चंदा विवाद पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने BJP-RSS पर लगाए गंभीर आरोप, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग, टिन्नू और मनीष को 39 घंटे की रिमांड

Political uproar over the donation controversy; Congress levels serious allegations against BJP-RSS and demands a Supreme Court-monitored probe; Tinnu and Manish remanded for 39 hours.

चंदा विवाद पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने BJP-RSS पर लगाए गंभीर आरोप, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग, टिन्नू और मनीष को 39 घंटे की रिमांड

गरियाबंद : छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार श्रीराम मंदिर अयोध्या में चढ़ावा चोरी और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर प्रदेश भर के जिला मुख्यालयों में जिला स्तरीय पत्रकार वार्ता आयोजित की गई.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा सभी जिला मुख्यालयों में पत्रकार वार्ता के लिए वरिष्ठ नेताओं की लिस्ट जारी की गई थी. इसी कड़ी में गरियाबंद जिले के प्रभारी के रूप में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती स्मृति ठाकुर को नियुक्त किया गया. जिन्होंने स्थानीय पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए इस पूरे मामले को करोड़ों रामभक्तों की आस्था और विश्वास से जुड़ा गंभीर विषय बताया.
श्रीमती स्मृति ठाकुर ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं. देश के गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई, गहने, बचत और अटूट श्रद्धा के साथ राम मंदिर निर्माण के लिए आगे आए थे. भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार के संगठनों ने सालों तक भगवान राम के नाम पर राजनीति करते हुए जनता से चंदा इकठ्ठा किया और इसी आंदोलन के आधार पर सत्ता तक पहुंचे.
उन्होंने आरोप लगाया कि आज वही करोड़ों रामभक्त यह पूछने को मजबूर हैं कि भगवान राम के नाम पर जुटाया गया चंदा और मंदिर में चढ़ाया गया चढ़ावा आखिर किसके संरक्षण में कथित रूप से गायब हुआ? यह सिर्फ आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भावनाओं के साथ धोखाधड़ी है.
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण के दौरान मिले चंदे को लेकर पहले भी सवाल उठे थे और अब मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है. पार्टी का कहना है कि देवद्रव्य की चोरी जैसे महापाप को संरक्षण देने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। कांग्रेस ने यह भी कहा कि ट्रस्ट के गठन और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था में केंद्र सरकार की भूमिका रही है. इसलिए नैतिक जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता.
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस ने तीन प्रमुख सवाल उठाए
1. जब ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ, तो इस कथित घोटाले की जवाबदेही कौन लेगा?
2. अगर सब कुछ सामान्य था, तो ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों हुए?
3. अगर कोई गड़बड़ी नहीं हुई, तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच से डर किस बात का है?
कांग्रेस ने दावा किया कि अब तक सामने आए तथ्यों के मुताबिक ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफे, बड़े आयोजनों में हुए खर्च, नकद चढ़ावे, कथित फर्जी रसीदों, लेखा-जोखा में अनियमितताओं तथा छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई लेकिन शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय न होने जैसे कई गंभीर प्रश्न सामने आए हैं. पार्टी का कहना है कि सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले की लीपापोती नहीं की जा सकती.
इस मौके पर कांग्रेस ने निम्नलिखित मांगें रखीं
* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे मामले पर देश के सामने जवाब दें.
* चंपत राय, अनिल मिश्रा तथा कथित रूप से शामिल सभी प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए.
* पूरे केस की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए.
* श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर धर्माचार्यों, प्रतिष्ठित नागरिकों, प्रशासनिक विशेषज्ञों एवं स्वतंत्र सदस्यों का नया पारदर्शी और जवाबदेह ट्रस्ट गठित किया जाए.
* राम मंदिर के लिए प्राप्त समस्त चंदे, चढ़ावे, भूमि खरीद, आयोजनों एवं व्ययों का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए.
आखिर में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भगवान श्रीराम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं. बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था के केंद्र हैं. भगवान राम के नाम पर जुटाए गए धन में अगर किसी तरह की कथित अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए.
पत्रकार वार्ता में प्रमुख रूप से श्रीमती स्मृति ठाकुर प्रभारी पत्रकार वार्ता, सुखचंद बेसरा अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी, मंजू ध्रुव अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ, रमेश शर्मा, माहेश्वरी शाह, छगन यादव, अवधेश प्रधान, अमित मीरी, श्रद्धा राजपूत चमन साहू, सुरेखा नागेश, खिलेश्वरी ध्रुव, राजकुमारी सोनी, दीप्ति यादव, मंजू देवांगन, यामीन खान, संदीप सरकार, अवधराम यादव, मुकुंद कुकरेजा, योगेश बघेल और परमजीत कौर मौजूद रहे.
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टिन्नू और भतीजे मनीष को 39 घंटे की पुलिस रिमांड
अयोध्या : अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में गिरफ्तार आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष यादव को फैजाबाद कोर्ट से 39 घंटे की पुलिस रिमांड में लिया गया. हालांकि पुलिस ने पूछताछ के लिए 7 दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने सिर्फ 39 घंटे की ही अनुमति दी.
पुलिस अब रिमांड अवधि के दौरान दोनों आरोपियों से चोरी की घटना, पैसों के लेन-देन और मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं से जुड़े कई पहलुओं पर पूछताछ करेगी. जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी कब से चल रही थी और इसमें कितने लोग शामिल हो सकते हैं.
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के करीबी माने जाते थे. टिन्नू मंदिर के दानपात्रों की देखरेख की जिम्मेदारी संभालता था. वहीं उसका भतीजा मनीष यादव मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती करने का काम करता था. दोनों ने अपनी जिम्मेदारियों का दुरुपयोग करते हुए चढ़ावे की राशि में हेराफेरी की.
पुलिस कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपियों के घरों से नकदी बरामद की गई. टिन्नू के घर से करीब 1 लाख रुपये और मनीष यादव के घर से करीब 2 लाख रुपये बरामद किए गए. पुलिस अब इस रकम के स्रोत और मंदिर के चढ़ावे से इसके संबंध की जांच कर रही है. इस मामले के सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रायश्चित अनुष्ठान शुरू कराया है. शुक्रवार सुबह 11 बजे से राम मंदिर परिसर में भगवान श्रीराम से क्षमा याचना के लिए विशेष पूजा-पाठ शुरु किया गया. ट्रस्ट की तरफ से आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में 18 पुजारी और 5 आचार्य शामिल हुए.
वहीं इस पूरे मामले के बीच मंदिर निर्माण समिति से जुड़े गोपाल राव के अयोध्या छोड़ने की खबर भी सामने आई है. सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने उनका कार्यक्षेत्र बदल दिया है. हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उन्हें किस स्थान पर भेजा गया है. गोपाल राव श्रीराम मंदिर निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. बताया जा रहा है कि 6 जुलाई को मंदिर निर्माण समिति की बैठक के बाद उन्हें इस जिम्मेदारी से हटा दिया गया था.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले ने मंदिर की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस और ट्रस्ट दोनों स्तरों पर मामले की जांच की जा रही है. पुलिस जहां आरोपियों से पूछताछ कर रही है. वहीं ट्रस्ट भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्थाओं की समीक्षा करने में जुटा है. श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पुलिस जल्द ही जांच पूरी कर आगे की कार्रवाई करने की तैयारी में है. माना जा रहा है कि रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ से चोरी की पूरी साजिश और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में अहम जानकारी सामने आ सकती है.
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