालत में तर्क-वितर्क करने वाला, दूसरों को ठगों से बचाने की सलाह देने वाला अधिवक्ता ही जाल में फंस जाए तो मामला वाकई दिलचस्प हो जाता है. न्यायधानी बिलासपुर में एक अधिवक्ता से ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 25.50 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. थाना सकरी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है.
मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी छत्रपाल पटेल ने खुद को ऑनलाइन ट्रेडिंग का विशेषज्ञ बताकर अधिवक्ता युगल पटेल को भारी मुनाफे का झांसा दिया और उन्हें अपने जाल में फंसा लिया. इसके बाद आरोपी ने फर्जी एप और नकली स्क्रीनशॉट के जरिए प्रार्थी को भरोसे में लिया.
17 अप्रैल से 15 अगस्त 2025 के बीच युगल पटेल ने अपनी मेहनत की कमाई में से 23.10 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए आरोपियों के खातों में भेजा. इसके अलावा 2.40 लाख रुपये नकद भी दिया. जब प्रार्थी ने पैसा वापस मांगने की कोशिश की. तो आरोपियों ने जवाब दिया कि यह पैसा “लॉकिंग पीरियड” में है और वह उसे नहीं निकाल सकते हैं.
जब युगल पटेल ने शक करते हुए मामले की जांच शुरु की तो सामने आया कि शेयर मार्केट में एक भी रुपया निवेश नहीं किया गया था और आरोपियों ने पूरी रकम को निजी उपयोग में खर्च कर दिया था.सकरी थाना पुलिस ने आरोपी छत्रपाल पटेल, उसकी मां गंगा पटेल, पिता मुरली मनोहर पटेल और भाई प्रकाश पटेल के खिलाफ धारा 3(5) BNS और 318(4) BNS के तहत केस दर्ज कर लिया है. और अब जांच जारी है.
सोचिए, जिस अधिवक्ता का पेशा ही है दूसरों के लिए न्याय मांगना, वही अब खुद न्याय की गुहार लगा रहा है. और ठगों की चतुराई भी देखिए- एक ही नहीं, चार-चार अकाउंट में पैसे बंटवाए, जैसे कोई इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन कर रहे हों. कहावत है- लालच बुरी बला है, लेकिन यहां तो लालच के साथ-साथ ‘ओवरकॉन्फिडेंस' भी जुड़ गया. शायद अधिवक्ता साहब को लगा होगा कि ठगी सिर्फ आम जनता के साथ होती है, उनके साथ नहीं. पर ठगों की नजर में कोई आम-खास नहीं होता. स्कैम का फॉर्मूला एक ही है- जहां लालच, वहां जाल. अब सवाल ये है कि जब कानून जानने वाले खुद ही ऐसे जाल में फंस जाएं तो आम आदमी को कौन चेताएगा? सरकार सोशल मीडिया से लेकर अखबारों तक जागरुकता अभियान चला रही है, मगर धोखेबाज़ उतनी ही तेज़ी से नए- नए आइडिया गढ़ रहे हैं. और लोग? लोग अब भी सोचते हैं- थोड़ा रिस्क लूंगा, बड़ा फायदा मिलेगा. मगर हकीकत यही है कि फायदे का वादा करने वाले अक्सर आपकी जेब ही हल्की कर जाते हैं.
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फर्जी आरटीओ ई-चालान लिंक भेजकर 3.10 लाख रुपए की ठगी, सब्जी व्यापारी भाजपा पार्षद बने शिकार

बिलासपुर : साइबर अपराधी लगातार नए-नए हथकंडे अपनाकर लोगों से ठगी कर रहे हैं. ऐसा ही एक ताजा मामला थाना सिटी कोतवाली क्षेत्र से सामने आया है. जहां बंधु मौर्य उम्र 62 साल सब्जी व्यापारी को फर्जी आरटीओ ई-चालान लिंक भेजकर 3.10 लाख की ठगी कर ली.
मिली जानकारी के मुताबिक प्रार्थी बंधु मौर्य दयालबंद मधुबन चौक के निवासी और वार्ड क्रमांक 36 के पार्षद भी हैं उन्होंने पुलिस को बताया कि 3 सितम्बर की शाम उनके व्हाट्सएप पर छत्तीसगढ़ पुलिस का मोनो लगा एक ई-चालान लिंक आया. चूंकि उनके ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में तीन गाड़ियां चलती हैं. उन्होंने इसे वास्तविक मानते हुए लिंक खोला. उसमें आधार, पैन, ड्राइविंग लाइसेंस और बैंक संबंधी जानकारी मांगी गई थी. चालान से संबंधित समझकर उन्होंने सभी जानकारी भर दी.
कुछ ही घंटों बाद उनके एचडीएफसी बैंक खाते से पहले 1 लाख विश्वनाथ गोपे नामक खाते में ट्रांसफर हुआ और अगले दिन 2 लाख PayZapp वॉलेट में भेज दिया गया. इतना ही नहीं, पंजाब नेशनल बैंक खाते से भी 5,000–5,000 कर 10,000 रुपये दो बार कट गए. कुल मिलाकर आरोपी ने 3.10 लाख की ठगी की.
घटना का अहसास होते ही मौर्य ने फौरन बैंक खाता ब्लॉक कराया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66(D) और BNS की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर किया और जांच कर रही है.
यह घटना एक बड़ा सबक है कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और कभी भी अपनी व्यक्तिगत जानकारी ऑनलाइन साझा न करें. साइबर अपराधी सरकारी मोनो और नाम का दुरुपयोग कर ठगी कर रहे हैं. ऐसे मामलों में फौरन बैंक और साइबर सेल को खबर करना जरुरी है.
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