सरकारी तंत्र की उदासीनता उजागर, दिसंबर का चावल न मिलने पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, राशन दूकान के सामने धरना, उग्र आंदोलन की चेतावनी
The indifference of the government machinery is exposed; villagers express anger over not receiving December's rice, stage a sit-in in front of the ration shop, and threaten a violent protest.
दुर्ग : दुर्ग जिला के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कौही (रानीतराई) में सरकारी राशन वितरण की व्यवस्था पटरी से उतर गई है. दिसंबर का महीना बीतने को है. लेकिन अब तक ग्रामीणों को उनके हक का चावल नहीं मिला है. इस अव्यवस्था से नाराज ग्रामीणों ने उचित मूल्य की दुकान के सामने मोर्चा खोल दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
ग्रामीणों का आरोप है कि राशन वितरण में लगातार देरी और अनियमितता बरती जा रही है. जरुरतमंद परिवारों के लिए राशन ही जीवनयापन का मुख्य आधार है. लेकिन समय पर वितरण न होने से उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है. ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर घंटों दुकान के सामने धरना दिया और खाद्य विभाग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की.
विवाद बढ़ता देख खाद्य विभाग के अधिकारियों ने गांव का दौरा किया था और स्थिति का जायजा लेकर एक रिपोर्ट तैयार की थी. अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि यह प्रतिवेदन पाटन एसडीएम (SDM) को सौंपा जाएगा और समस्या का समाधान होगा. हालांकि 12 दिन बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई बदलाव नहीं दिखा. जिससे स्थानीय लोगों में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है.
स्थानीय निवासियों ने राशन दुकान संचालक की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि-
राशन दुकान अक्सर महीने के आखिरी दिनों में ही खोली जाती है.
देर से दुकान खुलने के कारण केवल आधे लोगों को ही राशन मिल पाता है.
बाकी बचे हुए हितग्राहियों को अगले महीने तक इंतजार करने के लिए मजबूर किया जाता है.
पिछले महीने का राशन भी देरी से दिसंबर में बांटा गया था. जबकि दिसंबर का कोटा अब तक अटका हुआ है.
सरकारी तंत्र की उदासीनता उजागर
ग्राम कौही की यह हालत सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की खामियों को उजागर करती है. अधिकारियों की निष्क्रियता और दुकान संचालक की मनमानी ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी राशन योजनाओं पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही राशन वितरण शुरु नहीं किया गया. तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करेंगे.
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