राजिम कुंभ कल्प: संत समागम में हो रहे भागवत महापुराण कथा का पूर्णाहुति के साथ समापन, 12 साल का नागा बाबा, बना कौतूहल का विषय

Rajim Kumbh Kalpa: Bhagwat Mahapuran Katha being held in Saint Samagam ends with Purnahuti, 12 year old Naga Baba becomes a subject of curiosity.

राजिम कुंभ कल्प: संत समागम में हो रहे भागवत महापुराण कथा का पूर्णाहुति के साथ समापन, 12 साल का नागा बाबा, बना कौतूहल का विषय

राजिम कुंभ कल्प: संत समागम में हो रहे भागवत महापुराण कथा का पूर्णाहुति के साथ समापन
राजिम कुंभ कल्प मेला के संत समागम परिसर में 13 से 19 फरवरी तक श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन किया गया। कथा वाचक डा. संजय कृष्ण सलिल महाराज ने 7 दिनों तक कुंभ मेले में भक्ति भाव की गंगा बहा दी। उन्होंने अपने प्रवचन में बताया कि भागवत लोगों को कल्याणार्थ मोक्ष प्रदान करने वाला है। सनातन धर्म में भागवत ऐसा ग्रंथ है, जो जीने की कला नहीं, अपितु मरने की भी कला सिखाती है। राजा परीक्षित को जब ज्ञात हुआ कि उनकी मृत्यु सातवें दिन निश्चित है, तब उन्होंने अपने कल्याणार्थ सुखदेव जी महाराज से भागवत कथा का शुद्ध अंतःकरण से श्रवण कर मोक्ष को प्राप्त किया। आज के दौर में भागवत कथा प्रासंगिक है क्योंकि जीवन के संघर्ष में व्यक्ति अपनी मृत्यु भूल गया है, जो अटल सत्य है। भागवत उसे मृत्यु के भय से मुक्त कर उसका मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। भागवत भक्त और भगवान के बीच कड़ी जोड़ने का काम करती है। यह भक्त और भगवान की कथा है, जिसमें राम, कृष्ण और महाभारत के विशेष प्रसंगों का वर्णन है कि किसी प्रकार जीवन में संयम रखते हुए मोक्ष की प्राप्ति की जा सकती है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश देते हुए कहा है कि धर्म का आचरण करते हुए व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए, तभी धर्म की स्थापना संभव है। कर्म प्रधान है, कर्म से ही व्यक्ति को अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्त होता है। लोभ क्रोध से मुक्ति मिलती है। निर्मल मन से की गई भक्ति से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है।
बुधवार को भागवत कथा का समापन पूर्णाहुति हवन पूजन के साथ संपन्न हुआ। भागवत कथा में उपस्थित पं. ब्रह्मदत्त शास्त्री ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प में लंबे अंतराल के बाद महाराज जी का कथा सुनने का सौभाग्य मिला है। आयोजन को सफल बनाने में उप संचालक प्रतापचंद पारख समेत प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी जुटे हुए थे। कथा का श्रवण करने प्रतिदिन भक्तों की भारी भीड़ रही।
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आज 21 फरवरी को राजिम कुंभ के मंच पर आएंगे बाबा हंसराज
मेरा भोला है भंडारी.., जय शिव शंभू.., जैसे ओतप्रोत भक्तिमय भजनों की होगी प्रस्तुति
तीर्थ नगरी राजिम में आयोजित कुंभ कल्प मेला के सांस्कृतिक मंच में 21 फरवरी शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह के मुख्य आतिथ्य में संत समागम उद्घाटन समारोह का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद प्रसिद्ध गायक हंसराज रघुवंशी के मेरा भोला है भंडारी.., जय शिव शंभू.., जैसे ओतप्रोत भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति होगी।
12 बजे से सांस्कृतिक मंच पर कार्यक्रम की कड़ी में कामीन टोण्डरे की टीम पंथी नृत्य की प्रस्तुति देगें। नंदकुमार साहू की मंडली द्वारा रासलीला की प्रस्तुति होगी। लोकेश्वर वर्मा छत्तीसढ़ी जसगीत से भक्तिमय माहौल बनाएगें। ललित यादव सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देंगे। शिवनंदन चक्रधारी मानस गायन से रामायण की व्यख्या करेंगे। धन्नू लाल साहू लोकमंच, साधे लाल रात्रे पंथी नृत्य, आंचल पांडेय की टीम नृत्य नाटिका, आरती साहू की टीम कत्थक नृत्य की प्रस्तुति देगें। देवी भूमिका भजन, व्यासनाथ योगी चदैंनी, आनंद निषाद लोककला मंच की प्रस्तुति देंगें।
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तोर पैरी के रुनझुन रुनझुन गीत ने दर्शकों का मन मोह लिया
राजिम कुंभ कल्प में आठवें दिन सांस्कृतिक मंच पर कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की सुंदर प्रस्तुति देकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। लीलाधर साहू ने लोककला मंच के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति को दर्शाते हुए सुपरहिट गीत और नृत्य से दर्शकों को मंत्र मुग्ध किया। गणेश वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए बेल तरी बेलन..., हाय रे डारा लोर..., जप हर-हर-हर भोला..., तोर पैरी के रुनझुन..., काबर तै मारे मोला..., छोड़ के मोला..., जैसे पॉपुलर छत्तीसगढ़ी गीत -नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति से दर्शक झूम उठें। कर्मा नृत्य सड़के..सड़के की प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल जीत लिया। इसी मंच पर गुंजन तिवारी ने सुंदर हाव भाव के साथ ताल से ताल मिलाते हुए कत्थक नृत्य की प्रस्तुति दी। केशव राम भाटापारा, ममता शिंदे, ईश्वर देवांगन साहू ने भी लोक कला मंच से अंत तक दर्शकों को झूमने के लिए विवश कर दिया। कलाकारों का सम्मान संयुक्त कलेक्टर राकेश गोलछा, राजिम एसडीएम विशाल महाराणा द्वारा किया गया।
इसी तरह दोपहर 12 बजे से स्थानीय मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत सतनाम बालिका पंथी दल द्वारा पंथी नृत्य से हुआ। बिजली की गति से पंथी नृत्य की शानदार प्रस्तुति देकर बालिका पंथी नृत्य ने दर्शकों की काफी ताली बटोरी। शुक्ला भाटा से आई फाग मंडली ने फाग गीत गाकर गीतों के माध्यम से ऐसा रंग बरसाया कि फाग गीत के रंग से दर्शक सराबोर हो गए। अकलवारा से आई मानस गायन मंडली ने मानस के चौपाइयों पर रामायण के प्रसंगों का वरण किया। सुमधुर वाणी से राम की वर्णनात्मक व्याख्या से श्रोता भक्ती में डूब गए। पोड़ की सतनाम मंगल भजन मंडली ने बाबा गुरु घासीदास के दर्शन और उद्देश्यों को गीतों के माध्यम से श्रोताओं को जोड़ने का प्रयास किया। सुमधुर भजनों की धून पर दर्शक झूम उठे। वनवरद अहिरवारा की लोक मंच के कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी गीतों पर अपनी प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोक कला से दर्शकों को जोड़ते हुए भरपूर मनोरंजन किया। इसके बाद पोखरा कॉकस गीत मंडली ने जस गीत गाकर पूरे पंडाल में भक्ती रस बिखेरा कि दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए। राजिम के प्रयाग साहित्य एवं त्रिवेणी साहित्य समिति के कवियों द्वारा कवि सम्मेलन में अपनी कविता, गीत, गजल द्वारा दर्शकों को खूब गुदगुदाया।
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राजिम कुंभ कल्प में पहुंचा 12 साल का नागा बाबा, बना कौतूहल का विषय
कठिन परीक्षा के बाद नागा साधु बनने होते हैं पात्र
राजिम कुंभ कल्प में विभिन्न क्षेत्रों से नागा साधु संत पहुंचे हुए हैं। इन नागा संतों के बीच एक 12 साल का नागा बाबा श्रद्धालुओं के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। नागा बाबा का नाम देवागिरी महाराज है, जो जूना अखाड़ा के 13 मणि जगरामा परिवार में शामिल हुआ है। कक्षा छटवीं तक पढ़ा नरसिंगपुर जिले का रहने वाला ये बाल नागा धर्म की रक्षा और ईश्वर प्राप्ति के लिए नागा बनना स्वीकार किया है। अभी उनकी प्रारंभिक स्थिति है। कुछ बरसों की कठिन परीक्षा और परीक्षण के बाद उन्हें विधिवत नागा पद्धति से दीक्षित किया जाएगा। तब वे पूर्ण रूप से नागा साधु बनने के लिए पात्र होंगे।
कुंभ मेले में पहुंचे लोगों में यह चर्चा बनी हुई है कि इतनी छोटी सी उम्र में नागा साधुओं के कठोर नियम और विधान को ये नन्हा बालक नागा साधु कैसे कर पाएगा? वैसे नागा साधुओं की बात करें तो, इसकी प्रक्रिया आसान नहीं होती है। नागा बनने के लिए पहले अखाड़े में सेवा देनी पड़ती है। इस दौरान अखाड़ा, आवेदक का इतिहास और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी इकट्ठा करता है। आवेदक का गृहस्थ आश्रम से कोई संबंध नहीं होना चाहिए। फिर किसी कुंभ मेले में उसे दीक्षा दी जाती है। जिसमें दीक्षा लेने वालो को पिंडदान करना होता है। दीक्षा प्रक्रिया के बाद उसे नए नाम के साथ अखाड़े में प्रवेश मिलता है।
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जानकी जयंती पर पर्व स्नान कल, शोभायात्रा निकालकर श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी
राजिम कुंभ कल्प के दौरान शुक्रवार 21 फरवरी को जानकी जयंती अवसर पर दूसरा पर्व स्नान किया जाएगा। जानकी जयंती के अवसर पर तीर्थ नगरी राजिम के त्रिवेणी संगम में तड़के सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुण्य स्नान करेंगे। वहीं जानकी जयंती के अवसर पर राजिम कुंभ मेला में विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे।
राजिम भक्तिन माता समिति के अध्यक्ष लाला साहू ने बताया कि नगर साहू संघ राजिम के अध्यक्ष भवानी शंकर साहू एवं सचिव राजू साहू के नेतृत्व में सुबह राजिम के महामाया मंदिर से विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो वीआईपी रोड होते हुए त्रिवेणी संगम में पहुंचकर डुबकी लगाकर रैली का समापन करेंगे। इस शोभायात्रा में करीब आश्रम प्रमुखों के अलावा विभिन्न समाज के लोग शामिल होंगे।
ज्ञात हो कि हिंदू धर्म में जानकी जयंती का विशेष महत्व है। जानकी जयंती को सीता अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस तिथि पर राजा जनक को माता सीता की प्राप्ति हुई थी और उन्होंने माता सीता को अपनी संतान के रूप में स्वीकार किया था। इस दिन माता सीता के साथ भगवान राम की पूजा और उपवास रखकर पूजा अर्चना करने से भक्तों को पुण्य लाभ मिलता है। साथ ही इस दिन पूजा के दौरान विशेष स्तोत्र का पाठ करने से परिवार में सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है

राजिम कुंभ कल्प में 21 फरवरी से विराट संत समागम का आयोजन : डोम, स्विस कॉटेज, कुटिया से सजा संत समागम क्षेत्र
12 फरवरी से प्रारंभ हुए राजिम कुंभ कल्प मेला की भव्यता दिनों दिन बढ़ती जा रही है। वैसे तो राजिम कुंभ माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक आयोजित होता है। इसके अंतर्गत संत-समागम का भी आयोजन किया जाता है। इस बार संत समागम का उद्घाटन 21 फरवरी को होने जा रहा है, जो 26 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलेगा। जिसमें विभिन्न धार्मिक स्थलों से साधु-संत शामिल होंगे।
इस बार राजिम कुंभ में संतों का आगमन शुरू हो चुका है। संतो के स्वागत हेतु कुंभ नगरी राजिम में संत समागम स्थल सजकर तैयार है। त्रिवेणी संगम स्थित संत समागम स्थल पर साधु-संतों, महामंडलेश्वरों, आचार्य महात्माओं के लिए विशाल डोम, स्विस कॉटेज, कुटिया तथा यज्ञ शाला का निर्माण किया गया है, जिसमें संत महात्माओं द्वारा विभिन्न प्रकार के यज्ञ अनुष्ठान को पूरी वैदिक रीतियों के साथ सम्पन्न कराया जाता है तथा संत समागम के विशाल मंच से संतों के प्रवचन आशीष वचन के रूप में श्रद्धालुओं को सुनने का पुण्य लाभ मिलेगा।
पंडोखर सरकार का लगेगा दिव्य दरबार
संत समागम परिसर में इस बार गुरुशरण महाराज ‘‘पंडोखर सरकार’’ का 21 से 25 फरवरी तक दिव्य दरबार लगेगा। जिसमें महाराज जी कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की विभिन्न दैहिक, दैविक एवं भौतिक समस्याओं का समाधान करेंगे। पंडोखर धाम एवं श्री गुरुशरण महाराज के प्रति भक्तों की गहरी आस्था है। महाराज जी के आगमन को लेकर भक्तों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।
देशभर से पहुंचेंगे साधु-संत
इस बार कुंभ कल्प में आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद भारती, महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद गिरी, महामंडलेश्वर नवल गिरी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशानंद महाराज, महामंडलेश्वर मनमोहनदास महाराज, दंडी स्वामी सच्चिदानंद तीर्थ महाराज, चक्रमहामेरूपीठम, बाल योगेश्वर बालयोगी रामबालक दास महाराज, साध्वी महंत प्रज्ञा भारती, स्वामी ज्ञानस्वरूपानंद अक्रिय के अलावा बड़े-बड़े संत महात्मा शामिल होंगे। धर्मगुरुओं के अलावा हरिद्वार, प्रयागराज, कांसी, बनारस, मथुरा, वृंदावन, अयोध्या, अमरकंटक, चित्रकूट, उत्तराखंड से बड़ी संख्या में साधु-संतों की टोली राजिम कुंभ कल्प मेला में पहुंचेगी।