‘पुष्पा’ स्टाइल में सागौन की स्मगलिंग, नदी पर लकड़ी का ‘सिनेमाई’ कांड का पर्दाफाश, तस्कर कर रहे सरेआम तस्करी, फाइलों में उलझा विभाग!
Smuggling of teak in 'Pushpa' style, 'cinematic' incident of wood being smuggled on the river exposed, smugglers are doing smuggling openly, department is entangled in files!
उदंती रेंज (रायपुर संभाग) : नदी का बहाव, लकड़ी के लट्ठे और ऊपर खड़े तस्कर ऐसा नजारा कोई फिल्मी क्लाइमैक्स नहीं.. बल्कि जमीन पर रोज दिखने वाली सच्चाई बन चुका है. उदंती रेंज में तस्करों ने जो तरीका अपना लिया है. वह न सिर्फ़ नये पन में चौंकाने वाला है. बल्कि वन संरक्षण व्यवस्था की सूचना-निगरानी की पोल भी खोलता है. स्थानीय लोग और पर्यावरणकर्ता इसे बिना शर्त ‘पुष्पा-स्टाइल’ करार दे रहे हैं.
मिली जानकारी के मुताबिक कीमती सागवान काटकर लट्ठों में बांधा जाता है. नदी के बहाव पर इन्हें छोड़ दिया जाता है और तस्कर उन पर खड़े होकर एक राज्य से दूसरे राज्य तक ‘फिल्मी अंदाज़’ में लकड़ी पहुंचाते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई एक-दो बार की घटना नहीं. महीनों से यही तरीका चल रहा है और आसपास के इलाकों में सागवान बड़े पैमाने पर गायब हो रहा है.
“यह तो देखने में फिल्म जैसा है लेकिन असलियत झकझोर देने वाली है. हम रोज़ देखते हैं कि रात में लकड़ी निकलती है और सुबह तक कुछ पता नहीं चलता. -एक स्थानीय निवासी
कर्मचारियों का कहना है कि “पतासाजी की टीमों को लगाया गया है और कार्रवाई जल्द की जाएगी.” लेकिन स्थानीय लोगों का गुस्सा घटने का नाम नहीं ले रहा है. वे कहते हैं कि फाइलों में उलझा प्रशासन जंगल के वासियों से बड़े-बड़े एनओसी मांगता है. लेकिन असल कटाई और तस्करी पर कार्रवाई धीमी और कम प्रभावी रही है.
उदंती-सीता नदी टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील संरक्षण इलाके हैं. यहां की हर कटाई सिर्फ पेड़ की कमी नहीं, बल्कि जैव विविधता और इकोसिस्टम की बर्बादी है. स्थानीय बोल रहे हैं कि अगर रोक न लगी तो आने वाले समय में यह ‘सिनेमाई’ तस्करी स्थायी रुप से बढ़ जाएगी और जंगल नक़्शे से घटते चले जाएंगे.
वन विभाग के कर्मियों ने बहाव की परवाह किए बिना जोखिम उठाया और नदी में उतरकर सागौन के कई लट्ठों को जब्त कर लिया. बरामद लकड़ी लाखों रुपये की बताई जा रही है.
सूत्रों के मुताबिक यह गिरोह अभयारण्य क्षेत्र से सागौन काटकर उसे नदी में बहाता था. जो ओडिशा के नुआपड़ा जिले के सीमावर्ती गांवों तक पहुँचाई जाती थी. बरसाती बहाव और दुर्गम इलाकों का फायदा उठाकर यह अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा था.
उदंती सीता नदी अभयारण्य के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि “टीम ने सागौन के लट्ठे जब्त कर लिए हैं और तस्करों की पहचान कर ली गई है. बहुत जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.”
वन विभाग अब नदी मार्ग से जुड़ी तस्करी की इस नई चाल को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने और सीमावर्ती गांवों में संयुक्त अभियान चलाने की तैयारी में है.
स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रशासन से कार्रवाई तेज़ करने की मांग की है. उनका कहना है कि “जंगल की यह लूट अब नदी के रास्ते हो रही है. अगर समय रहते इसे नहीं रोका गया तो पूरा अभयारण्य उजड़ जाएगा.
वन विभाग के दावों की पोल भी खुलती दिखाई दे रही है. उच्च स्तरीय सैटेलाइट कैमरा के निगरानी की बातें अक्सर की जाती हैं. लेकिन यही सैटेलाइट कैमरा जब नदी के बहते लट्ठों को नहीं पकड़ पा रही तो कई सवाल खड़े हो जाते हैं. क्या सैटेलाइट को चकमा देना अब भी संभव है? यह प्रश्न सिर्फ स्थानीयों तक सीमित नहीं रहा. वन संरक्षण व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी उंगली उठी है.
विशेषज्ञों का मानना है कि तस्कर लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं. जो आज नदी के लट्ठे हैं, कल ड्रोन, फिर नए बंदोबस्त।। और यही परिवर्तन वन विभाग की सावधानी पर भारी पड़ता है. सैटेलाइट को कारगर बनाने के लिए जमीन पर निगरानी, स्थानीय वार्डनों की टुकड़ियाँ और समुदाय आधारित सूचना तंत्र जरुरी हैं. वरना तस्कर नए-नए ‘पुष्पा स्टाइल’ स्टंट करते हुए आगे बढ़ेंगे.
अब सवाल यही है: क्या वन विभाग अपनी फाइलों और दावों के बीच से उठ कर ठोस कार्रवाई करेगा, या तस्करों के ‘पुष्पा 3/4’ जैसे स्टंट आने वाले दिनों में और मजबूत होते जाएंगे? ग्रामीणों की आशंका यही है कि अगर रोक नहीं लगी तो आने वाले वक्त में पुष्पा-स्टाइल तस्करी की लाइनें बढ़ेंगी और देश की प्राकृतिक विरासत नक़्शे से मिटती चली जाएगी.
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